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उतम ब्रहमचर्य की प्रेरणा दी
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:08 AM IST
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उत्तम ब्रह्मचर्य की प्रेरणा दी
खतौली (मुजफ्फरनगर)। दस दिवसीय दशलक्षण महोत्सव के अंतर्गत भागीरथी जैन मंदिर में अजय के कुशल निर्देशन, आचार्य भारत भूषण की प्रेरण से कौण्डेश से कुंद कुंद नाटिका का मंचन स्थानीय कलाकारों के द्वारा किया गया। इसमें कोण्डेश नामक ग्वाले का भावपूर्ण समाधि भरण दिखाया गया। तत्पश्चात सेठ के यहां जन्म लेकर संतों के मार्गदर्शन में वैराग्य उत्पन्न होना, आचार्य कुंद कुंद बनकर समयसार ग्रंथ की रचना की अनूठी प्रस्तुति की गई।
पीसनोपाड़ा मंदिर में कौन बनेगा भाग्यपति कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति की गई। जैन मंडी मंदिर मेें जिनेंद्र प्रभु की आरती, ईश्वर भक्ति में भक्तों ने संगीत के साथ नृत्य, भजन प्रस्तुत किए। शांतिनाथ मंदिर में आचार्या ज्ञान सागर, विद्या सागर की विशेष पूजा कराई गई और अर्घ्य समर्पित किए गए। धर्मसभा में अंतसमती और आमर्षमती माता जी ने अपनी पीयूषवाणी में बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म सकल मनुष्य समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है।
ब्रह्मचर्य धारण कर ब्रह्म या प्रभु भक्ति में लीन रहो, गृहस्थों के लिए सपत्नी संतोष व्रत ही व्यवहार में ब्रह्मचर्य धर्म है। अजय किराना, राजेंद्र ककराला, शशांक सराफ, प्रेम किराना, विनोद ठेकेदार, सुभाष टीकरी, सुशील मंडी, सिद्धार्थ, दीपक, पप्पन, प्रवीण नयन, सुरेंद्र, टोनी, पवन, पोथी, इंद्र प्रवक्ता, नीरज प्रवक्ता, अजय प्रवक्ता, वैभव, सोनू, कुलदीप, ललिता, डॉ. ज्योति, डॉ. आशा जैन, मृदुला, मणि, अर्चना आदि मौजूद रहे।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। दस दिवसीय दशलक्षण महोत्सव के अंतर्गत भागीरथी जैन मंदिर में अजय के कुशल निर्देशन, आचार्य भारत भूषण की प्रेरण से कौण्डेश से कुंद कुंद नाटिका का मंचन स्थानीय कलाकारों के द्वारा किया गया। इसमें कोण्डेश नामक ग्वाले का भावपूर्ण समाधि भरण दिखाया गया। तत्पश्चात सेठ के यहां जन्म लेकर संतों के मार्गदर्शन में वैराग्य उत्पन्न होना, आचार्य कुंद कुंद बनकर समयसार ग्रंथ की रचना की अनूठी प्रस्तुति की गई।
पीसनोपाड़ा मंदिर में कौन बनेगा भाग्यपति कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति की गई। जैन मंडी मंदिर मेें जिनेंद्र प्रभु की आरती, ईश्वर भक्ति में भक्तों ने संगीत के साथ नृत्य, भजन प्रस्तुत किए। शांतिनाथ मंदिर में आचार्या ज्ञान सागर, विद्या सागर की विशेष पूजा कराई गई और अर्घ्य समर्पित किए गए। धर्मसभा में अंतसमती और आमर्षमती माता जी ने अपनी पीयूषवाणी में बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म सकल मनुष्य समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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ब्रह्मचर्य धारण कर ब्रह्म या प्रभु भक्ति में लीन रहो, गृहस्थों के लिए सपत्नी संतोष व्रत ही व्यवहार में ब्रह्मचर्य धर्म है। अजय किराना, राजेंद्र ककराला, शशांक सराफ, प्रेम किराना, विनोद ठेकेदार, सुभाष टीकरी, सुशील मंडी, सिद्धार्थ, दीपक, पप्पन, प्रवीण नयन, सुरेंद्र, टोनी, पवन, पोथी, इंद्र प्रवक्ता, नीरज प्रवक्ता, अजय प्रवक्ता, वैभव, सोनू, कुलदीप, ललिता, डॉ. ज्योति, डॉ. आशा जैन, मृदुला, मणि, अर्चना आदि मौजूद रहे।
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