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स्वामी भीष्म ने जगाई थी क्रांति की अलख
Updated Sat, 23 Jun 2018 12:20 AM IST
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मुजफ्फरनगर। संस्कार चेतना अभियान के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में स्वामी भीष्म की अहम भूमिका थी। उनका जीवन समाज सुधार आंदोलन को समर्पित रहा।
संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के घरौंडा से पधारे वेद प्रचारक शिवकुमार आर्य का अभिनंदन किया गया। आर्य समाज के पदाधिकारियों ने स्वामी भीष्म की अमूल्य राष्ट्र सेवाओं को याद किया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, लाल बहादुर शास्त्री जैसे देशभक्त स्वामी भीष्म के निकट रहे। उन्होंने 85 भजन मंडली तैयार कर गांव-गांव में आजादी आंदोलन का बिगुल बजाया। उनके गाजियाबाद के करहेड़ा हिंडन आश्रम पर क्रांतिकारी जुटते थे। वर्ष 1936 में स्वामी भीष्म ने घरौंडा , करनाल को क्रांति केंद्र बना दिया। आर्य समाज नई मंडी के पूर्व मंत्री आरपी शर्मा ने कहा कि पाखंड, कुरीतियों, अंधविश्वास के विरुद्ध समाज में चेतना जगाई। गुरुकुल, गौ पालन, योगासन और पहलवानी से युवाओं को जोड़ा।
अधिवक्ता जगदीश प्रसाद त्यागी ने कहा कि स्वामी भीष्म सच्चे देशभक्त और वीर रस के कवि थे। उन्होंने 250 भजनों की पुस्तकें लिखी। स्वामी भीष्म वैदिक धर्म प्रचार संगठन अध्यक्ष शिव कुमार आर्य ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के लिए प्रेरणासोत्र रहा। उनका 125 वर्ष का दीर्घायु जीवन रहा। अनेक विश्व विद्यालयों में उनके जीवन पर शोध हुए। आनंदपाल सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, पूर्व प्रवक्ता मंगत सिंह आर्य, सोमपाल आर्य, राजेंद्र सिंह, गोपाल स्वरूप आर्य, वरिष्ठ पत्रकार गोविंद वर्मा, विजय कुमार आर्य मौजूद रहे।
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संतोष विहार में वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के घरौंडा से पधारे वेद प्रचारक शिवकुमार आर्य का अभिनंदन किया गया। आर्य समाज के पदाधिकारियों ने स्वामी भीष्म की अमूल्य राष्ट्र सेवाओं को याद किया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान, लाल बहादुर शास्त्री जैसे देशभक्त स्वामी भीष्म के निकट रहे। उन्होंने 85 भजन मंडली तैयार कर गांव-गांव में आजादी आंदोलन का बिगुल बजाया। उनके गाजियाबाद के करहेड़ा हिंडन आश्रम पर क्रांतिकारी जुटते थे। वर्ष 1936 में स्वामी भीष्म ने घरौंडा , करनाल को क्रांति केंद्र बना दिया। आर्य समाज नई मंडी के पूर्व मंत्री आरपी शर्मा ने कहा कि पाखंड, कुरीतियों, अंधविश्वास के विरुद्ध समाज में चेतना जगाई। गुरुकुल, गौ पालन, योगासन और पहलवानी से युवाओं को जोड़ा।
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अधिवक्ता जगदीश प्रसाद त्यागी ने कहा कि स्वामी भीष्म सच्चे देशभक्त और वीर रस के कवि थे। उन्होंने 250 भजनों की पुस्तकें लिखी। स्वामी भीष्म वैदिक धर्म प्रचार संगठन अध्यक्ष शिव कुमार आर्य ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के लिए प्रेरणासोत्र रहा। उनका 125 वर्ष का दीर्घायु जीवन रहा। अनेक विश्व विद्यालयों में उनके जीवन पर शोध हुए। आनंदपाल सिंह, पुष्पेंद्र कुमार, पूर्व प्रवक्ता मंगत सिंह आर्य, सोमपाल आर्य, राजेंद्र सिंह, गोपाल स्वरूप आर्य, वरिष्ठ पत्रकार गोविंद वर्मा, विजय कुमार आर्य मौजूद रहे।
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