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जिले में 1000 लड़कों पर 994 में लड़कियां
Updated Tue, 20 Feb 2018 12:04 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जिले के आंगन में बेटियां फल-फूल रही हैं। केंद्र सरकार के एनएफएचएस सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वह खुशखबरी से भरे हैं। जिले में लिंगानुपात के ग्राफ में बदलाव आया है। अब जनपद में प्रति हजार लड़कों पर 994 लड़कियां है। वहीं, पीसीपीएनडीटी एक्ट को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
अल्ट्रासाउंड केंद्र लिंगानुपात पर कुठाराघात कर रहे हैं। कुछ केंद्रों पर लिंगभेद हो रहा है। यहां बेटा-बेटी की पहचान बताई जा रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता बढ़ाई है। हालांकि लगातार छापामारी और कार्रवाई के डर से अवैध धंधे पर नकेल कसी है, मगर अभी पर्याप्त रूप से चालबाज पकड़ से दूर है। देशभर में एनएफएचएस ने हाउस होल्ड सर्वे किया है, जिसमें कई पहलुओं पर राहत मिली है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिले में लिंगानुपात का आंकड़ा प्रति हजार पर 886 लड़कियां थी। यह तस्वीर अब बदल गई है। वर्ष 2015-16 में किए गए सर्वे के आधार पर जिले ने लिंगानुपात में बाजी मारी है। यहां पर कुल आबादी के सापेक्ष प्रति हजार लड़कों पर 994 लड़कियां सामने आई हैं। ऐसे में साफ है कि जिले में बेटियों की किलकारियों से आंगन गूंज रहे हैं। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि लगातार चल रहे कार्यक्रमों और जनजागरूकता के असर के कारण यह आंकड़ा सामने आया है। कन्या भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता चलाने के साथ विभाग डिक्वॉय आपरेशन करने में लगा है, ताकि अगली बार यह आंकड़े बराबर स्टेज पर पहुंच जाए।
लखनऊ में हुई थी मीटिंग
मुजफ्फरनगर। हॉल ही में लखनऊ में मीटिंग की गई थी, जिसमें अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर नकेल कसने के लिए कहा गया है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर डिक्वॉय ऑप्रेशन चलाया जाए, ताकि लिंगानुपात का ग्राफ नीचे नहीं गिर सके।
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अल्ट्रासाउंड केंद्र लिंगानुपात पर कुठाराघात कर रहे हैं। कुछ केंद्रों पर लिंगभेद हो रहा है। यहां बेटा-बेटी की पहचान बताई जा रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता बढ़ाई है। हालांकि लगातार छापामारी और कार्रवाई के डर से अवैध धंधे पर नकेल कसी है, मगर अभी पर्याप्त रूप से चालबाज पकड़ से दूर है। देशभर में एनएफएचएस ने हाउस होल्ड सर्वे किया है, जिसमें कई पहलुओं पर राहत मिली है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिले में लिंगानुपात का आंकड़ा प्रति हजार पर 886 लड़कियां थी। यह तस्वीर अब बदल गई है। वर्ष 2015-16 में किए गए सर्वे के आधार पर जिले ने लिंगानुपात में बाजी मारी है। यहां पर कुल आबादी के सापेक्ष प्रति हजार लड़कों पर 994 लड़कियां सामने आई हैं। ऐसे में साफ है कि जिले में बेटियों की किलकारियों से आंगन गूंज रहे हैं। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि लगातार चल रहे कार्यक्रमों और जनजागरूकता के असर के कारण यह आंकड़ा सामने आया है। कन्या भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता चलाने के साथ विभाग डिक्वॉय आपरेशन करने में लगा है, ताकि अगली बार यह आंकड़े बराबर स्टेज पर पहुंच जाए।
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लखनऊ में हुई थी मीटिंग
मुजफ्फरनगर। हॉल ही में लखनऊ में मीटिंग की गई थी, जिसमें अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर नकेल कसने के लिए कहा गया है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर डिक्वॉय ऑप्रेशन चलाया जाए, ताकि लिंगानुपात का ग्राफ नीचे नहीं गिर सके।
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