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वैदिक संस्कृति से ही बनेगी देश की एकता
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:30 AM IST
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वैदिक संस्कृति से ही बनेगी देश की एकता
मुजफ्फरनगर। वैदिक आश्रम सिसौली, मेरठ के संचालक स्वामी विश्वानंद सरस्वती ने कहा कि देश की एकता, शांति और उन्नति के लिए वैदिक संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों पर चलना होगा। अभिभावक बच्चों के नैतिक आचरण पर ध्यान दें।
संतोष विहार स्थित वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर स्वामी विश्वानंद सरस्वती का अंग वस्त्र और सम्मान राशि भेंट कर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। वेद गोष्ठी में स्वामी ने कहा कि संसार में वेदों का ज्ञान सबसे प्राचीन है। परमात्मा ने मानव कल्याण के लिए अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ऋषि की पवित्र आत्माओं को ज्ञान दिया था, जिन्होंने चार वेदों की रचना की। महाभारत तक विश्व में वेदानुकूल शिक्षा, आचरण और ज्ञान-विज्ञान स्थापित था। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में कर्मो का फल अवश्य मिलता है। शुभ कर्म के लिए तत्पर रहे। पुण्य की प्राप्ति के लिए मन, वचन और कर्म से सत्य व्यवहार करना चाहिए। छल, कपट, द्वेष, अन्याय, अत्याचार, पाखंड और अविद्या से बचे। स्वामी योगानंद ने कहा कि संस्कारित बच्चे परिवार और राष्ट्र का गौरव होते हैं। माता-पिता बच्चों को यज्ञ और योग से जोड़े। दिल्ली से आए कृष्ण आर्य, पवन कुमार आर्य, यशपाल सिंह, जितेंद्र आर्य, सहदेव आर्य, योगेश आर्य, मंगत आर्य, आनंदपाल आर्य, आरपी शर्मा, राजेंद्र प्रसाद आर्य, योगाचार्या सुरेंद्र पाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। वैदिक आश्रम सिसौली, मेरठ के संचालक स्वामी विश्वानंद सरस्वती ने कहा कि देश की एकता, शांति और उन्नति के लिए वैदिक संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों पर चलना होगा। अभिभावक बच्चों के नैतिक आचरण पर ध्यान दें।
संतोष विहार स्थित वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर स्वामी विश्वानंद सरस्वती का अंग वस्त्र और सम्मान राशि भेंट कर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। वेद गोष्ठी में स्वामी ने कहा कि संसार में वेदों का ज्ञान सबसे प्राचीन है। परमात्मा ने मानव कल्याण के लिए अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ऋषि की पवित्र आत्माओं को ज्ञान दिया था, जिन्होंने चार वेदों की रचना की। महाभारत तक विश्व में वेदानुकूल शिक्षा, आचरण और ज्ञान-विज्ञान स्थापित था। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जीवन में कर्मो का फल अवश्य मिलता है। शुभ कर्म के लिए तत्पर रहे। पुण्य की प्राप्ति के लिए मन, वचन और कर्म से सत्य व्यवहार करना चाहिए। छल, कपट, द्वेष, अन्याय, अत्याचार, पाखंड और अविद्या से बचे। स्वामी योगानंद ने कहा कि संस्कारित बच्चे परिवार और राष्ट्र का गौरव होते हैं। माता-पिता बच्चों को यज्ञ और योग से जोड़े। दिल्ली से आए कृष्ण आर्य, पवन कुमार आर्य, यशपाल सिंह, जितेंद्र आर्य, सहदेव आर्य, योगेश आर्य, मंगत आर्य, आनंदपाल आर्य, आरपी शर्मा, राजेंद्र प्रसाद आर्य, योगाचार्या सुरेंद्र पाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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