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मुआवजा वितरण में प्रशासन व रेलवे विभाग पर भेदभाव का आरोप
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मुआवजा वितरण में प्रशासन व रेलवे विभाग पर भेदभाव का आरोप
देवबंद (सहारनपुर)। देवबंद- रुड़की रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के निर्माण हेतु अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के वितरण में उत्तराखंड की सीमा से सटे देवबंद के 13 गांवों के किसानों ने प्रशासन और रेलवे विभाग पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
रविवार को देवबंद पहुंचे जटोल, मझोल, भन्हेड़ा, न्यामतपुर, माजरी, पीरमाजरा, दिवालहेड़ी और करंजाली आदि गांवों के किसानों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि देनबंद-रुड़की नई रेलवे लाइन बनाने के लिए उत्तराखंड की सीमा से सटे देवबंद के 13 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। उनके क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट 52 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि उन्हें मुआवजा 10.29 लाख रुपये प्रति बीघा दिया जा रहा है। जबकि सीमा से सटे उत्तराखंड के शीतलपुर गांव का सर्किल रेट 16 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि वहां मुआवजा 22.75 लाख रुपये प्रति बीघा दिया जा रहा है। किसान अरुण कुमार, हुकम सिंह, राजेंद्र, दुष्यंत शर्मा और राधे प्रधान ने बताया कि मुआवजा वितरण में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। जबकि उनकी जमीन का सर्किल रेट भी उत्तराखंड की जमीन से तीन गुणा अधिक है। उन्होंने शासन प्रशासन से शीतलपुर गांव के बराबर 22.75 लाख रुपये बीघा का मुआवजा दिलाने, परिवार के एक सदस्य को रेलवे में सरकारी नौकरी या फिर फ्रेट कॉरिडोर के हिसाब से 6.70 लाख रुपये का मुआवजा अनुदान दिलाने, एक गांव में दो अलग-अलग रेट को एक करके समान मुआवजा दिलाने, सड़क से 500 मीटर दूरी तक की जमीन का रेट दिलाने तथा खेतों में खड़े पेड़ों की कीमत पहले दिलाकर बाद में उस पर कब्जा लेने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरा नहीं हो जाती, वह अपनी जमीनों का अधिग्रहण नहीं होने देंगे। पत्रकार वार्ता में गजेंद्र, सत्येंद्र, नकलीराम, रकम सिंह, विनोद कुमार, ईश्वर चंद गौड़, सुशील प्रधान, सहेंद्र, सतेंद्र, देविंद्र, राकेश व कुलदीप आदि रहे।
संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर कराएंगे समस्या का समाधान
भूमि अधिग्रहण मामले में उनसे कोई भी किसान आकर नहीं मिला। सर्किल रेट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जिस क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट जैसा है, उसी हिसाब से सरकार उनको मुआवजा दे रही है। फिर भी यदि किसान अपनी समस्या उनके समक्ष रखेंगे तो उनकी बात संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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-ब्रिजेश सिंह, विधायक देवबंद।
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देवबंद (सहारनपुर)। देवबंद- रुड़की रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के निर्माण हेतु अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के वितरण में उत्तराखंड की सीमा से सटे देवबंद के 13 गांवों के किसानों ने प्रशासन और रेलवे विभाग पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
रविवार को देवबंद पहुंचे जटोल, मझोल, भन्हेड़ा, न्यामतपुर, माजरी, पीरमाजरा, दिवालहेड़ी और करंजाली आदि गांवों के किसानों ने पत्रकार वार्ता में बताया कि देनबंद-रुड़की नई रेलवे लाइन बनाने के लिए उत्तराखंड की सीमा से सटे देवबंद के 13 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। उनके क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट 52 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि उन्हें मुआवजा 10.29 लाख रुपये प्रति बीघा दिया जा रहा है। जबकि सीमा से सटे उत्तराखंड के शीतलपुर गांव का सर्किल रेट 16 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि वहां मुआवजा 22.75 लाख रुपये प्रति बीघा दिया जा रहा है। किसान अरुण कुमार, हुकम सिंह, राजेंद्र, दुष्यंत शर्मा और राधे प्रधान ने बताया कि मुआवजा वितरण में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। जबकि उनकी जमीन का सर्किल रेट भी उत्तराखंड की जमीन से तीन गुणा अधिक है। उन्होंने शासन प्रशासन से शीतलपुर गांव के बराबर 22.75 लाख रुपये बीघा का मुआवजा दिलाने, परिवार के एक सदस्य को रेलवे में सरकारी नौकरी या फिर फ्रेट कॉरिडोर के हिसाब से 6.70 लाख रुपये का मुआवजा अनुदान दिलाने, एक गांव में दो अलग-अलग रेट को एक करके समान मुआवजा दिलाने, सड़क से 500 मीटर दूरी तक की जमीन का रेट दिलाने तथा खेतों में खड़े पेड़ों की कीमत पहले दिलाकर बाद में उस पर कब्जा लेने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरा नहीं हो जाती, वह अपनी जमीनों का अधिग्रहण नहीं होने देंगे। पत्रकार वार्ता में गजेंद्र, सत्येंद्र, नकलीराम, रकम सिंह, विनोद कुमार, ईश्वर चंद गौड़, सुशील प्रधान, सहेंद्र, सतेंद्र, देविंद्र, राकेश व कुलदीप आदि रहे।
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संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर कराएंगे समस्या का समाधान
भूमि अधिग्रहण मामले में उनसे कोई भी किसान आकर नहीं मिला। सर्किल रेट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जिस क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट जैसा है, उसी हिसाब से सरकार उनको मुआवजा दे रही है। फिर भी यदि किसान अपनी समस्या उनके समक्ष रखेंगे तो उनकी बात संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से वार्ता कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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-ब्रिजेश सिंह, विधायक देवबंद।