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जिन धर्म व मुनिरक्षा का वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मनाया
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:24 AM IST
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जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया
खतौली। पीसनोपाडा जैन मंदिर में जिन धर्म एवं मुनिरक्षा का वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मांगलिक क्रियाओं के साथ आयोजित किया गया। इस धार्मिक आयोजन का संयोजन अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन ने किया। इस रक्षापर्व के अवसर पर रविवार की सुबह जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व पूजन किया गया। कल्पेंद्र जैन ने धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य समर्पित कराए।
धर्मसभा में एलाचार्य क्षमा भूषण महाराज ने कहा कि हस्तिनापुर में बनलि आदि मंत्रियों ने कपटपूर्वक राज्य ग्रहण कर अकम्पनाचार्य सहित 700 जैन मुनियों पर घोर उपसर्ग किया था, जिसे विष्णु कुमार मुनि ने दूर किया था। यह दिन श्रवण नक्षत्र श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। इस दिन अकंपनाचार्य आदि 700 मुनियों की रक्षा विष्णु कुमार द्वारा हुई। विघ्न दूर होते ही प्रजा ने खुशियां मनाई। श्रीमुनि संघ को स्वास्थ्य के अनुरूप आहार दिया, सेवा की, तभी से जैन परंपरा में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन जैन मंदिरों में श्रावक, श्राविकाएं जाकर धर्म और संस्कृति की रक्षा के संकल्पपूर्वक रक्षा सूत्र बांधते हैं। प्रवचन सभा के उपरांत श्रावक और श्राविकाओं ने मुनिश्री की आहारचर्या मीठी सेवइयों से ग्रहण कराकर कराई। भक्तों को खीर का वितरण कराया गया। यह पर्व पूर्ण उल्लास के साथ मनाया गया। सामाजिक मूल्यों की रक्षा की प्रतीज्ञा की गई। धर्मानुकूल आचरण के लिए प्रेरणा दी गई। स्वाध्याय कक्षा आयोजित की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ भजन की प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर मुकेश आढ़ती, रामकुमार, शशांक महलका, राजकुमार प्रवक्ता, विनोद, शशांक सर्राफ, हितेश, अंकित, राजेश अंबर, मनोज, पवनतार, अकलंक, अजय प्रवक्ता, अनंतवीर, कुलदीप, मदन, मृदुला, रजनी, अंजू, मणि, बबीता, अलका, अर्चना, सरला, निधि, पायल, सीमा, कविता, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
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खतौली। पीसनोपाडा जैन मंदिर में जिन धर्म एवं मुनिरक्षा का वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन मांगलिक क्रियाओं के साथ आयोजित किया गया। इस धार्मिक आयोजन का संयोजन अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन ने किया। इस रक्षापर्व के अवसर पर रविवार की सुबह जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व पूजन किया गया। कल्पेंद्र जैन ने धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य समर्पित कराए।
धर्मसभा में एलाचार्य क्षमा भूषण महाराज ने कहा कि हस्तिनापुर में बनलि आदि मंत्रियों ने कपटपूर्वक राज्य ग्रहण कर अकम्पनाचार्य सहित 700 जैन मुनियों पर घोर उपसर्ग किया था, जिसे विष्णु कुमार मुनि ने दूर किया था। यह दिन श्रवण नक्षत्र श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। इस दिन अकंपनाचार्य आदि 700 मुनियों की रक्षा विष्णु कुमार द्वारा हुई। विघ्न दूर होते ही प्रजा ने खुशियां मनाई। श्रीमुनि संघ को स्वास्थ्य के अनुरूप आहार दिया, सेवा की, तभी से जैन परंपरा में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन जैन मंदिरों में श्रावक, श्राविकाएं जाकर धर्म और संस्कृति की रक्षा के संकल्पपूर्वक रक्षा सूत्र बांधते हैं। प्रवचन सभा के उपरांत श्रावक और श्राविकाओं ने मुनिश्री की आहारचर्या मीठी सेवइयों से ग्रहण कराकर कराई। भक्तों को खीर का वितरण कराया गया। यह पर्व पूर्ण उल्लास के साथ मनाया गया। सामाजिक मूल्यों की रक्षा की प्रतीज्ञा की गई। धर्मानुकूल आचरण के लिए प्रेरणा दी गई। स्वाध्याय कक्षा आयोजित की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ भजन की प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर मुकेश आढ़ती, रामकुमार, शशांक महलका, राजकुमार प्रवक्ता, विनोद, शशांक सर्राफ, हितेश, अंकित, राजेश अंबर, मनोज, पवनतार, अकलंक, अजय प्रवक्ता, अनंतवीर, कुलदीप, मदन, मृदुला, रजनी, अंजू, मणि, बबीता, अलका, अर्चना, सरला, निधि, पायल, सीमा, कविता, नीरज प्रवक्ता आदि मौजूद रहे।
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