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प्राणायाम और ध्यान का महत्व समझाया
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:08 AM IST
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प्राणायाम और ध्यान का महत्व समझाया
मुजफ्फरनगर। ग्रीनलैंड माडर्न जूनियर हाईस्कूल में चल रहे बालक एवं बालिका चरित्र निर्माण योग शिविर में बच्चों को विभिन्न आसन कराए गए। इसके साथ ही प्राणायाम और ध्यान का महत्व बताया गया।
भारतीय योग संस्थान के जिला प्रधान पवन सिंह बालियान और सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने बच्चों को विशेष आसन यधा वृक्षासन, पश्चिमोत्तान आसन, उष्टरासन, अर्द्ध मत्स्येन्द्र आसन, आकर्ण धनुरासन, धनुरासन, चक्रासन, मत्स्य आसन व बद्ध पदमासन् कराए। कहा कि संतोष का मतलब आलसी बनना नहीं है। संतोष का अर्थ होता हैं कि हम पूर्ण पुरुषार्थ करें और फल ईश्वर पर छोड़ दें। तप का अर्थ है कि हम अपने अंदर से बुराई को खत्म करें और अच्छाई को ग्रहण करें।
स्वाध्याय का अर्थ होता हैं कि हम प्रतिदिन अपना स्वयं का अध्ययन करे देखें कि आज मैंने कितने कार्य किए हैं, उनमें कितनी कमियां रह गईं। उन कमियों को दूर करने का संकल्प लें। ईश्वर प्रणिधान का अर्थ होता हैं कि हम अपने प्रत्येक कार्य को ईश्वर को साक्षी मानकर करें। ईश्वर सर्वव्यापक है। ईश्वर की दृष्टि से हम बच नहीं सकते। अत: सदैव अच्छे व शुभ कर्म करें।
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मुजफ्फरनगर। ग्रीनलैंड माडर्न जूनियर हाईस्कूल में चल रहे बालक एवं बालिका चरित्र निर्माण योग शिविर में बच्चों को विभिन्न आसन कराए गए। इसके साथ ही प्राणायाम और ध्यान का महत्व बताया गया।
भारतीय योग संस्थान के जिला प्रधान पवन सिंह बालियान और सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने बच्चों को विशेष आसन यधा वृक्षासन, पश्चिमोत्तान आसन, उष्टरासन, अर्द्ध मत्स्येन्द्र आसन, आकर्ण धनुरासन, धनुरासन, चक्रासन, मत्स्य आसन व बद्ध पदमासन् कराए। कहा कि संतोष का मतलब आलसी बनना नहीं है। संतोष का अर्थ होता हैं कि हम पूर्ण पुरुषार्थ करें और फल ईश्वर पर छोड़ दें। तप का अर्थ है कि हम अपने अंदर से बुराई को खत्म करें और अच्छाई को ग्रहण करें।
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स्वाध्याय का अर्थ होता हैं कि हम प्रतिदिन अपना स्वयं का अध्ययन करे देखें कि आज मैंने कितने कार्य किए हैं, उनमें कितनी कमियां रह गईं। उन कमियों को दूर करने का संकल्प लें। ईश्वर प्रणिधान का अर्थ होता हैं कि हम अपने प्रत्येक कार्य को ईश्वर को साक्षी मानकर करें। ईश्वर सर्वव्यापक है। ईश्वर की दृष्टि से हम बच नहीं सकते। अत: सदैव अच्छे व शुभ कर्म करें।
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