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कीटों और रोगों से बचाएं आम की फसल
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कीटों और रोगों से बचाएं आम की फसल को
मुजफ्फरनगर। आम की फसल में इन दिनों कीटों और रोगों का प्रभाव हो सकता है। समय रहते इनकी रोकथाम न की गई तो फसल को नुकसान हो सकता है।
उद्यान विभाग की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि आम में बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था संवेदनशील होती है। आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुंचाते हैं। इस कीट के प्रभाव से पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है। प्रभावित भाग काला पड़कर सूूख जाता है। भुनगा व मिज कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड तीन मिली. प्रति लीटर पानी या क्लोरपाइरीफास दो मिली. प्रतिलीटर अथवा डायमेथोएट दो मिली. प्रतिलीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। इसके अलावा खर्रा रोग का भी आम को नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठल पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है। प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं तथा मंजरियां सूख जाती हैं। बचाव के लिए ट्राईकोमार्फ एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से भुनगा रोग के नियंत्रण के लिए प्रयोग किए जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करें।
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मुजफ्फरनगर। आम की फसल में इन दिनों कीटों और रोगों का प्रभाव हो सकता है। समय रहते इनकी रोकथाम न की गई तो फसल को नुकसान हो सकता है।
उद्यान विभाग की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि आम में बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था संवेदनशील होती है। आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुंचाते हैं। इस कीट के प्रभाव से पत्तियों पर काले रंग की फफूंद जम जाती है। प्रभावित भाग काला पड़कर सूूख जाता है। भुनगा व मिज कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड तीन मिली. प्रति लीटर पानी या क्लोरपाइरीफास दो मिली. प्रतिलीटर अथवा डायमेथोएट दो मिली. प्रतिलीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। इसके अलावा खर्रा रोग का भी आम को नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठल पर सफेद चूर्ण के समान फफूंद की वृद्धि दिखाई देती है। प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं तथा मंजरियां सूख जाती हैं। बचाव के लिए ट्राईकोमार्फ एक मिली प्रति लीटर पानी की दर से भुनगा रोग के नियंत्रण के लिए प्रयोग किए जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करें।