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भक्ति गीतों के साथ कलश यात्रा निकाली
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:41 AM IST
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भक्ति गीतों के साथ कलश यात्रा निकाली
मुजफ्फरनगर। श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के शुभारंभ पर भक्ति गीतों के साथ महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। हनुमतधाम शुक्रताल के अध्यक्ष स्वामी केशवानंद जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा प्राणी मात्र को जीवन कल्याण की राह दिखाती है।
त्यागी कॉलोनी स्थित शिव मंदिर से गणेश पूजन के उपरांत मंगल कलश यात्रा निकाली गई। 108 महिलाओं ने मंगल कलश के साथ भक्तिगीत गाए। स्वामी केशवानंद जी महाराज ने कहा कि पापों से मुक्ति के लिए भागवत कथा का श्रवण करें। प्राणी मात्र का कल्याण भागवत में निहित है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने दीप प्रज्वलित किया। कथा व्यास पंडित सीताराम ने कहा कि कलियुग में आत्मा के उद्धार के लिए श्रीमद्भागवत कथा से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। उन्होंने श्रीशुकदेव के चरित्र प्रसंग में बताया कि गर्भकाल में ही शुकदेव जी ने कथा सीख ली थी। यज्ञमान जियालाल, रामकुमार गर्ग ने अतिथियों का सम्मान किया। मधुसूदन, अनुपम माहेश्वरी, रोशनलाल, धर्मसिंह, सीताराम वमाऱ, अनिल वर्मा, दुष्यंत त्यागी आदि मौजूद रहे। उधर, सनातन धर्म भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास छबीले छैल महाराज ने पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। पूतना वध, सकटासुर वध, बकासुर वध, अघासुर वध सहित अनेक राक्षसों का वध किया। श्रीकृष्ण ने जनता को राक्षसों से मुक्ति दिलाई। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीला में बताया कि जब यशोदा उनका मुंह खोलकर देखती है तो तीनों लोक देखकर आश्चर्य चकित हो जाती है।
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मुजफ्फरनगर। श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के शुभारंभ पर भक्ति गीतों के साथ महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। हनुमतधाम शुक्रताल के अध्यक्ष स्वामी केशवानंद जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा प्राणी मात्र को जीवन कल्याण की राह दिखाती है।
त्यागी कॉलोनी स्थित शिव मंदिर से गणेश पूजन के उपरांत मंगल कलश यात्रा निकाली गई। 108 महिलाओं ने मंगल कलश के साथ भक्तिगीत गाए। स्वामी केशवानंद जी महाराज ने कहा कि पापों से मुक्ति के लिए भागवत कथा का श्रवण करें। प्राणी मात्र का कल्याण भागवत में निहित है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने दीप प्रज्वलित किया। कथा व्यास पंडित सीताराम ने कहा कि कलियुग में आत्मा के उद्धार के लिए श्रीमद्भागवत कथा से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। उन्होंने श्रीशुकदेव के चरित्र प्रसंग में बताया कि गर्भकाल में ही शुकदेव जी ने कथा सीख ली थी। यज्ञमान जियालाल, रामकुमार गर्ग ने अतिथियों का सम्मान किया। मधुसूदन, अनुपम माहेश्वरी, रोशनलाल, धर्मसिंह, सीताराम वमाऱ, अनिल वर्मा, दुष्यंत त्यागी आदि मौजूद रहे। उधर, सनातन धर्म भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास छबीले छैल महाराज ने पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। पूतना वध, सकटासुर वध, बकासुर वध, अघासुर वध सहित अनेक राक्षसों का वध किया। श्रीकृष्ण ने जनता को राक्षसों से मुक्ति दिलाई। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीला में बताया कि जब यशोदा उनका मुंह खोलकर देखती है तो तीनों लोक देखकर आश्चर्य चकित हो जाती है।
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