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वृद्धा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डाला डेरा
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:12 AM IST
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वृद्धा की मौत के बाद जीवाना में चिकित्सक तैनात
मुजफ्फरनगर।
जीवना गांव स्वास्थ्य विभाग के गले की फांस बन गया है। वायरल और टाइफाइड से निपटने में विभाग के पसीने छूट गए हैं। शनिवार को हुई वृद्धा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में डेरा डाल दिया है। गांव में एमबीबीएस और बीयूएमएस स्तर के चिकित्सकों के साथ टीम तैनात की गई। विभाग ने वृद्धा की मृत्यु को सामान्य बताया है। इसके अलावा भी करीब 40 लोगों के ब्लड सैंपल भरे गए हैं।
जीवना गांव में पंद्रह दिन के भीतर चार मौतें हो चुकी है। ग्रामीण बुखार आदि से मौत होने बता रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग इसे मानने से इंकार कर रहा है। हालांकि गांव में वायरल और टाइफाइड का प्रकोप फैलने की पुष्टि की गई है। जिसकी चपेट में ग्रामीण आ रहे हैं। शनिवार देर रात को गांव वृद्धा शांति पत्नी मलखान की मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जिसके चलते रविवार को शाहपुर अस्पताल के इंचार्ज डॉ. नरेंद्र पाल सिंह, पुरबालियान के डॉ. मयंक सिंह के नेतृत्व में टीम भेजी गई।
टीम में एमबीबीएस और बीयूएमएस के स्तर के चिकित्सकों के साथ लैब टेक्नीशियन, मलेरिया इंस्पेक्टर को भेजा गया। टीम ने मृतक वृद्धा के परिजनों से जानकारी लेकर जांच पड़ताल की। जिसमें चिकित्सकों ने उसकी मृत्यु सामान्य रूप से होने की पुष्टि की है। इसके अलावा भी गांव में कैंप लगाकर करीब 90 लोगों का चेकअप किया गया। जिनमें से 40 मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। जीवना गांव में कैंप प्रभारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि गांव में लगातार चिकित्सकों की टीम लगा रखी है। रोजाना चेकअप करने के साथ दवाइयां वितरित की जा रही है।
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घर-घर जाकर निकलवाया दूषित पानी
मुजफ्फरनगर। गांव में चिकित्सकों की टीम ने घर-घर जाकर कूलर, गमलों, छप्परों पर रखे टायरों आदि में जमा पानी बाहर निकलवाया। ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों के बारे में भी जानकारी दी गई। ताकि बीमारी पर नियंत्रित किया जा सके।
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मुजफ्फरनगर।
जीवना गांव स्वास्थ्य विभाग के गले की फांस बन गया है। वायरल और टाइफाइड से निपटने में विभाग के पसीने छूट गए हैं। शनिवार को हुई वृद्धा की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में डेरा डाल दिया है। गांव में एमबीबीएस और बीयूएमएस स्तर के चिकित्सकों के साथ टीम तैनात की गई। विभाग ने वृद्धा की मृत्यु को सामान्य बताया है। इसके अलावा भी करीब 40 लोगों के ब्लड सैंपल भरे गए हैं।
जीवना गांव में पंद्रह दिन के भीतर चार मौतें हो चुकी है। ग्रामीण बुखार आदि से मौत होने बता रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग इसे मानने से इंकार कर रहा है। हालांकि गांव में वायरल और टाइफाइड का प्रकोप फैलने की पुष्टि की गई है। जिसकी चपेट में ग्रामीण आ रहे हैं। शनिवार देर रात को गांव वृद्धा शांति पत्नी मलखान की मृत्यु के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जिसके चलते रविवार को शाहपुर अस्पताल के इंचार्ज डॉ. नरेंद्र पाल सिंह, पुरबालियान के डॉ. मयंक सिंह के नेतृत्व में टीम भेजी गई।
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टीम में एमबीबीएस और बीयूएमएस के स्तर के चिकित्सकों के साथ लैब टेक्नीशियन, मलेरिया इंस्पेक्टर को भेजा गया। टीम ने मृतक वृद्धा के परिजनों से जानकारी लेकर जांच पड़ताल की। जिसमें चिकित्सकों ने उसकी मृत्यु सामान्य रूप से होने की पुष्टि की है। इसके अलावा भी गांव में कैंप लगाकर करीब 90 लोगों का चेकअप किया गया। जिनमें से 40 मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। जीवना गांव में कैंप प्रभारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि गांव में लगातार चिकित्सकों की टीम लगा रखी है। रोजाना चेकअप करने के साथ दवाइयां वितरित की जा रही है।
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घर-घर जाकर निकलवाया दूषित पानी
मुजफ्फरनगर। गांव में चिकित्सकों की टीम ने घर-घर जाकर कूलर, गमलों, छप्परों पर रखे टायरों आदि में जमा पानी बाहर निकलवाया। ग्रामीणों को दूषित जल से होने वाली बीमारियों के बारे में भी जानकारी दी गई। ताकि बीमारी पर नियंत्रित किया जा सके।