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न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने दुकाने तुडवाई
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:42 AM IST
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प्रशासन ने बुढ़ाना में छह दुकानें जमींदोज की
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने कस्बे के छोटे बाजार के पास सड़क किनारे बनी छह दुकानों को गिरवा दिया। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि ये दुकानें अतिक्रमण का रूप ले चुकी थी।
कस्बे के छोटे बाजार के पास सड़क किनारे वर्ष 2001 में नगर पंचायत द्वारा अपनी खाली पड़ी जमीन में छह दुकानों का निर्माण कराया था। अधिशासी अधिकारी ओम गिरि ने बताया कि पांच दुकानें सड़क किनारे नीचे तथा एक ऊपर बनाई गई थी, जिस समय दुकानों का निर्माण कराया गया, उस समय कस्बे के बीच से गुजरने वाली सड़क वन वे थी। सरकार की चौड़ीकरण की नीति के अनुसार जाम की समस्या से निजात पाने के लिए वर्ष 2008 में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। नगर पंचायत द्वारा बनाई गई ये दुकानें सड़क के चौड़ीकरण में बाधा बनी हुई था तथा अतिक्रमण का रूप ले चुकी थी। इन दुकानों को खाली करवाने के लिए किरायेदारों को नोटिस जारी किए गए। सभी दुकानदार नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में चले गए। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट द्वारा इन दुकानों को अतिक्रमण मानते हुए गिराने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेशों पर किसी कारणवश कार्रवाई नही हो सकी। न्यायालय के इस निर्णय के खिलाफ दुकानदारों ने वर्ष 2017 में दोबारा रिट दायर की। हाईकोर्ट ने अपने पुराने निर्णय को संज्ञान में रखते हुए 7 सितंबर 2017 को फिर दुकानें गिरवाने का आदेश प्रशासन को दिया। न्यायालय के आदेश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन हरीशचंद्र तथा तहसीलदार रतन वर्मा, अधिशासी अधिकारी ओम गिरि कार्यालय के सभी कर्मचारियों तथा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सोमवार को प्रात: करीब तीन बजे जेसीबी मशीन द्वारा सभी दुकानों को गिरवाकर उनके मलबे को हटवा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मुख्य सड़क पर यातायात बाधित न होने के कारण दुकानें तुड़वाने का निर्णय भोर में लिया गया।
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)।
न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने कस्बे के छोटे बाजार के पास सड़क किनारे बनी छह दुकानों को गिरवा दिया। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि ये दुकानें अतिक्रमण का रूप ले चुकी थी।
कस्बे के छोटे बाजार के पास सड़क किनारे वर्ष 2001 में नगर पंचायत द्वारा अपनी खाली पड़ी जमीन में छह दुकानों का निर्माण कराया था। अधिशासी अधिकारी ओम गिरि ने बताया कि पांच दुकानें सड़क किनारे नीचे तथा एक ऊपर बनाई गई थी, जिस समय दुकानों का निर्माण कराया गया, उस समय कस्बे के बीच से गुजरने वाली सड़क वन वे थी। सरकार की चौड़ीकरण की नीति के अनुसार जाम की समस्या से निजात पाने के लिए वर्ष 2008 में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। नगर पंचायत द्वारा बनाई गई ये दुकानें सड़क के चौड़ीकरण में बाधा बनी हुई था तथा अतिक्रमण का रूप ले चुकी थी। इन दुकानों को खाली करवाने के लिए किरायेदारों को नोटिस जारी किए गए। सभी दुकानदार नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में चले गए। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट द्वारा इन दुकानों को अतिक्रमण मानते हुए गिराने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेशों पर किसी कारणवश कार्रवाई नही हो सकी। न्यायालय के इस निर्णय के खिलाफ दुकानदारों ने वर्ष 2017 में दोबारा रिट दायर की। हाईकोर्ट ने अपने पुराने निर्णय को संज्ञान में रखते हुए 7 सितंबर 2017 को फिर दुकानें गिरवाने का आदेश प्रशासन को दिया। न्यायालय के आदेश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन हरीशचंद्र तथा तहसीलदार रतन वर्मा, अधिशासी अधिकारी ओम गिरि कार्यालय के सभी कर्मचारियों तथा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सोमवार को प्रात: करीब तीन बजे जेसीबी मशीन द्वारा सभी दुकानों को गिरवाकर उनके मलबे को हटवा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मुख्य सड़क पर यातायात बाधित न होने के कारण दुकानें तुड़वाने का निर्णय भोर में लिया गया।
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