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तलाक से सिसकती महिलाओं का छलका दर्द
Updated Thu, 24 Aug 2017 12:53 AM IST
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तलाक से सिसकती महिलाओं का छलका दर्द
पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भले ही उलमा की राय जुदा-जुदा हो, लेकिन तलाक के दंश में सिसक रही महिलाओं ने इसे नजीर बताया है। तलाक पीड़िताओं ने साफ कहा कि फैसले पर खुशी है, मगर अब इस पर कड़ा कानून बनाए जाने की की जरूरत है, ताकि महिला समाज का शोषण, उत्पीड़ऩ भी थम सके।
मोहल्ला सरावज्ञान निवासी मेहरु का 18 साल पहले तलाक हो गया था। बच्चों को किस तरह से बड़ा किया है यह वही जानती है। फैसला महिलाओं के हक के लिए आया है। अब बदलाव होने चाहिए। तलाकशुदा जमीला ने कहा कि 15 साल पूर्व तलाक होने के बाद वह अपने पिता के पास रहकर अपना जिंदगी गुजार रही है। वहीं, करीब 10 वर्षों से अपने पति से अलग रह रही रानी ने कहा कि तलाक का दंश महिलाओं पर ही भारी होता है।
पुरुष समाज इससे कोई इत्तेफाक नहीं रखते हैं। पलभर में रिश्ता खत्म होने के बाद महिला की जिंदगी क्या होती है और किस तरह दिन गुजरते हैं। उससे ज्यादा कोई नहीं बता सका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शहरकाजी मुफ्ती तंमीक अहमद ने कहा कि फैसला सरकार व नामभर की मुस्लिम महिलाओं के हक में आया है। तीन तलाक कुरआन, हदीस से साबित है, इसे अलग नहीं किया जा सकता है। साथ ही बोले की एक बार में तीन तलाक देना गुनाह है। मजहब-ए-इस्लाम में इसे बड़ा गुनाह कहा गया है।
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भले ही उलमा की राय जुदा-जुदा हो, लेकिन तलाक के दंश में सिसक रही महिलाओं ने इसे नजीर बताया है। तलाक पीड़िताओं ने साफ कहा कि फैसले पर खुशी है, मगर अब इस पर कड़ा कानून बनाए जाने की की जरूरत है, ताकि महिला समाज का शोषण, उत्पीड़ऩ भी थम सके।
मोहल्ला सरावज्ञान निवासी मेहरु का 18 साल पहले तलाक हो गया था। बच्चों को किस तरह से बड़ा किया है यह वही जानती है। फैसला महिलाओं के हक के लिए आया है। अब बदलाव होने चाहिए। तलाकशुदा जमीला ने कहा कि 15 साल पूर्व तलाक होने के बाद वह अपने पिता के पास रहकर अपना जिंदगी गुजार रही है। वहीं, करीब 10 वर्षों से अपने पति से अलग रह रही रानी ने कहा कि तलाक का दंश महिलाओं पर ही भारी होता है।
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पुरुष समाज इससे कोई इत्तेफाक नहीं रखते हैं। पलभर में रिश्ता खत्म होने के बाद महिला की जिंदगी क्या होती है और किस तरह दिन गुजरते हैं। उससे ज्यादा कोई नहीं बता सका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शहरकाजी मुफ्ती तंमीक अहमद ने कहा कि फैसला सरकार व नामभर की मुस्लिम महिलाओं के हक में आया है। तीन तलाक कुरआन, हदीस से साबित है, इसे अलग नहीं किया जा सकता है। साथ ही बोले की एक बार में तीन तलाक देना गुनाह है। मजहब-ए-इस्लाम में इसे बड़ा गुनाह कहा गया है।
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