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वैदिक संस्कृति से आएगा नैतिक आचरण: गुरुदत
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:23 AM IST
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कम्हेड़ा में एकता और सद्भाव को देव यज्ञ
पुरकाजी। आर्य समाज कम्हेड़ा में राष्ट्रीय शांति, सद्भावना, एकता और कल्याण के लिए आयोजित देवयज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति मानवीय मूल्यों और नैतिक आचरण को प्रेरित करती है।
गांव कम्हेड़ा तुगलकपुर में आयोजित देव यज्ञ में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि यज्ञ सबसे श्रेष्ठ कर्म हैं। वायु, जल, पृथ्वी, आकाश की शुद्धि और पवित्रता के लिए यज्ञ आवश्यक है। गाय घृत , गूगल, केसर, चंदन, गिलोय, जायफल आदि प्राकृतिक पदार्थों की सामग्री से यज्ञ करें। घर में विषैले कीटाणु नष्ट हो जाएंगे। स्वाइन फ्लू जैसे बीमारी से रक्षा संभव है। यज्ञ निरोगी, दीर्घायु, स्वस्थ जीवन में उपयोगी है। श्रीराम, योगीराज श्री कृष्ण प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। उन्होंने कहा कि यज्ञकर्म से स्वार्थ की भावना समाप्त होती हैं। परिवार में संस्कार, सुशिक्षा, वेदानुकूल आचरण मिलता हैं। स्वामी आदित्यानंद ने कहा कि माता-पिता संस्कारवान बनेंगे तभी संतान भी गुणवान होगी। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि जीवन में सुख, शांति और कल्याण के लिए वैदिक सँस्कृति अपनाए। समारोह में आर्य समाज की अमूल्य सेवाओं के लिए स्वामी आदित्यानंद का आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। भजनोपदेशक पंडित ब्रजपाल आर्य, राजेंद्र आर्य, जय प्रकाश शर्मा, तेजपाल सिंह, हरवीर सिंह आर्य, सोमपाल सिंह आर्य, राजपाल सिंह आर्य ने विचार रखे। संचालन महक सिंह आर्य ने किया।
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पुरकाजी। आर्य समाज कम्हेड़ा में राष्ट्रीय शांति, सद्भावना, एकता और कल्याण के लिए आयोजित देवयज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति मानवीय मूल्यों और नैतिक आचरण को प्रेरित करती है।
गांव कम्हेड़ा तुगलकपुर में आयोजित देव यज्ञ में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि यज्ञ सबसे श्रेष्ठ कर्म हैं। वायु, जल, पृथ्वी, आकाश की शुद्धि और पवित्रता के लिए यज्ञ आवश्यक है। गाय घृत , गूगल, केसर, चंदन, गिलोय, जायफल आदि प्राकृतिक पदार्थों की सामग्री से यज्ञ करें। घर में विषैले कीटाणु नष्ट हो जाएंगे। स्वाइन फ्लू जैसे बीमारी से रक्षा संभव है। यज्ञ निरोगी, दीर्घायु, स्वस्थ जीवन में उपयोगी है। श्रीराम, योगीराज श्री कृष्ण प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। उन्होंने कहा कि यज्ञकर्म से स्वार्थ की भावना समाप्त होती हैं। परिवार में संस्कार, सुशिक्षा, वेदानुकूल आचरण मिलता हैं। स्वामी आदित्यानंद ने कहा कि माता-पिता संस्कारवान बनेंगे तभी संतान भी गुणवान होगी। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि जीवन में सुख, शांति और कल्याण के लिए वैदिक सँस्कृति अपनाए। समारोह में आर्य समाज की अमूल्य सेवाओं के लिए स्वामी आदित्यानंद का आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। भजनोपदेशक पंडित ब्रजपाल आर्य, राजेंद्र आर्य, जय प्रकाश शर्मा, तेजपाल सिंह, हरवीर सिंह आर्य, सोमपाल सिंह आर्य, राजपाल सिंह आर्य ने विचार रखे। संचालन महक सिंह आर्य ने किया।
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