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पुलिस मॉडर्न स्कूल में पढ़ेंगे महिला संवासनियों के बच्चे
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:20 AM IST
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चार बच्चों का हुआ एडमिशन, पहले दिन स्कूल गए मासूम
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में बंद महिला सन्वांसनियों के बच्चे पुलिस मॉडर्न पब्लिक स्कूल में पढ़ेंगे। जेल अधीक्षक ने सराहनीय कार्य करते हुए महिला बंदियों के चार मासूम बच्चों का एडमिशन कराया। सोमवार को पहले दिन चारों बच्चे स्कूल ड्रेस से स्कूल के लिए गए तो उसके चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। अमर उजाला ने इन बच्चों की पढ़ाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इस पर जेल प्रशासन सक्रिय हुआ और समाजसेवी लोग भी बच्चों की पढ़ाई के लिए आगे आए।
जिला कारागार में इन दिनों 68 महिलाएं किसी न किसी अपराध के मामले में बंद हैं। इनमें 15 महिला कैदी और 53 विचाराधीन बंदी है। इनमें से कुछ महिलाओं के बच्चे भी उनके साथ जेल में रह रहे हैं। इन छोटे बच्चों को भी बिना किसी कसूर के जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ रहा है, जो समाज की मुख्यधारा से भी दूर हो चुके हैं। अमर उजाला ने 26 मई के अंक में इन बच्चों के भविष्य को लेकर प्रमुखता से आवाज उठाई थी। वर्तमान में महिला बंदियों के 13 बच्चे अपने मां के साथ जेल में रह रहे हैं, जिनमें 9 बालक और 4 बालिकाएं शामिल है। इन बच्चों से चार बच्चे स्कूल जाने की उम्र के है। इन बच्चों की पढ़ाई के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने पर जेल प्रशासन इसके पढ़ाई के लिए सक्रिय हुआ। साथ ही कुछ सामाजिक संगठन और समाज सेवक भी सामने आए। जेल अधीक्षक एके सक्सेना काफी दिनों से इन बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रयासरत थे। एसएसपी अनंत देव से मिल कर इस बारे में जानकारी दी। इस पर एसएसपी ने भी पहल करते हुए चार बच्चों का एडमिशन पुलिस मॉर्डन पब्लिक स्कूल में कराया। आर्ट ऑफ लिविंग की जिला संयोजक सोनिया लूथरा ने बच्चों के लिए ड्रेस और पाठय सामग्री उपलब्ध कराई। सोमवार को पहले दिन स्कूल ड्रेस में मय बस्ते के स्कूल भेजा गया। बैरक की सलाखों से निकलकर स्कूल जा रहे इन चारों बच्चों अनस, शिवलाल, तुलसी और महक के चेहरे की खुशियां देखने लायक थीं। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि चारों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च नगर के समाजसेवियों से सहयोग से वहन किया जाएगा। उधर, जेल अधीक्षक के इस प्रयास की सभी ने तारीफ की है।
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मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में बंद महिला सन्वांसनियों के बच्चे पुलिस मॉडर्न पब्लिक स्कूल में पढ़ेंगे। जेल अधीक्षक ने सराहनीय कार्य करते हुए महिला बंदियों के चार मासूम बच्चों का एडमिशन कराया। सोमवार को पहले दिन चारों बच्चे स्कूल ड्रेस से स्कूल के लिए गए तो उसके चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। अमर उजाला ने इन बच्चों की पढ़ाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इस पर जेल प्रशासन सक्रिय हुआ और समाजसेवी लोग भी बच्चों की पढ़ाई के लिए आगे आए।
जिला कारागार में इन दिनों 68 महिलाएं किसी न किसी अपराध के मामले में बंद हैं। इनमें 15 महिला कैदी और 53 विचाराधीन बंदी है। इनमें से कुछ महिलाओं के बच्चे भी उनके साथ जेल में रह रहे हैं। इन छोटे बच्चों को भी बिना किसी कसूर के जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ रहा है, जो समाज की मुख्यधारा से भी दूर हो चुके हैं। अमर उजाला ने 26 मई के अंक में इन बच्चों के भविष्य को लेकर प्रमुखता से आवाज उठाई थी। वर्तमान में महिला बंदियों के 13 बच्चे अपने मां के साथ जेल में रह रहे हैं, जिनमें 9 बालक और 4 बालिकाएं शामिल है। इन बच्चों से चार बच्चे स्कूल जाने की उम्र के है। इन बच्चों की पढ़ाई के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने पर जेल प्रशासन इसके पढ़ाई के लिए सक्रिय हुआ। साथ ही कुछ सामाजिक संगठन और समाज सेवक भी सामने आए। जेल अधीक्षक एके सक्सेना काफी दिनों से इन बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रयासरत थे। एसएसपी अनंत देव से मिल कर इस बारे में जानकारी दी। इस पर एसएसपी ने भी पहल करते हुए चार बच्चों का एडमिशन पुलिस मॉर्डन पब्लिक स्कूल में कराया। आर्ट ऑफ लिविंग की जिला संयोजक सोनिया लूथरा ने बच्चों के लिए ड्रेस और पाठय सामग्री उपलब्ध कराई। सोमवार को पहले दिन स्कूल ड्रेस में मय बस्ते के स्कूल भेजा गया। बैरक की सलाखों से निकलकर स्कूल जा रहे इन चारों बच्चों अनस, शिवलाल, तुलसी और महक के चेहरे की खुशियां देखने लायक थीं। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि चारों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च नगर के समाजसेवियों से सहयोग से वहन किया जाएगा। उधर, जेल अधीक्षक के इस प्रयास की सभी ने तारीफ की है।
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