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यज्ञ भारतीय संस्कृति का आधार: कल्पना
Updated Sun, 09 Dec 2018 11:59 PM IST
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यज्ञ भारतीय संस्कृति का आधार: कल्पना
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी के तीन दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ का वैदिक संस्कृति को घर-घर पहुंचाने के संकल्प के साथ समापन हो गया। आचार्या कल्पना आर्य ने कहा कि यज्ञ भारत की सनातन संस्कृति का आधार है।
गांधी कालोनी में आयोजित सामवेद परायण यज्ञ की पूर्णाहुति पर दिल्ली से आई आचार्या कल्पना आर्य ने कहा कि महाभारत काल तक देश में प्रतिदिन यज्ञ की परंपरा थी। यज्ञ से पुण्य कर्म की प्रेरणा मिलती है, संतान सदाचारी, अनुशासित बनती है। वेदों में बच्चों के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को उत्तम बनाने के संस्कारों का ज्ञान दिया गया है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में स्थायी सुख के लिए सत्य और न्याय का आचरण करें। वैदिक संस्कृति अनमोल है। घर परिवार में यज्ञ होंगे तो संस्कार प्रवाहित होंगे, जिससे समृद्धि, स्वास्थ्य और यश बढ़ेगा। स्वामी ब्रहमानंद ने कहा कि मन और इंद्रियों का संयम जीवन को स्वर्ग बनाता है। गुणों को ग्रहण करने के लिए सदैव तत्पर रहें। यज्ञमान का दायित्व गजेंद्र राणा, सत्यजीत राणा, अशोक जाखड़, विपिन, वरुण ने सपत्नीक निभाया। वेदपाठ दिव्या आर्या हरिद्वार ने किया। संयोजक गजेंद्र राणा एवं देवेंद्र राणा ने संतों और आचार्यों का सत्कार किया। प्रणपाल सिंह, मान पाल सिंह, सुभाष चौधरी, जगदीश प्रसाद त्यागी, मदन राठी, जय सिंह, महेंद्र कुमार, विजयपाल सिंह, अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह, शिव कुमार धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन योगाचार्य हरपाल आर्य ने किया।
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मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी के तीन दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ का वैदिक संस्कृति को घर-घर पहुंचाने के संकल्प के साथ समापन हो गया। आचार्या कल्पना आर्य ने कहा कि यज्ञ भारत की सनातन संस्कृति का आधार है।
गांधी कालोनी में आयोजित सामवेद परायण यज्ञ की पूर्णाहुति पर दिल्ली से आई आचार्या कल्पना आर्य ने कहा कि महाभारत काल तक देश में प्रतिदिन यज्ञ की परंपरा थी। यज्ञ से पुण्य कर्म की प्रेरणा मिलती है, संतान सदाचारी, अनुशासित बनती है। वेदों में बच्चों के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को उत्तम बनाने के संस्कारों का ज्ञान दिया गया है। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में स्थायी सुख के लिए सत्य और न्याय का आचरण करें। वैदिक संस्कृति अनमोल है। घर परिवार में यज्ञ होंगे तो संस्कार प्रवाहित होंगे, जिससे समृद्धि, स्वास्थ्य और यश बढ़ेगा। स्वामी ब्रहमानंद ने कहा कि मन और इंद्रियों का संयम जीवन को स्वर्ग बनाता है। गुणों को ग्रहण करने के लिए सदैव तत्पर रहें। यज्ञमान का दायित्व गजेंद्र राणा, सत्यजीत राणा, अशोक जाखड़, विपिन, वरुण ने सपत्नीक निभाया। वेदपाठ दिव्या आर्या हरिद्वार ने किया। संयोजक गजेंद्र राणा एवं देवेंद्र राणा ने संतों और आचार्यों का सत्कार किया। प्रणपाल सिंह, मान पाल सिंह, सुभाष चौधरी, जगदीश प्रसाद त्यागी, मदन राठी, जय सिंह, महेंद्र कुमार, विजयपाल सिंह, अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह, शिव कुमार धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन योगाचार्य हरपाल आर्य ने किया।
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