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नारी शक्ति की मिशाल जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:27 AM IST
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बेटियों के हाथ में खिलाड़ियों को तराशने की जिम्मेदारी
मुजफ्फरनगर। बेटियों और महिलाओं की सीमा अब घर-दहलीज तक ही सीमित नहीं है। जुनून और जज्बे के साथ नारी अब दूसरे के लिए भी प्रेरणा बन रही है। जिले का चौधरी चरण सिंह जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम नारी शक्ति की मिसाल है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूप बताए गए हैं, ऐसा ही स्टेडियम में देखने को मिल रहा है। यहां नारी अलग-अलग रूपों के साथ अनेक खेल की विद्या में खिलाड़ियों का हुनर तराश रहीं हैं।
चौधरी चरण सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक दो नहीं, बल्कि पांच मुख्य खेलों की कोचिंग महिला कोच के हाथ में है। स्टेडियम में क्रिकेट से लेकर कुश्ती तक महिला सिखा रही हैं। स्टेडियम में क्रिकेट के लिए मिताली राज भी है तो दूसरी ओर कुश्ती में साक्षी मलिक जैसा हुनर भी मौजूद है। चाहे पुरुष वर्ग हो या महिला वर्ग के दोनों खिलाड़ियों को खेलों के दांवपेंच सिखाने में महिलाएं मुख्य भूमिका निभा रही हैं। कुश्ती की कोचिंग सुनीता सिखातीं है। जबकि जूडो के दांवपेंच जिला उपक्रीड़ा अधिकारी पूनम बिश्नोई खिलाड़ियों को सिखा रही हैं। -
क्रिकेट के गुर सिखाती हैं प्रीति
मुजफ्फरनगर। स्टेडियम में क्रिकेट कोचिंग के लिए प्रीति मेहरा है। जो सुबह और शाम में छात्र-छात्राओं को क्रिकेट के गुर सिखाती हैं। बॉलरों को कलाई, पिच के हिसाब से गेंदबाजी का हुनर सिखाती हैं तो बल्लेबाज को गेंदबाज की फिरकी, गुगली आदि से बचने के गुर भी पैदा कर रही हैं। खिलाड़ियों को मैदान पर जमने और देश-टीम के लिए खेलने का जुनून भर रही हैं। स्टेडियम में वह करीब 30 से अधिक खिलाड़ियों को कोचिंग दे रही है।
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खिलाड़ियों को परिपक्व करने में जुटी
मुजफ्फरनगर। चौधरी चरणसिंह स्टेडियम में ताइक्वांडो में खिलाड़ियों का परिपक्व करने की कमान ममता सागर के कंधों पर है। स्टेडियम में करीब 25 से अधिक खिलाड़ी ताइक्वांडो के गुर सीख रहे हैं। ममता सागर महिला-पुरुष दोनों वर्ग के खिलाड़ियों को बखूबी कोचिंग दे रही है। कहतीं है कि ताइक्वांडो में आज देशभर में प्रचलित खेल बन गया है। लड़कियां में इसके प्रति अधिक रुचि बढ़ रही है।
वॉलीबाल में गुर सिखा रही अभिलाषा
मुजफ्फरनगर। कोच अभिलाषा यादव वॉलीबाल में लड़कियों को मैदान मारने की गुर विकसित कर रही हैं। लड़कियों को वह रोजाना दो घंटे सुबह और शाम में प्रैक्टिस कराती है। स्कूलों, कालेजों की दर्जनों लड़कियां वॉलीबाल में गुर सीख रही है। अभिलाषा कहतीं है कि हर क्षेत्र में लड़कियां आगे बढ़ रही हैं। खेलों में उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए अधिक प्रयास करने की जरूरत है।
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मुजफ्फरनगर। बेटियों और महिलाओं की सीमा अब घर-दहलीज तक ही सीमित नहीं है। जुनून और जज्बे के साथ नारी अब दूसरे के लिए भी प्रेरणा बन रही है। जिले का चौधरी चरण सिंह जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम नारी शक्ति की मिसाल है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूप बताए गए हैं, ऐसा ही स्टेडियम में देखने को मिल रहा है। यहां नारी अलग-अलग रूपों के साथ अनेक खेल की विद्या में खिलाड़ियों का हुनर तराश रहीं हैं।
चौधरी चरण सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक दो नहीं, बल्कि पांच मुख्य खेलों की कोचिंग महिला कोच के हाथ में है। स्टेडियम में क्रिकेट से लेकर कुश्ती तक महिला सिखा रही हैं। स्टेडियम में क्रिकेट के लिए मिताली राज भी है तो दूसरी ओर कुश्ती में साक्षी मलिक जैसा हुनर भी मौजूद है। चाहे पुरुष वर्ग हो या महिला वर्ग के दोनों खिलाड़ियों को खेलों के दांवपेंच सिखाने में महिलाएं मुख्य भूमिका निभा रही हैं। कुश्ती की कोचिंग सुनीता सिखातीं है। जबकि जूडो के दांवपेंच जिला उपक्रीड़ा अधिकारी पूनम बिश्नोई खिलाड़ियों को सिखा रही हैं। -
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क्रिकेट के गुर सिखाती हैं प्रीति
मुजफ्फरनगर। स्टेडियम में क्रिकेट कोचिंग के लिए प्रीति मेहरा है। जो सुबह और शाम में छात्र-छात्राओं को क्रिकेट के गुर सिखाती हैं। बॉलरों को कलाई, पिच के हिसाब से गेंदबाजी का हुनर सिखाती हैं तो बल्लेबाज को गेंदबाज की फिरकी, गुगली आदि से बचने के गुर भी पैदा कर रही हैं। खिलाड़ियों को मैदान पर जमने और देश-टीम के लिए खेलने का जुनून भर रही हैं। स्टेडियम में वह करीब 30 से अधिक खिलाड़ियों को कोचिंग दे रही है।
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खिलाड़ियों को परिपक्व करने में जुटी
मुजफ्फरनगर। चौधरी चरणसिंह स्टेडियम में ताइक्वांडो में खिलाड़ियों का परिपक्व करने की कमान ममता सागर के कंधों पर है। स्टेडियम में करीब 25 से अधिक खिलाड़ी ताइक्वांडो के गुर सीख रहे हैं। ममता सागर महिला-पुरुष दोनों वर्ग के खिलाड़ियों को बखूबी कोचिंग दे रही है। कहतीं है कि ताइक्वांडो में आज देशभर में प्रचलित खेल बन गया है। लड़कियां में इसके प्रति अधिक रुचि बढ़ रही है।
वॉलीबाल में गुर सिखा रही अभिलाषा
मुजफ्फरनगर। कोच अभिलाषा यादव वॉलीबाल में लड़कियों को मैदान मारने की गुर विकसित कर रही हैं। लड़कियों को वह रोजाना दो घंटे सुबह और शाम में प्रैक्टिस कराती है। स्कूलों, कालेजों की दर्जनों लड़कियां वॉलीबाल में गुर सीख रही है। अभिलाषा कहतीं है कि हर क्षेत्र में लड़कियां आगे बढ़ रही हैं। खेलों में उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए अधिक प्रयास करने की जरूरत है।