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हेलमेट बिना सड़कों पर खत्म हो रही जिंदगी
Updated Tue, 27 Mar 2018 12:56 AM IST
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सबसे ज्यादा दुर्घटना का शिकार बनते टू-व्हीलर सवार
मुजफ्फरनगर।
ट्रैफिक के दबाव को झेलती सड़कों पर सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटनाओं में जिंदगी गवां रहे हैं। कानून के बावजूद हेलमेट से बनी दूरी दुपहिया वाहन सवारों की मौत की बड़ी वजह बन गई है। एक माह में जिले में 14 बाइक सवार हादसों की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के सूबे में बढ़ती मौतों पर प्रत्येक बुधवार को जागरूकता दिवस अभियान चलाया है।
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 129 तथा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 1998-201 के तहत दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। वर्ष 2016 में नियमावली में संशोधन कर मोटरसाइकिल, स्कूटर या मोपेड पर पीछे बैठी सवारी को भी हेलमेट प्रयोग करना होगा। कानून के बावजूद टू-व्हीलर चालक हेलमेट के इस्तेमाल से बेपरवाह हैं। ऐसे में बाइक और स्कूटी के पीछे बैठी सवारी से हेलमेट लगाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? सड़कों पर यातायात का बोझ हर दिन बढ़ रहा है। जिले से जुड़े हाइवे और राजमार्ग पर आए दिन दुपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटना में अपनी जिंदगी गवां रहे हैं। फिर भी लोग हेलमेट लगाना जरूरी नहीं समझते। चाहे शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह बिना हेलमेट प्रयोग किए दुपहिया वाहन चालक सड़कों पर फर्राटा दौड़ रहे हैं। चिंताजनक यह है कि टू-व्हीलर पर ट्रिपल राइडिंग आम है। बच्चों के साथ दंपति एक ही बाइक पर सवार दिखाई देते हैं। वाहन चालकों पर सख्ती के लिए प्रशासन के उठाए गए कदम भी नाकाफी साबित हुए हैं। पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के तेल नहीं मिलने का अभियान जिले में कारगर नहीं रहा। सभी पेट्रोल पंपों पर सिर्फ स्लोगन लगे रह गए है। बच्चों के हाथ में स्कूटी और बाइकें है। सीबीएसई स्कूलों के छात्र-छात्राओं के बीच टू-व्हीलर का क्रेज सबसे ज्यादा है। जो स्टूडेंट्स गांव से शहर के कॉलेजों में आते है, वो अधिकतर बाइकों पर सवार है। बाइक और स्कूटी पर तीन और चार युवा एक साथ सड़कों पर दौड़ रहे है। बोर्ड परीक्षा में दूरदराज परीक्षा केंद्र होने की वजह से बाइकों पर आवाजाही करने वाले कई युवा सड़क दुर्घटना का शिकार बने। वाहन चालकों की एक और आदत जिंदगी पर भारी पड़ रही है। हेलमेट सिर पर नहीं, बल्कि बाइकों के पीछे लॉक कर सड़कों पर चलते है।
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ड्राइविंग के वक्त फोन सुनने से बढ़ता खतरा
मुजफ्फरनगर। बाइक पर चलते वक्त हेडफोन और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का ट्रेंड जान लेवा बन गया है। युवाओं में टू-व्हीलर पर मोबाइल पर बात करना एक फैशन बन चुका है। ड्राइविंग करते वक्त मोबाइल पर बात या म्यूजिक सुनने से ध्यान एकाग्र नहीं होता। मानसिक संतुलन अस्थिर होते ही पल भर में दुर्घटना हो जाती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ डीएस मलिक बताते हैं कि सड़क हादसों में 20 फीसदी दुपहिया वाहन चालकों की गर्दन की हड्डी टूट जाती है। हेलमेट से गर्दन, सिर, कान, आंख, मुहं और जबड़े की हड्डी की काफी हद तक सुरक्षा हो जाती है। बाइकों पर सबसे अधिक शिकार 15 से 30 साल के युवा हो रहे हैं।
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सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के ड्राइविंग न करें।
- हेलमेट लगाने के बाद स्ट्रीप बंद करके रखे।
- वाहन की गति 50 किलोमीटर से अधिक न हो।
- बड़े वाहनों को ओवरटेक करने में जल्दबाजी न करें।
- नशा कर वाहन नहीं चलाएं।
- 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बाइक-स्कूटी न दें।
- वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर बात न करें।
- वाहन चलाते वक्त यातायात नियमों का पालन करें।
- स्पीड ब्रेकर पर वाहनों की गति को धीमा रखे।
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-हेलमेट पहन कर वाहन चलाने से दुर्घटना में जीवित बचने की संभावना 50 प्रतिशत बढ़ जाती है। जीवन की रक्षा के लिए वाहन चालकों को हेलमेट तथा कार में सीट बेल्ट लगा कर ड्राइविंग करने को जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक बुधवार को सड़क सुरक्षा-जीवन सुरक्षा’ अभियान भी चलाया है।
- बीबी चौरसिया, एसपी ट्रैफिक
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- एक अप्रैल से जिले में बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चालकों के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा। सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों को बिना हेलमेट के प्रवेश वर्जित रहेगा। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के संयुक्त अभियान में पकड़े जाने पर वाहन चालकों से निर्धारित जुर्माना भी वसूला जाएगा। बिना सीट बेल्ट के कार चालक वाहन नहीं चला पाएंगे। अभी तक बिना हेलमेट के 4875 टू-व्हीलर सवारों का चालान किया जा चुका है।
- सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
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हेलमेट होता तो बच सकती थी जिंदगी
मुजफ्फरनगर। खतौली में 21 फरवरी को दुपहिया वाहन हादसे में दो छात्रों नैतिक और नवजोत सिंह की मौत हो गई थी। मीरापुर में सात मार्च को सड़क दुर्घटना में लावड़ के शारिफ, मीरापुर के मोहसीन को जान गवानी पड़ी। उसी दिन रोहाना के पास हाइवे पर हादसे में वाजिद और अख्तर की मृत्यु हो गई। 13 मार्च को बुढ़ाना में रणखंडी के मोंटी और टंढेड़ा के हनी हादसे का शिकार बने। ये सभी बाइक पर सवार थे और इन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था। मुजफ्फरनगर बाईपास हाईवे पर खामपुर के सचिन और चरथावल मोड पर सिकंदरपुर की शिमला की मौत हुई, ये बाइक पर पीछे बिना हेलमेट बैठे थे।
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मुजफ्फरनगर।
ट्रैफिक के दबाव को झेलती सड़कों पर सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटनाओं में जिंदगी गवां रहे हैं। कानून के बावजूद हेलमेट से बनी दूरी दुपहिया वाहन सवारों की मौत की बड़ी वजह बन गई है। एक माह में जिले में 14 बाइक सवार हादसों की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के सूबे में बढ़ती मौतों पर प्रत्येक बुधवार को जागरूकता दिवस अभियान चलाया है।
केंद्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 129 तथा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 1998-201 के तहत दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। वर्ष 2016 में नियमावली में संशोधन कर मोटरसाइकिल, स्कूटर या मोपेड पर पीछे बैठी सवारी को भी हेलमेट प्रयोग करना होगा। कानून के बावजूद टू-व्हीलर चालक हेलमेट के इस्तेमाल से बेपरवाह हैं। ऐसे में बाइक और स्कूटी के पीछे बैठी सवारी से हेलमेट लगाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? सड़कों पर यातायात का बोझ हर दिन बढ़ रहा है। जिले से जुड़े हाइवे और राजमार्ग पर आए दिन दुपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटना में अपनी जिंदगी गवां रहे हैं। फिर भी लोग हेलमेट लगाना जरूरी नहीं समझते। चाहे शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह बिना हेलमेट प्रयोग किए दुपहिया वाहन चालक सड़कों पर फर्राटा दौड़ रहे हैं। चिंताजनक यह है कि टू-व्हीलर पर ट्रिपल राइडिंग आम है। बच्चों के साथ दंपति एक ही बाइक पर सवार दिखाई देते हैं। वाहन चालकों पर सख्ती के लिए प्रशासन के उठाए गए कदम भी नाकाफी साबित हुए हैं। पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के तेल नहीं मिलने का अभियान जिले में कारगर नहीं रहा। सभी पेट्रोल पंपों पर सिर्फ स्लोगन लगे रह गए है। बच्चों के हाथ में स्कूटी और बाइकें है। सीबीएसई स्कूलों के छात्र-छात्राओं के बीच टू-व्हीलर का क्रेज सबसे ज्यादा है। जो स्टूडेंट्स गांव से शहर के कॉलेजों में आते है, वो अधिकतर बाइकों पर सवार है। बाइक और स्कूटी पर तीन और चार युवा एक साथ सड़कों पर दौड़ रहे है। बोर्ड परीक्षा में दूरदराज परीक्षा केंद्र होने की वजह से बाइकों पर आवाजाही करने वाले कई युवा सड़क दुर्घटना का शिकार बने। वाहन चालकों की एक और आदत जिंदगी पर भारी पड़ रही है। हेलमेट सिर पर नहीं, बल्कि बाइकों के पीछे लॉक कर सड़कों पर चलते है।
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मुजफ्फरनगर। बाइक पर चलते वक्त हेडफोन और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का ट्रेंड जान लेवा बन गया है। युवाओं में टू-व्हीलर पर मोबाइल पर बात करना एक फैशन बन चुका है। ड्राइविंग करते वक्त मोबाइल पर बात या म्यूजिक सुनने से ध्यान एकाग्र नहीं होता। मानसिक संतुलन अस्थिर होते ही पल भर में दुर्घटना हो जाती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ डीएस मलिक बताते हैं कि सड़क हादसों में 20 फीसदी दुपहिया वाहन चालकों की गर्दन की हड्डी टूट जाती है। हेलमेट से गर्दन, सिर, कान, आंख, मुहं और जबड़े की हड्डी की काफी हद तक सुरक्षा हो जाती है। बाइकों पर सबसे अधिक शिकार 15 से 30 साल के युवा हो रहे हैं।
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सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के ड्राइविंग न करें।
- हेलमेट लगाने के बाद स्ट्रीप बंद करके रखे।
- वाहन की गति 50 किलोमीटर से अधिक न हो।
- बड़े वाहनों को ओवरटेक करने में जल्दबाजी न करें।
- नशा कर वाहन नहीं चलाएं।
- 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बाइक-स्कूटी न दें।
- वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर बात न करें।
- वाहन चलाते वक्त यातायात नियमों का पालन करें।
- स्पीड ब्रेकर पर वाहनों की गति को धीमा रखे।
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-हेलमेट पहन कर वाहन चलाने से दुर्घटना में जीवित बचने की संभावना 50 प्रतिशत बढ़ जाती है। जीवन की रक्षा के लिए वाहन चालकों को हेलमेट तथा कार में सीट बेल्ट लगा कर ड्राइविंग करने को जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक बुधवार को सड़क सुरक्षा-जीवन सुरक्षा’ अभियान भी चलाया है।
- बीबी चौरसिया, एसपी ट्रैफिक
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- एक अप्रैल से जिले में बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चालकों के खिलाफ अभियान शुरू किया जाएगा। सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों को बिना हेलमेट के प्रवेश वर्जित रहेगा। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के संयुक्त अभियान में पकड़े जाने पर वाहन चालकों से निर्धारित जुर्माना भी वसूला जाएगा। बिना सीट बेल्ट के कार चालक वाहन नहीं चला पाएंगे। अभी तक बिना हेलमेट के 4875 टू-व्हीलर सवारों का चालान किया जा चुका है।
- सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
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हेलमेट होता तो बच सकती थी जिंदगी
मुजफ्फरनगर। खतौली में 21 फरवरी को दुपहिया वाहन हादसे में दो छात्रों नैतिक और नवजोत सिंह की मौत हो गई थी। मीरापुर में सात मार्च को सड़क दुर्घटना में लावड़ के शारिफ, मीरापुर के मोहसीन को जान गवानी पड़ी। उसी दिन रोहाना के पास हाइवे पर हादसे में वाजिद और अख्तर की मृत्यु हो गई। 13 मार्च को बुढ़ाना में रणखंडी के मोंटी और टंढेड़ा के हनी हादसे का शिकार बने। ये सभी बाइक पर सवार थे और इन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था। मुजफ्फरनगर बाईपास हाईवे पर खामपुर के सचिन और चरथावल मोड पर सिकंदरपुर की शिमला की मौत हुई, ये बाइक पर पीछे बिना हेलमेट बैठे थे।