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इन्डेन्ट की समस्या व मौसम के बदलते रंग से किसान तनाव में
Updated Fri, 20 Apr 2018 12:52 AM IST
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बुढ़ाना। चीनी मिलों द्वारा कम इंडेंट देने तथा मौसम के बदलते रंग से किसान तनाव में है।
चीनी मिल का पेराई सत्र अंतिम चरण में है। चीनी मिलों ने अपने लक्ष्य से भी अधिक गन्ने की पेराई कर ली है। कस्बा तथा देहात क्षेत्रों में गन्ने की बंपर पैदावार ने चीनी मिल तथा किसानों को पसीना दे दिया है। किसानों की 10 से 20 प्रतिशत गन्ने की फसल खेत में खड़ी है। भीषण गर्मी में गन्ने की छिलाई करने के लिए किसान को मजदूर नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि गन्ने मजदूर गेहूं की कटाई में लग गए हैं। किसान की गन्ने और गेहूं की दोनों फसल खेत में खड़ी हुई हैं। सोमपाल मलिक, पप्पू मलिक, ग्राम प्रधान जितेंद्र मलिक सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि चीनी मिलों द्वारा कम इंडेंट भेजने की समस्या के कारण उनका गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में किसान गन्ने की फसल से निपटकर गेहूं की फसल की कटाई व थ्रेसिंग के कार्य में लग जाता था। कम इंडेंट की समस्या के कारण उसकी गन्ने की फसल भी नहीं कट पाई।
किसानों का कहना है कि मौसम का रोज रंग बदलता है। किसानों की गेहूं की फसल पककर खेतों में खड़ी हुई है। किसानों की 40 प्रतिशत गेहूं की फसल की कटाई हुई है। किसान दिन रात मेहनत करके अपनी दोनों फसलों को सुरक्षित करने के लिए तनाव में है। सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत ने बताया कि किसान को गन्ने की फसल व गेहूं की फसल दोनों ने परेशान कर दिया है। देहातों में मजदूरों की गंभीर समस्या है। पहली बारिश ने किसानों की 20 से 30 प्रतिशत फसल बर्बाद कर दी थी। अब यदि बारिश हुई तो किसान की गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो जाएगी।
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चीनी मिल का पेराई सत्र अंतिम चरण में है। चीनी मिलों ने अपने लक्ष्य से भी अधिक गन्ने की पेराई कर ली है। कस्बा तथा देहात क्षेत्रों में गन्ने की बंपर पैदावार ने चीनी मिल तथा किसानों को पसीना दे दिया है। किसानों की 10 से 20 प्रतिशत गन्ने की फसल खेत में खड़ी है। भीषण गर्मी में गन्ने की छिलाई करने के लिए किसान को मजदूर नहीं मिल रहा है। किसानों का कहना है कि गन्ने मजदूर गेहूं की कटाई में लग गए हैं। किसान की गन्ने और गेहूं की दोनों फसल खेत में खड़ी हुई हैं। सोमपाल मलिक, पप्पू मलिक, ग्राम प्रधान जितेंद्र मलिक सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि चीनी मिलों द्वारा कम इंडेंट भेजने की समस्या के कारण उनका गन्ना खेतों में खड़ा हुआ है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में किसान गन्ने की फसल से निपटकर गेहूं की फसल की कटाई व थ्रेसिंग के कार्य में लग जाता था। कम इंडेंट की समस्या के कारण उसकी गन्ने की फसल भी नहीं कट पाई।
किसानों का कहना है कि मौसम का रोज रंग बदलता है। किसानों की गेहूं की फसल पककर खेतों में खड़ी हुई है। किसानों की 40 प्रतिशत गेहूं की फसल की कटाई हुई है। किसान दिन रात मेहनत करके अपनी दोनों फसलों को सुरक्षित करने के लिए तनाव में है। सेवानिवृत्त अपर जिला कृषि अधिकारी रामनिवास सहरावत ने बताया कि किसान को गन्ने की फसल व गेहूं की फसल दोनों ने परेशान कर दिया है। देहातों में मजदूरों की गंभीर समस्या है। पहली बारिश ने किसानों की 20 से 30 प्रतिशत फसल बर्बाद कर दी थी। अब यदि बारिश हुई तो किसान की गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो जाएगी।
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