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शिक्षित बेटियां राष्ट्र की उन्नति का आधार: आर्य
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शिक्षित बेटियां राष्ट्र की उन्नति का आधार: आर्य
बुढ़ाना। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि बेटियां सदाचार से जीवन को चमकाएं। राष्ट्र का धन बैंकों में नहीं, बल्कि विद्यालयों में है। सुशिक्षित बेटियां समाज और राष्ट्र की उन्नति में अहम भूमिका निभा रही हैं।
खरड़ गांव स्थित किसान इंटर कालेज में आयोजित कक्षा 12 वीं के छात्र- छात्राओं के विदाई कार्यक्रम में वेदमंत्रों से यज्ञ में आहुतियां दी गई। विद्यार्थियों ने सदाचार, संस्कृति और परिश्रम से जीवन में सफल होने का संकल्प लिया। वैदिक संस्कार चेतना संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि शिक्षित बेटियां देश की उन्नति का आधार है। अभिभावक और शिक्षक बच्चों को परिश्रम, चरित्र, सेवा, अनुशासन आदि गुणों से संस्कारयुक्त बनाए। जीवन की गरिमा नैतिक मूल्यों से बढ़ती है। शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थी को सुसंस्कृत, देशभक्त और सुसंस्कारवान बनाना है। प्रधानाचार्य यशपाल सिंह आर्य ने कहा कि आदि काल से आचार्यों ने भारतीय संस्कृति का ज्ञान दिया। शिक्षक आचरणयुक्त, योग्य, विद्या से पूर्ण होगा तो छात्र-छात्राएं भी उनके जीवन से प्रेरित होते है। पाठ्यक्रम में ऋषि-मुनियों, महापुरुषों और बलिदानियों की जीवनी शामिल की जाए, जिससे भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति को जान सके। संस्था अध्यक्ष जय प्रकाश मलिक ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा बढ़ेगी, तभी परिवारों का भी विकास होगा। कन्या भ्रूण हत्या समाज पर कलंक है। शिक्षक अजय सिंह अहलावत, कपिल मलिक, प्रवेश मलिक ने भी विचार रखे।
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बुढ़ाना। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि बेटियां सदाचार से जीवन को चमकाएं। राष्ट्र का धन बैंकों में नहीं, बल्कि विद्यालयों में है। सुशिक्षित बेटियां समाज और राष्ट्र की उन्नति में अहम भूमिका निभा रही हैं।
खरड़ गांव स्थित किसान इंटर कालेज में आयोजित कक्षा 12 वीं के छात्र- छात्राओं के विदाई कार्यक्रम में वेदमंत्रों से यज्ञ में आहुतियां दी गई। विद्यार्थियों ने सदाचार, संस्कृति और परिश्रम से जीवन में सफल होने का संकल्प लिया। वैदिक संस्कार चेतना संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि शिक्षित बेटियां देश की उन्नति का आधार है। अभिभावक और शिक्षक बच्चों को परिश्रम, चरित्र, सेवा, अनुशासन आदि गुणों से संस्कारयुक्त बनाए। जीवन की गरिमा नैतिक मूल्यों से बढ़ती है। शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थी को सुसंस्कृत, देशभक्त और सुसंस्कारवान बनाना है। प्रधानाचार्य यशपाल सिंह आर्य ने कहा कि आदि काल से आचार्यों ने भारतीय संस्कृति का ज्ञान दिया। शिक्षक आचरणयुक्त, योग्य, विद्या से पूर्ण होगा तो छात्र-छात्राएं भी उनके जीवन से प्रेरित होते है। पाठ्यक्रम में ऋषि-मुनियों, महापुरुषों और बलिदानियों की जीवनी शामिल की जाए, जिससे भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति को जान सके। संस्था अध्यक्ष जय प्रकाश मलिक ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा बढ़ेगी, तभी परिवारों का भी विकास होगा। कन्या भ्रूण हत्या समाज पर कलंक है। शिक्षक अजय सिंह अहलावत, कपिल मलिक, प्रवेश मलिक ने भी विचार रखे।
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