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बंदरों ने सीमेंट की चादरें गिराई, दो बच्चे घायल
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बंदरों ने सीमेंट की चादरें गिराई, दो बच्चे घायल
रतनपुरी। बंदरों ने उत्पात मचाते हुए परचून की दुकान के बाहर लगी सीमेंट की चादरें गिरा दी। दुकान के बाहर खरीदारी करने आए भाई और बहन चादरों के नीचे दबने से घायल हो गए। दुकानदार भी बाल बाल बच गया।
रतनपुरी बस स्टैंड पर बाबू कश्यप पुत्र श्रीचंद कश्यप की परचून की दुकान है। दुकानदार बाबू ने दुकान के बाहर सीमेंट की चादरें डाल रखी है। सोमवार को करीब साढ़े पांच बजे पड़ोस में मोहर सिंह के यहां आए हुए उसके नाती चार वर्षीय निखिल व छह साल का नातिन निशा बाबू की दुकान पर सामान लेने के लिए पहुंचे। अचानक बंदरों का एक झुंड आया और उन्होंने उत्पात मचाते हुए सीमेंट की चादरों के ऊपर ईंटों का पिलर गिरा दिया, जिससे सभी चादरें फ्रेम सहित एक साथ नीचे आ गिरी। अचानक चादरें और फ्रेम गिरने से नीचे खड़े दोनों बच्चे निखिल और निशा घायल हो गए। दुकानदार दुकान के अंदर सामान लेने गया हुआ था। इसके अलावा दुकान के बाहर रखा सारा सामान भी इधर उधर बिखर गया। वहां मौजूद लोगों ने दोनों बच्चों को बड़ी मुश्किल से सीमेंट की चादरों के नीचे से निकाला। इसके बाद दोनों बच्चों को गांव में ही निजी चिकित्सक के यहां प्राथमिक उपचार दिलाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बंदरों के आतंक के कारण दहशत है। अभी तक बंदरों के हमले में कई ग्रामीण घायल हो चुके हैं। इसके अलावा बंदर घरों में भी काफी नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की है।
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रतनपुरी। बंदरों ने उत्पात मचाते हुए परचून की दुकान के बाहर लगी सीमेंट की चादरें गिरा दी। दुकान के बाहर खरीदारी करने आए भाई और बहन चादरों के नीचे दबने से घायल हो गए। दुकानदार भी बाल बाल बच गया।
रतनपुरी बस स्टैंड पर बाबू कश्यप पुत्र श्रीचंद कश्यप की परचून की दुकान है। दुकानदार बाबू ने दुकान के बाहर सीमेंट की चादरें डाल रखी है। सोमवार को करीब साढ़े पांच बजे पड़ोस में मोहर सिंह के यहां आए हुए उसके नाती चार वर्षीय निखिल व छह साल का नातिन निशा बाबू की दुकान पर सामान लेने के लिए पहुंचे। अचानक बंदरों का एक झुंड आया और उन्होंने उत्पात मचाते हुए सीमेंट की चादरों के ऊपर ईंटों का पिलर गिरा दिया, जिससे सभी चादरें फ्रेम सहित एक साथ नीचे आ गिरी। अचानक चादरें और फ्रेम गिरने से नीचे खड़े दोनों बच्चे निखिल और निशा घायल हो गए। दुकानदार दुकान के अंदर सामान लेने गया हुआ था। इसके अलावा दुकान के बाहर रखा सारा सामान भी इधर उधर बिखर गया। वहां मौजूद लोगों ने दोनों बच्चों को बड़ी मुश्किल से सीमेंट की चादरों के नीचे से निकाला। इसके बाद दोनों बच्चों को गांव में ही निजी चिकित्सक के यहां प्राथमिक उपचार दिलाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बंदरों के आतंक के कारण दहशत है। अभी तक बंदरों के हमले में कई ग्रामीण घायल हो चुके हैं। इसके अलावा बंदर घरों में भी काफी नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की है।
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