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शिवचौक, जिला अस्पताल पर कानफोडू शोर

Sat, 19 Aug 2017 12:16 AM IST
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:16 AM IST
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शिवचौक, जिला अस्पताल पर कानफोडू शोर
शिवचौक, जिला अस्पताल पर कानफोडू शोर
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मुजफ्फरनगर। शहर में शांत इलाके भी शोरशराबे का शिकार हैं। इन क्षेत्रों में क्षमता से अधिक डेसिबल ध्वनि प्रदूषण मिला है। प्रदूषण विभाग के रिकार्ड में शिवचौक, शामली बस स्टैंड, सदर बाजार और जिला अस्पताल के निकट सबसे अधिक शोर दर्ज हुआ है। दो कॉलोनियों में भी ध्वनि प्रदूषण की मात्रा अधिक पाई गई है।
क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग ने जुलाई माह में ध्वनि प्रदूषण का रिकार्ड दर्ज किया है। शहर में मानक क्षमता से अधिक शोर-शराबा बढ़ रहा है। चौक-चौराहों के साथ शांत और सेंसेटिव क्षेत्रों में शोर-शराबा अधिक नोटिस किया जा रहा है। बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों पर ध्वनि प्रदूषण की निर्धारित क्षमता से कई प्रतिशत बढ़ गया है। जिनमें शामली बस स्टैंड और शिवचौक के साथ सदर, अस्पताल क्षेत्र रिक्स कैटेगिरी में पहुंच गया है। यहां दिन और रात के शोर शराबे में मामूली डेसिबल का अंतर है।
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शांत रहने वाली गांधी और दक्षिणी सिविल लाइन कॉलोनी में भी ध्वनि प्रदूषण की मात्रा अधिक पाई गई है। चौराहों पर वाहनों में लगे तेज आवाज के हॉर्न, ओवरलोड वाहनों की शोर और निर्बाध चलने वाली सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण शहरवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। उधर, वायु प्रदूषण मापने के लिए विभाग को मशीन मिल गई है। जिनको स्थापित करने के लिए जगह की तलाश की जा रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी विवेक राय ने बताया कि शहर के कुछ प्वाइंट पर नोइस पॉल्युशन रिकार्ड किया गया है। गंभीर स्थानों पर भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है। यह घातक होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।
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बढ़ता ध्वनि प्रदूषण इसलिए घातक
मुजफ्फरनगर। मनुष्य की श्रवण (सुनने) क्षमता 80 डेसिबल होती है। इससे ज्यादा की आवाज स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती है। ध्वनि की तीव्रता 80 डेसिबल से अधिक होने पर मनुष्य बीमार होने लगता है और उसे तकलीफ महसूस होने लगती है। यदि तीव्रता 130-140 डेसिबल होने पर यह बहरेपन की बीमारियों को भी पैदा कर सकती है। साथ ही सिरदर्द, थकान, अनिद्रा, श्रवण क्षमता में कमजोरी, चिड़चिड़ापन, उत्तेजना, आक्रोश आदि बीमारियां हो सकती हैं।
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