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सत्यमार्ग में ही जीवन का आनंद: ओमानंद
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:02 AM IST
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सत्यमार्ग में ही जीवन का आनंद: स्वामी ओमानंद
मोरना (मुजफ्फरनगर)। धर्मनगरी स्थित विश्वकर्मा धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी ओमानंद महाराज ने आचार्य हरितीर्थ महाराज को पटका पहनाकर ग्रंथ भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को सत्यमार्ग पर चलना चाहिए। सत्यमार्ग पर चलकर मनुष्य कभी अवसादग्रस्त नहीं होता और आनंदमय जीवन व्यतीत करता है।
स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भोग विलासी मनुष्य मन ही मन विचलित रहता है। उसके द्वारा किए गए कार्यों में भी आनंद प्राप्त नहीं होता। संतों के आचरण से ही मनुष्य को उच्च संगत प्राप्त होती है। परिवार को भी उच्च संस्कार प्राप्त होते हैं। अवसाद से मुक्ति पाने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग संतों का सानिध्य और शास्त्रों का अध्ययन कर धर्मकार्य कर मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति करता है। आधुनिक जीवन में जहां मनुष्य भौतिक सुख संसाधनों की ओर जा रहा है, वहीं उसे प्राचीन भारतीय संस्कृति व शास्त्रों का अनुसरण कर शारीरिक, बौद्धिक व आत्मिक शांति का अनुभव होता है। आचार्य हरितीर्थ महाराज ने भागवत कथा करते हुए कहा कि पाप को कभी छिपाना नहीं चाहिए, जो पाप को छिपाता है, उसके मन में पाप घर करता है और फिर से पाप करता है। जिस दिन पाप हो उसी साधु-संतों को बुलाओ, पूजा करो। पाप को प्रकट करने से पाप से मुक्ति मिलती है। जगत में गुरु जल्दी मिलते हैं। शब्द से जो ज्ञान का उपदेश करता है, उसको गुरु कहते हैं। ओम तत और सत्य तीन भगवान के नाम हैं। पाप से मरण बिगड़ता है। साधारण पाप मानव करता है। भगवान बड़े उदार हैं, क्षमा कर देेते हैं। आप बहुत प्रेम से भागवत की कथा को सुनते हो। भगवान के नाम का जाप करते हो। भगवान की कथा में भगवान के नाम में पाप को नष्ट करने की शक्ति है। वहीं, जगतगुरु चैतन्य तीर्थ महाराज पीठाधीश्वर हंसतीर्थ के सान्निध्य में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्मलाभ कमाया। संचालन आचार्य ज्ञान हरितीर्थ महाराज ने किया। कथा के आयोजन में जयचंद्र भदौरिया इटावा, सरला बुआजी, संदीप राणा आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। कथा सुनने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान पलवल, इटावा, रामगढ़, मथुरा, जट्टारी, अलवर, गुजरात आदि स्थानों से आए श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। इस मौके पर भंडारे के प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। धर्मनगरी स्थित विश्वकर्मा धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी ओमानंद महाराज ने आचार्य हरितीर्थ महाराज को पटका पहनाकर ग्रंथ भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को सत्यमार्ग पर चलना चाहिए। सत्यमार्ग पर चलकर मनुष्य कभी अवसादग्रस्त नहीं होता और आनंदमय जीवन व्यतीत करता है।
स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भोग विलासी मनुष्य मन ही मन विचलित रहता है। उसके द्वारा किए गए कार्यों में भी आनंद प्राप्त नहीं होता। संतों के आचरण से ही मनुष्य को उच्च संगत प्राप्त होती है। परिवार को भी उच्च संस्कार प्राप्त होते हैं। अवसाद से मुक्ति पाने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग संतों का सानिध्य और शास्त्रों का अध्ययन कर धर्मकार्य कर मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति करता है। आधुनिक जीवन में जहां मनुष्य भौतिक सुख संसाधनों की ओर जा रहा है, वहीं उसे प्राचीन भारतीय संस्कृति व शास्त्रों का अनुसरण कर शारीरिक, बौद्धिक व आत्मिक शांति का अनुभव होता है। आचार्य हरितीर्थ महाराज ने भागवत कथा करते हुए कहा कि पाप को कभी छिपाना नहीं चाहिए, जो पाप को छिपाता है, उसके मन में पाप घर करता है और फिर से पाप करता है। जिस दिन पाप हो उसी साधु-संतों को बुलाओ, पूजा करो। पाप को प्रकट करने से पाप से मुक्ति मिलती है। जगत में गुरु जल्दी मिलते हैं। शब्द से जो ज्ञान का उपदेश करता है, उसको गुरु कहते हैं। ओम तत और सत्य तीन भगवान के नाम हैं। पाप से मरण बिगड़ता है। साधारण पाप मानव करता है। भगवान बड़े उदार हैं, क्षमा कर देेते हैं। आप बहुत प्रेम से भागवत की कथा को सुनते हो। भगवान के नाम का जाप करते हो। भगवान की कथा में भगवान के नाम में पाप को नष्ट करने की शक्ति है। वहीं, जगतगुरु चैतन्य तीर्थ महाराज पीठाधीश्वर हंसतीर्थ के सान्निध्य में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्मलाभ कमाया। संचालन आचार्य ज्ञान हरितीर्थ महाराज ने किया। कथा के आयोजन में जयचंद्र भदौरिया इटावा, सरला बुआजी, संदीप राणा आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। कथा सुनने के लिए दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान पलवल, इटावा, रामगढ़, मथुरा, जट्टारी, अलवर, गुजरात आदि स्थानों से आए श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। इस मौके पर भंडारे के प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।
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