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गुरु का अनुभव संसार का ज्ञान कराता है-महाराज
Updated Fri, 27 Jul 2018 01:20 AM IST
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गुरु का अनुभव संसार का ज्ञान कराता है : महाराज
मोरना। शुक़्रताल स्थित उदासीन निर्वाणा आश्रम खिचड़ी वाले में गुरु पुर्णिमा की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हवन यज्ञ में आहुति प्रदान की गई। श्रद्धालुओं ने स्वामी कृपाल दास महाराज की पूजा अर्चना कर परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया।
गुरु पूजा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि गुरु का आभास मात्र से उनके आसपास के परिवेश को आश्रम तीर्थ बना देता है। गुरु का अनुभव संसार का ज्ञान कराता है। जीवन में अनुशासन का अति महत्व है। कर्म के प्रत्येक क्षेत्र में निष्ठापूर्वक रहना और सांसारिक का त्याग कर देह इंद्रियों को गुरुदेव के चरणों में समर्पित कर दें, वही योग्य शिष्य का अधिकार पाता है। गुरु विभिन्न नामों से जाना जाता है, उसका एक ही लक्ष्य होना चाहिए। लघुता को गुरुता प्रदान करना। इसी गुरु से शिष्य जगत के लिए कल्याण की याचना करता है। गुरु की कृपा के बिना हमें जीवन में सुख की अनुभूति नहीं हो सकती है। गुरु का दर्जा मां बाप से बढ़कर है। इनकी नि:स्वार्थ भाव से जितनी सेवा की जाए कम है। इस मौके पर स्वामी समंदर दास महाराज, स्वामी सूरजदास महाराज, स्वामी श्रवण दास महाराज, स्वामी श्रुतिदास महाराज, स्वामी पूर्णादास महाराज आदि ने प्रवचन कर सतगुरु की महिमा का ज्ञान कराया। इस दौरान प्रदीप कुमार, अशोक, मामचंद शर्मा, आशीष सोनी, अरविंद, सुरेंद्र शर्मा, राजीव सिंह, काले, जसबीर, आचंल, विमला, सत्तो, किरण, मुन्नी, केलाशो, सरिता आदि ने गुरु पूजा में भाग लेकर साधु संतों से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर हलवे का प्रसाद वितरण किया गया।
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मोरना। शुक़्रताल स्थित उदासीन निर्वाणा आश्रम खिचड़ी वाले में गुरु पुर्णिमा की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हवन यज्ञ में आहुति प्रदान की गई। श्रद्धालुओं ने स्वामी कृपाल दास महाराज की पूजा अर्चना कर परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद लिया।
गुरु पूजा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि गुरु का आभास मात्र से उनके आसपास के परिवेश को आश्रम तीर्थ बना देता है। गुरु का अनुभव संसार का ज्ञान कराता है। जीवन में अनुशासन का अति महत्व है। कर्म के प्रत्येक क्षेत्र में निष्ठापूर्वक रहना और सांसारिक का त्याग कर देह इंद्रियों को गुरुदेव के चरणों में समर्पित कर दें, वही योग्य शिष्य का अधिकार पाता है। गुरु विभिन्न नामों से जाना जाता है, उसका एक ही लक्ष्य होना चाहिए। लघुता को गुरुता प्रदान करना। इसी गुरु से शिष्य जगत के लिए कल्याण की याचना करता है। गुरु की कृपा के बिना हमें जीवन में सुख की अनुभूति नहीं हो सकती है। गुरु का दर्जा मां बाप से बढ़कर है। इनकी नि:स्वार्थ भाव से जितनी सेवा की जाए कम है। इस मौके पर स्वामी समंदर दास महाराज, स्वामी सूरजदास महाराज, स्वामी श्रवण दास महाराज, स्वामी श्रुतिदास महाराज, स्वामी पूर्णादास महाराज आदि ने प्रवचन कर सतगुरु की महिमा का ज्ञान कराया। इस दौरान प्रदीप कुमार, अशोक, मामचंद शर्मा, आशीष सोनी, अरविंद, सुरेंद्र शर्मा, राजीव सिंह, काले, जसबीर, आचंल, विमला, सत्तो, किरण, मुन्नी, केलाशो, सरिता आदि ने गुरु पूजा में भाग लेकर साधु संतों से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर हलवे का प्रसाद वितरण किया गया।
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