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14 गांवों के 700 किसान करेंगे जीरो बजट खेती
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मुजफ्फरनगर। गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए उसके आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। गंगा में खाद व अन्य केमिकल न जाए, इसके लिए नजदीकी गांवों में प्राकृतिक खेती की जाएगी। फिलहाल 14 गांवों के किसानों को कलस्टर बनाकर जीरो बजट खेती की शुरुआत होगी। प्रत्येक गांव से 50-50 किसानों को शामिल किया गया है, जिन्हें 27 जनवरी से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भारत सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर ले जाना चाहती है। इसकी शुरुआत गंगा के नजदीकी गांवों से हो रही है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले रसायनिक खाद एवं कीटनाशकों का असर गंगा तक न पहुंचे इसलिए इन गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा के आसपास के 14 गांवों को जीरो बजट खेती के लिए चुना गया है। प्रत्येक गांव के 50-50 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। इन गांवों में 20-20 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। 27 जनवरी से प्रस्तावित गंगा यात्रा के दौरान इन किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण 31 जनवरी तक होगा। उप निदेशक कृषि जसवीर तेवतिया का कहना है कि क्लस्टर में शामिल किसानों को प्रशिक्षण के साथ ही अन्य तकनीकी सहायता और खेती के लिए सब्सिडी आदि की सुविधा भी दी जाएगी।
प्राकृतिक खेती के लिए चुने गए गांव
चुने गए गांवों में जानसठ और मोरना ब्लाक के गांव शामिल हैं। जानसठ ब्लॉक के समाना उर्फ रामराज, जलालपुर नीला, रहड़वा गैर ऐतमाली, हुसैनपुर, हंसावाला, उजियाली खुर्द ऐतमाली और स्याली शामिल हैं। मोरना ब्लॉक के कैडी, भूवापुर, इलाहाबास, शुक्रताल खादर, फिरोजपुर खाद, शुक्रतारी एवं मजलिसपुर तौफीर को चुना गया है।
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गंगा किनारे के 14 गांवों के 50-50 किसानों का क्लस्टर बनाया गया है। इन गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाना है। इसके लिए 27 से 31 जनवरी तक किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा - जसवीर तेवतिया, उप निदेशक कृषि।
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भारत सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर ले जाना चाहती है। इसकी शुरुआत गंगा के नजदीकी गांवों से हो रही है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले रसायनिक खाद एवं कीटनाशकों का असर गंगा तक न पहुंचे इसलिए इन गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा के आसपास के 14 गांवों को जीरो बजट खेती के लिए चुना गया है। प्रत्येक गांव के 50-50 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। इन गांवों में 20-20 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। 27 जनवरी से प्रस्तावित गंगा यात्रा के दौरान इन किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण 31 जनवरी तक होगा। उप निदेशक कृषि जसवीर तेवतिया का कहना है कि क्लस्टर में शामिल किसानों को प्रशिक्षण के साथ ही अन्य तकनीकी सहायता और खेती के लिए सब्सिडी आदि की सुविधा भी दी जाएगी।
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प्राकृतिक खेती के लिए चुने गए गांव
चुने गए गांवों में जानसठ और मोरना ब्लाक के गांव शामिल हैं। जानसठ ब्लॉक के समाना उर्फ रामराज, जलालपुर नीला, रहड़वा गैर ऐतमाली, हुसैनपुर, हंसावाला, उजियाली खुर्द ऐतमाली और स्याली शामिल हैं। मोरना ब्लॉक के कैडी, भूवापुर, इलाहाबास, शुक्रताल खादर, फिरोजपुर खाद, शुक्रतारी एवं मजलिसपुर तौफीर को चुना गया है।
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गंगा किनारे के 14 गांवों के 50-50 किसानों का क्लस्टर बनाया गया है। इन गांवों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाना है। इसके लिए 27 से 31 जनवरी तक किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा - जसवीर तेवतिया, उप निदेशक कृषि।