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50 फीसदी कापियों का भी मूल्यांकन नहीं
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:24 AM IST
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50 फीसदी कापियों का भी मूल्यांकन नहीं
मुजफ्फरनगर।
यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार छात्र-छात्राओं पर सीसीटीवी कैमरे का असर पड़ा है। मूल्यांकन में जो तथ्य निकले हैं, उससे साफ हो गया है। अधिकांश पेपर में विद्यार्थियों की मेहनत कमजोर निकली है। जिसके चलते कम नंबर आ रहे हैं। वहीं, जिले में मूल्यांकन का कार्य एक सप्ताह में 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 17 मार्च से प्रारंभ हो गया है। एक सप्ताह बीतने को है, लेकिन परीक्षकों का टोटा दूर नहीं हो सका है। समाज शास्त्र, हिंदी, गृह विज्ञान के अलावा इंग्लिश वर्ग में भी परीक्षक पर्याप्त नहीं है। इसके चलते कापियों को बोझ बढ़ गया है। शहर में जीआईसी और डीएवी इंटर कालेज में इंटरमीडिएट और इस्लामियां, ग्रेन चेंबर इंटर कालेज में हाईस्कूल की कापियों का मूल्यांकन चल रहा है। मूल्यांकन में छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं में साफ है कि इस बार अंक बेहतर नहीं है। कैमरों का खौफ छात्रों की उत्तर पर दिख रहा है। छात्रों ने अनेक सवालों के जवाब पाठ्यक्रम से अलग लिखे हैं। जिसके चलते रिजल्ट प्रतिशत इस बार गड़बड़ाएगा। जिले में एक सप्ताह में 50 फीसदी मूल्यांकन भी पूरा नहीं हो सका है। मूल्यांकन प्रभारी रमेशचंद शर्मा ने बताया कि कुछ विषयों में परीक्षकों की कमी बनी है। इसके चलते मूल्यांकन कार्य प्रभावित हो रहा है।
समान काम तो समान वेतन की मांग
मुजफ्फरनगर। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बताया कि तत्कालीन सरकार ने उन्हें वेतन दिया था, जिसे वर्तमान में बंद कर दिया गया। इससे शिक्षकों के आगे भूखे मरने की नौबत आ गई है। शिक्षकों ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने की मांग की है। आक्रोशित शिक्षकों ने आठवें दिन भी मूल्यांकन का बहिष्कार जारी रखा। डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा गया है। इस दौरान संगठन जिलाध्यक्ष स्नेहलता मिश्रा, जिला मंत्री मासूम अली त्यागी, देवेंद्र कुमार, राजकुमार शर्मा, विजय लक्ष्मी, मंजू मलिक, रविंद्र कुमार, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर।
यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार छात्र-छात्राओं पर सीसीटीवी कैमरे का असर पड़ा है। मूल्यांकन में जो तथ्य निकले हैं, उससे साफ हो गया है। अधिकांश पेपर में विद्यार्थियों की मेहनत कमजोर निकली है। जिसके चलते कम नंबर आ रहे हैं। वहीं, जिले में मूल्यांकन का कार्य एक सप्ताह में 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 17 मार्च से प्रारंभ हो गया है। एक सप्ताह बीतने को है, लेकिन परीक्षकों का टोटा दूर नहीं हो सका है। समाज शास्त्र, हिंदी, गृह विज्ञान के अलावा इंग्लिश वर्ग में भी परीक्षक पर्याप्त नहीं है। इसके चलते कापियों को बोझ बढ़ गया है। शहर में जीआईसी और डीएवी इंटर कालेज में इंटरमीडिएट और इस्लामियां, ग्रेन चेंबर इंटर कालेज में हाईस्कूल की कापियों का मूल्यांकन चल रहा है। मूल्यांकन में छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं में साफ है कि इस बार अंक बेहतर नहीं है। कैमरों का खौफ छात्रों की उत्तर पर दिख रहा है। छात्रों ने अनेक सवालों के जवाब पाठ्यक्रम से अलग लिखे हैं। जिसके चलते रिजल्ट प्रतिशत इस बार गड़बड़ाएगा। जिले में एक सप्ताह में 50 फीसदी मूल्यांकन भी पूरा नहीं हो सका है। मूल्यांकन प्रभारी रमेशचंद शर्मा ने बताया कि कुछ विषयों में परीक्षकों की कमी बनी है। इसके चलते मूल्यांकन कार्य प्रभावित हो रहा है।
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समान काम तो समान वेतन की मांग
मुजफ्फरनगर। माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बताया कि तत्कालीन सरकार ने उन्हें वेतन दिया था, जिसे वर्तमान में बंद कर दिया गया। इससे शिक्षकों के आगे भूखे मरने की नौबत आ गई है। शिक्षकों ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने की मांग की है। आक्रोशित शिक्षकों ने आठवें दिन भी मूल्यांकन का बहिष्कार जारी रखा। डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा गया है। इस दौरान संगठन जिलाध्यक्ष स्नेहलता मिश्रा, जिला मंत्री मासूम अली त्यागी, देवेंद्र कुमार, राजकुमार शर्मा, विजय लक्ष्मी, मंजू मलिक, रविंद्र कुमार, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
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