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अनुभव के जाल में फंसे 60 होलसेल ड्रग लाइसेंस, नए नियमों के तहत डीआई ने रोकी फाइल
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 31 Oct 2017 12:15 AM IST
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प्रदेश सरकार के सख्त होते ही ड्रग लाइसेंस प्रक्रिया जटिल हो गई है। नए नियमों के तहत जनपद में होलसेल के साथ रिटेलर स्तर से लाइसेंस फंस गए हैं। अनुभव के जाल में जिले में 60 होलसेल के लाइसेंस रुक गए हैं। डीआई ने इनकी प्रक्रिया अधूरी होने के कारण रोक लगा दी है। सभी आवेदकों को नोटिस भेजकर प्रमाण-पत्रों के साथ अनुभव लेटर मांगा गया है।
अब तक होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए मेडिकल स्टोर की बाध्यता रहती थी। प्रदेश सरकार ने इस बाध्यता को समाप्त कर दिया है। अगस्त में बदले गए नियमों में अब थोक औषधि लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल हो गई है। बिना अनुभव प्रमाण-पत्र दिखाए आवेदक को लाइसेंस जारी नहीं हो सकता है। इसको लेकर औषधि प्रशासन कार्यालय में होलसेल में दवा विक्रय करने के लिए ढेरों आवेदन किए गए हैं, जिनमें करीब 60 फाइलें नए नियम के मुताबिक कार्य नहीं कर पाने पर रोक दी गई है।
इन आवेदकों के पास अनुभव प्रमाण-पत्र नहीं है। औषधि प्रशासन ने लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। बिना अनुभव प्रमाण-पत्र लगाए लाइसेंस जारी नहीं होगा। डीआई जगबीर सिंह ने बताया कि बिना अनुभव प्रमाण-पत्र के होलसेल में लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। होलसेल में आवेदक का अनुभव लेटर नहीं है तो फार्मेसिस्ट के डॉक्यूमेंट लगाने होंगे। उसके आधार पर ही लाइसेंस जारी हो सकता है।
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फर्जीवाड़े की होगी गोपनीय जांच
मुजफ्फरनगर। आवेदनकर्ता ने जो अनुभव लेटर लगाया है, औषधि प्रशासन उस फर्म की जांच के साथ लेटर की भी गोपनीय जांच करेगा। प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्र के व्यक्ति का फर्म में कार्य, कैश बुक में नाम, सैलरी स्लिप आदि देखने के साथ दवाओं के ज्ञान को भी परखेगा। इसमें विफल मिलने पर तत्काल लाइसेंस को निरस्त किया जाएगा। जांच-पड़ताल प्रक्रिया से डीआई को अलग रखा गया है। गोपनीय जांच वरिष्ठ अधिकारी एवं मजिस्ट्रेट स्तर से होगी।
फार्मासिस्टों के लगते हैं दाम
मुजफ्फरनगर। लाइसेंस लेने के लिए होलसेल में 160 स्क्वायर फीट में दुकान होने के साथ आवेदक के लिए कम से कम डी-फार्मा होना लाजिमी है। यदि डी-फार्म नहीं है तो फार्मेसिस्ट देना होगा, जो हर वक्त मेडिकल पर होगा। फार्मेसिस्ट लगाने के नाम पर जिले में खेल हो रहा है। एक फार्मासिस्ट कई-कई मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में दर्ज है, जिसके लिए फार्मासिस्ट सालाना एक मेडिकल स्टोर से हजारों रुपये की वसूली कर रहे हैं।
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अब तक होलसेल ड्रग लाइसेंस के लिए मेडिकल स्टोर की बाध्यता रहती थी। प्रदेश सरकार ने इस बाध्यता को समाप्त कर दिया है। अगस्त में बदले गए नियमों में अब थोक औषधि लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल हो गई है। बिना अनुभव प्रमाण-पत्र दिखाए आवेदक को लाइसेंस जारी नहीं हो सकता है। इसको लेकर औषधि प्रशासन कार्यालय में होलसेल में दवा विक्रय करने के लिए ढेरों आवेदन किए गए हैं, जिनमें करीब 60 फाइलें नए नियम के मुताबिक कार्य नहीं कर पाने पर रोक दी गई है।
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इन आवेदकों के पास अनुभव प्रमाण-पत्र नहीं है। औषधि प्रशासन ने लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। बिना अनुभव प्रमाण-पत्र लगाए लाइसेंस जारी नहीं होगा। डीआई जगबीर सिंह ने बताया कि बिना अनुभव प्रमाण-पत्र के होलसेल में लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। होलसेल में आवेदक का अनुभव लेटर नहीं है तो फार्मेसिस्ट के डॉक्यूमेंट लगाने होंगे। उसके आधार पर ही लाइसेंस जारी हो सकता है।
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फर्जीवाड़े की होगी गोपनीय जांच
मुजफ्फरनगर। आवेदनकर्ता ने जो अनुभव लेटर लगाया है, औषधि प्रशासन उस फर्म की जांच के साथ लेटर की भी गोपनीय जांच करेगा। प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्र के व्यक्ति का फर्म में कार्य, कैश बुक में नाम, सैलरी स्लिप आदि देखने के साथ दवाओं के ज्ञान को भी परखेगा। इसमें विफल मिलने पर तत्काल लाइसेंस को निरस्त किया जाएगा। जांच-पड़ताल प्रक्रिया से डीआई को अलग रखा गया है। गोपनीय जांच वरिष्ठ अधिकारी एवं मजिस्ट्रेट स्तर से होगी।
फार्मासिस्टों के लगते हैं दाम
मुजफ्फरनगर। लाइसेंस लेने के लिए होलसेल में 160 स्क्वायर फीट में दुकान होने के साथ आवेदक के लिए कम से कम डी-फार्मा होना लाजिमी है। यदि डी-फार्म नहीं है तो फार्मेसिस्ट देना होगा, जो हर वक्त मेडिकल पर होगा। फार्मेसिस्ट लगाने के नाम पर जिले में खेल हो रहा है। एक फार्मासिस्ट कई-कई मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में दर्ज है, जिसके लिए फार्मासिस्ट सालाना एक मेडिकल स्टोर से हजारों रुपये की वसूली कर रहे हैं।