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बहुउद्देशीय हॉल के लिए कटेंगे 352 पेड़

Fri, 26 Nov 2021 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 12:00 AM IST
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352 trees to be cut for multipurpose hall
मुजफ्फरनगर के राजकीय कालेज के प्रांगण में स्थित वृक्ष। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बहुउद्देशीय हॉल के लिए कटेंगे 352 पेड़
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मुजफ्फरनगर। प्रदूषण की समस्या से जूझ रही शहर की जनता के लिए मुसीबत बढ़ेगी। शहर के बीचो बीच जीआईसी प्रांगण के घने जंगल को काटने की तैयारी है। 352 हरे भरे वृक्षों को काटने की सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
महावीर चौक के निकट संग्रहालय के बराबर की दस बीघा जमीन पर एमडीए बहुउद्देशीय हॉल बनाने जा रहा है। 500 लोगों की क्षमता वाले इस सभागार को बनाने के लिए 352 पेड़ों का जंगल कटेगा। हॉल के निर्माण को जीआईसी ने एमडीए को एनओसी दे दी है। डीआईओएस के माध्यम से प्रक्रिया पूरी हो गई है। पेड़ काटने की प्रक्रिया भी चल रही है। डीआईओएस ने वन विभाग को पत्र लिख दिया है। वन विभाग पेड़ों का सर्वे कर चुका है, जल्द ही वृक्षों को काटा जाएगा।
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इस समय पूरा शहर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। शहर के बीच में पेड़ों का यह जंगल पर्यावरण सुरक्षा में बड़ा योगदान दे रहा है। यह तैयार जंगल कट जाएगा तो शहर में प्रदूषण की समस्या बढे़गी। इस जंगल में एक सैकड़ों साल पुराना पीपल का पेड़ भी है।
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दस बीघा जमीन पर बनेगा बहुउद्देशीय हॉल
एमडीए ने जीआईसी से बहुउद्देशीय हॉल के लिए नौ हजार वर्ग मीटर जमीन की अनुमति ली है। डीआईओएस दफ्तर से जमीन के हस्तानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। एमडीएम को एनओसी मिल चुका है। लगभग दस बीघा जमीन पर 25 करोड़ की लागत से बनने वाले इस हॉल के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
कम पेड़ कटने का विकल्प है
जीआईसी के प्रांगण में दक्षिण दिशा की ओर जमीन खाली है। पेड़ की संख्या 100 से कम है। ऐसे में हॉल भी बन सकता है और पेड़ भी बच सकते हैं। इस पर एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद का कहना है कि निर्माण मानकों के हिसाब से दक्षिण में नहीं हो सकता।
हमें एनओसी मिल गई है: महेंद्र
एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद का कहना है कि जीआईसी से हमें जमीन की एनओसी मिल गई है। पेड़ काटने की अनुमति के लिए डीआईओएस ने डीएफओ को लिखा है। वन विभाग ने सर्वे कर लिया है, पूरी प्रक्रिया विधि के हिसाब से होगी।

अनुमति के बाद ही कटेंगे पेड़
डीआईओएस गजेंद्र कुमार का कहना है कि वन विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग पेड़ों का मूल्यांकन कर रहा है और अनुमति देगा। अनुमति के बाद पेड़ काटे जाएंगे। जो पैसा आएगा वह कॉलेज के एकाउंट में जमा होगा।
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