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लोस में तीन तलाक बिल पास हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में करेंगें चैलेंज: जिलानी
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देवबंद (सहारनपुर)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा तीन तलाक बिल को फिर से मंजूरी दिए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने दो टूक कहा कि यदि तीन तलाक बिल लोकसभा में पास होता है तो पर्सनल लॉ बोर्ड इसको सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए मुसलमानों पर बिल को जबरदस्ती थोपना चाह रही है।
रविवार को खास बातचीत में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने यूनिफार्म सिविल कोड को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल किया हुआ है। उसका सीधा सा मकसद है कि वह मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर आगामी लोकसभा चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा जबरदस्ती मुसलमानों पर तीन तलाक बिल थोपना चाह रही है, जबकि पूरे हिंदुस्तान में इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया गया और साफ कहा गया कि मुसलमान इस बिल को किसी कीमत पर मंजूर नहीं करेंगे। केंद्र सरकार हठधर्मी के चलते इस बिल को पास कराने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक यह आर्डिनेंस अस्थाई है तब तक इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता। क्योंकि पूर्व में केरल की एक रिट सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अस्थाई मामलों में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इसलिए लोकसभा में बिल पास होने के बाद बोर्ड इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेगा जिसके लिए बोर्ड की लीगल कमेटी और उलमा से राय मशविरा किया जा रहा है।
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रविवार को खास बातचीत में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने यूनिफार्म सिविल कोड को अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल किया हुआ है। उसका सीधा सा मकसद है कि वह मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर आगामी लोकसभा चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा जबरदस्ती मुसलमानों पर तीन तलाक बिल थोपना चाह रही है, जबकि पूरे हिंदुस्तान में इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया गया और साफ कहा गया कि मुसलमान इस बिल को किसी कीमत पर मंजूर नहीं करेंगे। केंद्र सरकार हठधर्मी के चलते इस बिल को पास कराने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक यह आर्डिनेंस अस्थाई है तब तक इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता। क्योंकि पूर्व में केरल की एक रिट सुप्रीम कोर्ट में फाइल की गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अस्थाई मामलों में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इसलिए लोकसभा में बिल पास होने के बाद बोर्ड इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेगा जिसके लिए बोर्ड की लीगल कमेटी और उलमा से राय मशविरा किया जा रहा है।
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