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सीने से बेटे की वर्दी को लगाकर फूट-फूटकर रोया पिता
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आंखों में आंसू लिए बेटे के बंद कमरे को देखते रहा अशोक कुमार
देवबंद (सहारनपुर)। जवान बेटे की अर्थी को कंधा देकर पूरी तरह टूट चुका दरोगा कुलदीप कुमार का पिता अशोक कुमार रविवार को देवबंद में बेटे के कमरे पर पहुंचा तो अपने आपको संभाल नहीं पाया और बाहर लटकी बेटे की वर्दी को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोने लगा। जिसे वहां मौजूद लोगों ने मुश्किल से उन्हें संभाला।
आंखों में आंसू, लड़खड़ाते हुए कदम और कांधे झुके हुए। दरोगा बेटे कुलदीप की मौत के बाद ऐसा हाल है उसके पिता अशोक कुमार का। रविवार को परिजनों के साथ देवबंद पहुंचा अशोक कुमार कुछ देर के लिए रेलवे रोड पर बेटे कुलदीप कुमार के कमरे पर पहुंचा। काफी देर तक वह पुलिस द्वारा सील किए गए कमरे को देखता रहा। इस दौरान उसकी नजर बाहर तार पर लटकी बेटे की वर्दी पर पड़ी तो वह खुद को संभाल नहीं सका और वर्दी को उतारकर सीने से लगाते हुए फूट-फूटकर रोने लगा। इतना ही नहीं अशोक कुमार रोते हुए कह रहा था कि बेटा तुझे कहां से लेकर आऊं। इस दौरान उसके साथ मौजूद अन्य लोगों की आंखों भी नम हो गईं। बाद में उन्होंने अशोक कुमार को बामुश्किल संभाला।
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देवबंद (सहारनपुर)। जवान बेटे की अर्थी को कंधा देकर पूरी तरह टूट चुका दरोगा कुलदीप कुमार का पिता अशोक कुमार रविवार को देवबंद में बेटे के कमरे पर पहुंचा तो अपने आपको संभाल नहीं पाया और बाहर लटकी बेटे की वर्दी को सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोने लगा। जिसे वहां मौजूद लोगों ने मुश्किल से उन्हें संभाला।
आंखों में आंसू, लड़खड़ाते हुए कदम और कांधे झुके हुए। दरोगा बेटे कुलदीप की मौत के बाद ऐसा हाल है उसके पिता अशोक कुमार का। रविवार को परिजनों के साथ देवबंद पहुंचा अशोक कुमार कुछ देर के लिए रेलवे रोड पर बेटे कुलदीप कुमार के कमरे पर पहुंचा। काफी देर तक वह पुलिस द्वारा सील किए गए कमरे को देखता रहा। इस दौरान उसकी नजर बाहर तार पर लटकी बेटे की वर्दी पर पड़ी तो वह खुद को संभाल नहीं सका और वर्दी को उतारकर सीने से लगाते हुए फूट-फूटकर रोने लगा। इतना ही नहीं अशोक कुमार रोते हुए कह रहा था कि बेटा तुझे कहां से लेकर आऊं। इस दौरान उसके साथ मौजूद अन्य लोगों की आंखों भी नम हो गईं। बाद में उन्होंने अशोक कुमार को बामुश्किल संभाला।
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