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कपड़ा व्यापारियों को मंजूर नहीं जीएसटी
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:11 AM IST
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कपड़ा व्यापारियों को मंजूर नहीं जीएसटी
मुजफ्फरनगर। कपड़े पर लागू जीएसटी का व्यापारियों में विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कपड़ा व्यापारियों ने माइग्रेशन कराने के साथ फिलहाल पंजीकरण कराने से भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे वाणिज्य कर विभाग भी हैरान है। व्यापारियों को समझाने की कोशिशें नाकाम हो गई हैं। उधर, कपड़ा व्यापार संघ ने बैठक कर जीएसटी पर विरोध की रणनीति बनाई।
जिले में बड़े पैमाने पर कपड़ा कारोबार होता है। जिनमें रेडिमेट के साथ थोक, रिटेलर में कपड़े का कारोबार है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कपड़ा कारोबार को भी जीएसटी में शामिल किया है। कपड़े पर जीएसटी की दरें लगाई गई हैं। इससे व्यापारियों में आक्रोश उभर आया। जीएसटी का लगातार विरोध किया जा रहा है। जिले में कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी को मंजूर नहीं किया है। जीएसटी में माइग्रेशन कराने में भी कपड़ा व्यापारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसको लेकर वाणिज्यकर विभाग भी परेशान है। शुक्रवार को कपड़ा व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने बैठक कर जीएसटी के खिलाफ रणनीति बनाई। कहा कि कपड़ा जनता की बुनियादी जरूरत है, इस पर जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए। कपड़े को जीएसटी में शामिल किया है, जबकि शराब आदि को इससे बाहर रखा हुआ है।
व्यापारियों ने कपड़े से जीएसटी हटाए जाने की मांग की है। इसके बाद विधायक कपिलदेव अग्रवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान राकेश कंसल, अनिल नामदेव, अजय मदान, अजय सिंघल, चुन्नीलाल सुनेजा, अशोक छाबड़ा, योगेश सिंघल, कन्हैया लाल, विजय तागरा, अनिल गर्ग, राजकुमार कालरा, भूषण जैन, मनोहर लाल, सुशील छाबड़ा, रमेश खुराना, केशव, विजय छाबड़ा, मनीष बत्रा आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। कपड़े पर लागू जीएसटी का व्यापारियों में विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। कपड़ा व्यापारियों ने माइग्रेशन कराने के साथ फिलहाल पंजीकरण कराने से भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे वाणिज्य कर विभाग भी हैरान है। व्यापारियों को समझाने की कोशिशें नाकाम हो गई हैं। उधर, कपड़ा व्यापार संघ ने बैठक कर जीएसटी पर विरोध की रणनीति बनाई।
जिले में बड़े पैमाने पर कपड़ा कारोबार होता है। जिनमें रेडिमेट के साथ थोक, रिटेलर में कपड़े का कारोबार है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कपड़ा कारोबार को भी जीएसटी में शामिल किया है। कपड़े पर जीएसटी की दरें लगाई गई हैं। इससे व्यापारियों में आक्रोश उभर आया। जीएसटी का लगातार विरोध किया जा रहा है। जिले में कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी को मंजूर नहीं किया है। जीएसटी में माइग्रेशन कराने में भी कपड़ा व्यापारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसको लेकर वाणिज्यकर विभाग भी परेशान है। शुक्रवार को कपड़ा व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने बैठक कर जीएसटी के खिलाफ रणनीति बनाई। कहा कि कपड़ा जनता की बुनियादी जरूरत है, इस पर जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए। कपड़े को जीएसटी में शामिल किया है, जबकि शराब आदि को इससे बाहर रखा हुआ है।
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व्यापारियों ने कपड़े से जीएसटी हटाए जाने की मांग की है। इसके बाद विधायक कपिलदेव अग्रवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान राकेश कंसल, अनिल नामदेव, अजय मदान, अजय सिंघल, चुन्नीलाल सुनेजा, अशोक छाबड़ा, योगेश सिंघल, कन्हैया लाल, विजय तागरा, अनिल गर्ग, राजकुमार कालरा, भूषण जैन, मनोहर लाल, सुशील छाबड़ा, रमेश खुराना, केशव, विजय छाबड़ा, मनीष बत्रा आदि मौजूद रहे।
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