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‘खोखों’ का भी रखना होगा हिसाब
Muzaffar nagar
Updated Sat, 02 Feb 2013 05:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर, 1 फरवरी। शस्त्र लाइसेंस धारकों को कारतूस खरीदने के लिए विक्रेता के सामने खोखे जमा करने पड़ेंगे। बिना इसके कारतूस नहीं मिल सकेंगे। जितने कारतूस खरीदने हैं, उतने ही खोखे विक्रेता के पास जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जिला प्रशासन की नई व्यवस्था के तहत शस्त्र लाइसेंस धारक को अगर विक्रेता से कारतूस खरीदने हैं तो उसे खोखे जमा कराने होंगे। सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी की ओर से सभी शस्त्र एवं कारतूस विक्रेताओं को यह आदेश जारी किया गया है। 18 जनवरी से यह आदेश जिले में प्रभावी हो गया है। फायरिंग की वजह और कारण कोई भी रहा हो, बिना खोखे प्रस्तुत किए कोई भी विक्रेता किसी भी शस्त्र लाइसेंस धारक को कारतूस नहीं बेच सकेगा। विक्रेता जितने भी कारतूस बेचता है, पूरा ब्योरा मय खोखे कचहरी स्थित शस्त्र सहायक कार्यालय में देना होगा। इस नई व्यवस्था के पीछे प्रशासन का तर्क है कि नियमानुसार शस्त्रधारक एक समय में 30 और एक साल में केवल 50 कारतूस खरीद सकता है, लेकिन अगर शस्त्रधारक प्रयोग शुदा कारतूसों के खाली खोखे जमा नहीं करा रहा है तो स्पष्ट है कि पूर्व में खरीदे गए कारतूस प्रयोग नहीं किए गए और उनका वह दुरुपयोग कर सकता है अथवा किसी अपराधी को बेच सकता है। उधर, ग्रामीण अंचल के शस्त्र लाइसेंस धारकों का कहना है कि जंगल में बदमाशों पर की गई फायरिंग के बाद खोखे एकत्र करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में इस तरह की व्यवस्था लागू करने का मकसद केवल लोगों को परेशान करना है।
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जिला प्रशासन की नई व्यवस्था के तहत शस्त्र लाइसेंस धारक को अगर विक्रेता से कारतूस खरीदने हैं तो उसे खोखे जमा कराने होंगे। सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी की ओर से सभी शस्त्र एवं कारतूस विक्रेताओं को यह आदेश जारी किया गया है। 18 जनवरी से यह आदेश जिले में प्रभावी हो गया है। फायरिंग की वजह और कारण कोई भी रहा हो, बिना खोखे प्रस्तुत किए कोई भी विक्रेता किसी भी शस्त्र लाइसेंस धारक को कारतूस नहीं बेच सकेगा। विक्रेता जितने भी कारतूस बेचता है, पूरा ब्योरा मय खोखे कचहरी स्थित शस्त्र सहायक कार्यालय में देना होगा। इस नई व्यवस्था के पीछे प्रशासन का तर्क है कि नियमानुसार शस्त्रधारक एक समय में 30 और एक साल में केवल 50 कारतूस खरीद सकता है, लेकिन अगर शस्त्रधारक प्रयोग शुदा कारतूसों के खाली खोखे जमा नहीं करा रहा है तो स्पष्ट है कि पूर्व में खरीदे गए कारतूस प्रयोग नहीं किए गए और उनका वह दुरुपयोग कर सकता है अथवा किसी अपराधी को बेच सकता है। उधर, ग्रामीण अंचल के शस्त्र लाइसेंस धारकों का कहना है कि जंगल में बदमाशों पर की गई फायरिंग के बाद खोखे एकत्र करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में इस तरह की व्यवस्था लागू करने का मकसद केवल लोगों को परेशान करना है।
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