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मोक्ष की सीढिय़ां है भागवत कथा-गौरव कृष्ण महाराज
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:01 AM IST
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित पंजाबी बारातघर में दि भागवत मिशन फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ में आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी महाराज ने मधुर संगीतमयी वाणी के द्वारा भागवत रसपान कराया।
गौरव कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि परम संतों का परम ग्रंथ भागवत कृष्ण रुप है। महात्मन होने का अर्थ है, हम उनको जान सकें। श्रीकृष्ण भगवान के सान्निध्य का लाभ पांडवों को मिला। जबकि गौरव भगवान को एक साधारण मनुष्य समझते रहे। श्रीकृष्ण महिमा का ज्ञान हमें लाभ प्राप्त कराता है। भगवान की कृपा प्राप्त करनी हो, तो उनकी महिमा को समझे जाने बगैर प्यार नहीं होता है। कथा हमें भगवान का परोक्ष दर्शन कराती है। कथा श्रवण से विश्वास जाग्रत होता है। भाव से प्रीत बढ़ती है। प्रेम जिस दिन सत्य हो जाता है, तो भगवान साक्षात दर्शन कराते हैं। कथा मोक्ष की सीढ़ियां हैं। कथा हमें प्रभु के योग्य बनाती है। भगवान को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है। उत्पत्ति, प्रलय, पालन सब कुछ प्रभु के हाथ में हैं। हमें कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। भक्त के हृदय में अभिमान आने की खबर भगवान को मिल जाती है। साधारण जीवन को साधक बनाकर कथा सिद्धि दिलाती है। व्यवस्थापक के रुप में मनोहर लाल शर्मा दंडी आश्रम मुख्य रुप से रहे। सोमवार को कपिल भगवान चरित्र, कपिल गीता एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन किया जाएगा।
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गौरव कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि परम संतों का परम ग्रंथ भागवत कृष्ण रुप है। महात्मन होने का अर्थ है, हम उनको जान सकें। श्रीकृष्ण भगवान के सान्निध्य का लाभ पांडवों को मिला। जबकि गौरव भगवान को एक साधारण मनुष्य समझते रहे। श्रीकृष्ण महिमा का ज्ञान हमें लाभ प्राप्त कराता है। भगवान की कृपा प्राप्त करनी हो, तो उनकी महिमा को समझे जाने बगैर प्यार नहीं होता है। कथा हमें भगवान का परोक्ष दर्शन कराती है। कथा श्रवण से विश्वास जाग्रत होता है। भाव से प्रीत बढ़ती है। प्रेम जिस दिन सत्य हो जाता है, तो भगवान साक्षात दर्शन कराते हैं। कथा मोक्ष की सीढ़ियां हैं। कथा हमें प्रभु के योग्य बनाती है। भगवान को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है। उत्पत्ति, प्रलय, पालन सब कुछ प्रभु के हाथ में हैं। हमें कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। भक्त के हृदय में अभिमान आने की खबर भगवान को मिल जाती है। साधारण जीवन को साधक बनाकर कथा सिद्धि दिलाती है। व्यवस्थापक के रुप में मनोहर लाल शर्मा दंडी आश्रम मुख्य रुप से रहे। सोमवार को कपिल भगवान चरित्र, कपिल गीता एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन किया जाएगा।
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