{"_id":"5cba16b0bdec22141f0101f3","slug":"61555699376-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगा पड़ रहा किसानों को ऋण सीमा पास कराना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महंगा पड़ रहा किसानों को ऋण सीमा पास कराना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चरथावल। सहकारी समितियों में किसानों को पांच साल बाद ऋण सीमा का नवीनीकरण कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में पहली बार नए सिरे से तमाम राजस्व अभिलखों को जमा करने के फरमान को किसान अन्याय बता रहे है। नई प्रक्रिया काफी जटिल और खर्चीली होने से किसानों को हजारों रुपये राजस्व विभाग खर्च करने पड़ रहे है।
ब्लाक चरथावल, बिरालसी, दूधली समेत तमाम समितियों में कृषक सदस्यों की ऋण सीमा हर पांच साल बाद नए सिरे से पास कराने का नियम है। मगर, इस बार किसानों से हिस्सा प्रमाण पत्र, खसरा खतौनी को दोबारा से जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है। इससे किसानों को लेखपालों के चक्कर काटने पड़ रहे है और हजारों रुपया खर्च करना पड़ रहा है। किसान असलम त्यागी, सुरेश पाल मुथरा, सुभाष कश्यप आदि ने बताया कि ऋण सीमा पास करवाने में लंबी प्रक्रिया में हजारों रुपया खर्च करना पड़ता है। दूधली सहकारी समिति के पूर्व सभापति उदय राज सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय को शिकायती पत्र देकर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले समितियां कृषक सदस्यों का संपत्ति रजिस्टर संबंधित गांवों के लेखपालों को देती थी। इसी आधार पर लेखपाल हिस्सा खोलते थे और समितियां ही लेखपाल को इस कार्य का भुगतान करती थी। मगर, इसको दरकिनार करते हुए नए नियमों में तमाम कागजात जमा कराने का जिम्मा किसानों पर थोप दिया गया है। इससे केसीसी ऋण सीमा पास कराने में पापड़ बेलने पड़ रहे है। इस संबंध में डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का हल कराने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
ब्लाक चरथावल, बिरालसी, दूधली समेत तमाम समितियों में कृषक सदस्यों की ऋण सीमा हर पांच साल बाद नए सिरे से पास कराने का नियम है। मगर, इस बार किसानों से हिस्सा प्रमाण पत्र, खसरा खतौनी को दोबारा से जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है। इससे किसानों को लेखपालों के चक्कर काटने पड़ रहे है और हजारों रुपया खर्च करना पड़ रहा है। किसान असलम त्यागी, सुरेश पाल मुथरा, सुभाष कश्यप आदि ने बताया कि ऋण सीमा पास करवाने में लंबी प्रक्रिया में हजारों रुपया खर्च करना पड़ता है। दूधली सहकारी समिति के पूर्व सभापति उदय राज सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय को शिकायती पत्र देकर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले समितियां कृषक सदस्यों का संपत्ति रजिस्टर संबंधित गांवों के लेखपालों को देती थी। इसी आधार पर लेखपाल हिस्सा खोलते थे और समितियां ही लेखपाल को इस कार्य का भुगतान करती थी। मगर, इसको दरकिनार करते हुए नए नियमों में तमाम कागजात जमा कराने का जिम्मा किसानों पर थोप दिया गया है। इससे केसीसी ऋण सीमा पास कराने में पापड़ बेलने पड़ रहे है। इस संबंध में डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का हल कराने का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन