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मधुबनी कला के बाल कलाकारों को सिखाए गुर
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:08 AM IST
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मधुबनी कला के बाल कलाकारों को सिखाए गुर
मुजफ्फरनगर। ललित कला एकेडमी के तत्वाधान में चल रहे ग्रीष्मकालीन कला शिविर में मधुबनी कला का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक ने कला की बारीकियों और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जितनी सुंदर होती है, उससे अधिक बनाने में आसान है।
मधुबनी कला की दक्ष कलाकार मोहिनी धीमान ने कहा कि मधुबनी बिहार की प्रख्यात लोक कला है। इसकी देश ही नहीं, विदेशों में भी डिमांड है। मधुबनी कला की आकृतियां आसानी से बनाई जा सकती हैं। इस कला में सीधे-सरल रूपों का प्रयोग होता है। इसके बाद मोर, मछली, फूल-पत्तियों से कला को पूरा करके दिखाया। ब्रुश स्टॉक की यह खास विधि है। जिसमें रंग की विभिन्न ताने एवं साथ बनानी होती हैं। इस विधि से तोलिए, मेजपोश और चादरों पर बेहतर डिजाइन बनाया जा सकता है। प्रशिक्षक ने कला की बारीकियों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। इसके बाद कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने आनंद लिया। कार्यक्रम में सीमा वर्मा, शिखा, तमसा, धर्मेंद्र, आर्यन, प्रिया सैनी, साक्षी चंदोल, अनमोल आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। ललित कला एकेडमी के तत्वाधान में चल रहे ग्रीष्मकालीन कला शिविर में मधुबनी कला का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक ने कला की बारीकियों और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जितनी सुंदर होती है, उससे अधिक बनाने में आसान है।
मधुबनी कला की दक्ष कलाकार मोहिनी धीमान ने कहा कि मधुबनी बिहार की प्रख्यात लोक कला है। इसकी देश ही नहीं, विदेशों में भी डिमांड है। मधुबनी कला की आकृतियां आसानी से बनाई जा सकती हैं। इस कला में सीधे-सरल रूपों का प्रयोग होता है। इसके बाद मोर, मछली, फूल-पत्तियों से कला को पूरा करके दिखाया। ब्रुश स्टॉक की यह खास विधि है। जिसमें रंग की विभिन्न ताने एवं साथ बनानी होती हैं। इस विधि से तोलिए, मेजपोश और चादरों पर बेहतर डिजाइन बनाया जा सकता है। प्रशिक्षक ने कला की बारीकियों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। इसके बाद कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने आनंद लिया। कार्यक्रम में सीमा वर्मा, शिखा, तमसा, धर्मेंद्र, आर्यन, प्रिया सैनी, साक्षी चंदोल, अनमोल आदि मौजूद रहे।
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