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जॉर्डन और बहरीन के प्रोफेसरों ने किया दारुल उलूम का दौरा
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मोहतमिम और नायब मोहतमिम से की मुलाकात कर संस्था के इतिहास की जानकारी ली
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। देवबंद पहुंचे जॉर्डन और बहरीन के प्रोफेसरों ने इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की और यहां दी जानी वाली व व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की।
बृहस्पतिवार की शाम करीब 3.30 बजे दारुल उलूम पहुंचे मदरसा जामिया अजहर जॉर्डन के प्रोफेसर डॉक्टर यासिर इमाम मोहम्मद और बहरीन के खालिदुर रहमान ने संस्था के मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। जहां मोहतमिम ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इस दौरान मोहतमिम ने विदेशी प्रोफेसरों को देवबंदी उलमा की कुर्बानियों, संस्था की स्थापना के उद्देश्य और जंग-ए-आजादी में दारुल उलूम और उलमा के किरदार की विस्तार से जानकारी दी। मोहतमिम ने संस्था में तालीम हासिल करने वाले छात्रों और उनके रहन सहन के बारे में भी उन्हें बताया। इसके उपरांत वह नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी से भी मिले और यहां से संस्था में स्थित लाइब्रेरी में पहुंचे। जहां उन्होंने ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा और उनके बारे में जानकारी हासिल की। पुस्तकों के जखीरे के रखरखाव को लेकर उन्होंने प्रबंधतंत्र की तारीफ की। दोनों प्रोफेसर निर्माणाधीन लाइब्रेरी में गए और एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया को भी देखा। इस दौरान डा. यासिर इमाम मोहम्मद ने कहा कि दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा यह उससे कहीं ज्यादा है। दारुल उलूम पूरी दुनिया में दीन की रोशनी फैला रहा है। इस दौरान मौलाना मुकीमुद्दीन आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। देवबंद पहुंचे जॉर्डन और बहरीन के प्रोफेसरों ने इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की और यहां दी जानी वाली व व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की।
बृहस्पतिवार की शाम करीब 3.30 बजे दारुल उलूम पहुंचे मदरसा जामिया अजहर जॉर्डन के प्रोफेसर डॉक्टर यासिर इमाम मोहम्मद और बहरीन के खालिदुर रहमान ने संस्था के मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। जहां मोहतमिम ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इस दौरान मोहतमिम ने विदेशी प्रोफेसरों को देवबंदी उलमा की कुर्बानियों, संस्था की स्थापना के उद्देश्य और जंग-ए-आजादी में दारुल उलूम और उलमा के किरदार की विस्तार से जानकारी दी। मोहतमिम ने संस्था में तालीम हासिल करने वाले छात्रों और उनके रहन सहन के बारे में भी उन्हें बताया। इसके उपरांत वह नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी से भी मिले और यहां से संस्था में स्थित लाइब्रेरी में पहुंचे। जहां उन्होंने ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा और उनके बारे में जानकारी हासिल की। पुस्तकों के जखीरे के रखरखाव को लेकर उन्होंने प्रबंधतंत्र की तारीफ की। दोनों प्रोफेसर निर्माणाधीन लाइब्रेरी में गए और एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया को भी देखा। इस दौरान डा. यासिर इमाम मोहम्मद ने कहा कि दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा यह उससे कहीं ज्यादा है। दारुल उलूम पूरी दुनिया में दीन की रोशनी फैला रहा है। इस दौरान मौलाना मुकीमुद्दीन आदि मौजूद रहे।
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