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...बेटा जब परदेश को जाए मां रोया करती है
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देवबंद (सहारनपुर)। भारतीय सांस्कृतिक संगम के तत्वावधान में मातृ दिवस के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से मां की ममता को उजागर किया।
मोहल्ला शाहजीलाल में काव्य गोष्ठी में श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा इतना प्यार करेगा कौन जितना मां करती है, बेटा जब परदेश को जाए मां रोया करती है। डा. दिवाकर गर्ग ने कहा कतरा-कतरा जोड़े मां पत्थर रोज निचोडे़ मां, बच्चों के सपनों की खातिर अपने सपने तोड़े मां। महताब आजाद ने पढ़ा बेअसर मुझ पर हुआ है दुश्मनों का जहर तक, मुझको लंबी उम्र की मां ने दुआ दी थी कभी। शमीम किरतपुरी ने कहा आ जा कि तेरे दम से सिजा की बहार है, ऐ जाने इंतजार तेरा इंतजार है। सुरेश मयंक ने पढ़ा कड़ी धूप से हमें बचाए मां की ममता का आंचल, देश्प्रेम भी हमें सिखाए मां की ममता का आंचल। बलराज मलिक ने कहा निष्कपट, निश्चल, निरापद, निरंतर, मां की ममता होती है। कमल देवबंदी ने पढ़ा दर्द मत देना उन हस्तियों को कभी, खुदा ने मां बाप बनाया जिनको। प्रहलाद सिंह ने कहा भुलाकर नींद अपनी सुलाया हमको, गिराकर अपने आंसू हंसाया हमको। अध्यक्षता पंडित सतेंद्र शर्मा और संचालन बलराज मलिक ने किया। गोष्ठी में आदेश चौहान, अब्दुल्ला, सतीश कुमार, प्रियांशु चौहान, आशीष कुमार, रिषभ चौहान, वंश कुमार, अंकित चौहान आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला शाहजीलाल में काव्य गोष्ठी में श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा इतना प्यार करेगा कौन जितना मां करती है, बेटा जब परदेश को जाए मां रोया करती है। डा. दिवाकर गर्ग ने कहा कतरा-कतरा जोड़े मां पत्थर रोज निचोडे़ मां, बच्चों के सपनों की खातिर अपने सपने तोड़े मां। महताब आजाद ने पढ़ा बेअसर मुझ पर हुआ है दुश्मनों का जहर तक, मुझको लंबी उम्र की मां ने दुआ दी थी कभी। शमीम किरतपुरी ने कहा आ जा कि तेरे दम से सिजा की बहार है, ऐ जाने इंतजार तेरा इंतजार है। सुरेश मयंक ने पढ़ा कड़ी धूप से हमें बचाए मां की ममता का आंचल, देश्प्रेम भी हमें सिखाए मां की ममता का आंचल। बलराज मलिक ने कहा निष्कपट, निश्चल, निरापद, निरंतर, मां की ममता होती है। कमल देवबंदी ने पढ़ा दर्द मत देना उन हस्तियों को कभी, खुदा ने मां बाप बनाया जिनको। प्रहलाद सिंह ने कहा भुलाकर नींद अपनी सुलाया हमको, गिराकर अपने आंसू हंसाया हमको। अध्यक्षता पंडित सतेंद्र शर्मा और संचालन बलराज मलिक ने किया। गोष्ठी में आदेश चौहान, अब्दुल्ला, सतीश कुमार, प्रियांशु चौहान, आशीष कुमार, रिषभ चौहान, वंश कुमार, अंकित चौहान आदि मौजूद रहे।
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