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चुनाव में वैश्य मतों को लेकर खींचतान
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:38 AM IST
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चुनाव में वैश्य मतों को लेकर खींचतान
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वैश्य समाज के मतों को लेकर सियासी दलों में खींचतान मची है। शहर में मुस्लिमों के बाद वैश्य मतदाताओं की सबसे बड़ी तादाद है, इसलिए भाजपा, सपा और कांग्रेस की निगाहें इन पर टिकी हैैं। भाजपा के पक्ष में वैश्य मतों को साधने के लिए शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में हार-जीत के लिए कांटे का संघर्ष दिख रहा है। पहली बार सीट महिला के लिए आरक्षित हुई है। अभी तक सिर्फ दो बार गैर वैश्य पालिका के चेयरमैन चुने गए हैं, जिनमें डॉ सुभाष चंद शर्मा और जगदीश भाटिया शामिल हैं। इनके अलावा हमेशा अध्यक्ष पद पर वैश्य समाज की ताजपोशी रही है। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही वैश्य मतों को लेकर सियासी दलों में घमासान मचा है। मतों के लिहाज से मुस्लिम के बाद सबसे बड़ी संख्या वैश्य मतदाताओं की है। बीते दो विधानसभा चुनाव में शहर सीट पर भाजपा की जीत में वैश्य मतों की अहम भूमिका रही है, जिसकी वजह से कपिलदेव अग्रवाल लगातार दूसरी बार एमएलए हैं। बदले परिदृश्य में भाजपा के हक में वैश्य मतों को पार्टी प्रत्याशी सुधाराज शर्मा के पक्ष में साधे रखना कपिलदेव के लिए चुनौती है। कांग्रेस के टिकट पर पंकज अग्रवाल पिछली बार चेयरमैन बने थे। अबकी बार उन्होंने अपनी चाची अंजू अग्रवाल को चुनाव में उतारा है। कांग्रेस का पूरा दारोमदार वैश्य मतों के रुख पर है। सपा के टिकट पर शहर सीट से चुनाव लड़ चुके सूबे के पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप पर इस वक्त जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी है। संगठन से सलाह-मशविरे के बाद सपा ने पूर्व विधायक मिथलेश पाल को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पक्ष में वैश्य मतों को लाने के लिए गौरव स्वरूप पर निगाहें लगी हैं। यह देखने की बात होगी कि 26 नवंबर को मतदान के लिए भाजपा, सपा और कांग्रेस वैश्य मतों में कितनी सेंधमारी कर पाएंगी।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वैश्य समाज के मतों को लेकर सियासी दलों में खींचतान मची है। शहर में मुस्लिमों के बाद वैश्य मतदाताओं की सबसे बड़ी तादाद है, इसलिए भाजपा, सपा और कांग्रेस की निगाहें इन पर टिकी हैैं। भाजपा के पक्ष में वैश्य मतों को साधने के लिए शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में हार-जीत के लिए कांटे का संघर्ष दिख रहा है। पहली बार सीट महिला के लिए आरक्षित हुई है। अभी तक सिर्फ दो बार गैर वैश्य पालिका के चेयरमैन चुने गए हैं, जिनमें डॉ सुभाष चंद शर्मा और जगदीश भाटिया शामिल हैं। इनके अलावा हमेशा अध्यक्ष पद पर वैश्य समाज की ताजपोशी रही है। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही वैश्य मतों को लेकर सियासी दलों में घमासान मचा है। मतों के लिहाज से मुस्लिम के बाद सबसे बड़ी संख्या वैश्य मतदाताओं की है। बीते दो विधानसभा चुनाव में शहर सीट पर भाजपा की जीत में वैश्य मतों की अहम भूमिका रही है, जिसकी वजह से कपिलदेव अग्रवाल लगातार दूसरी बार एमएलए हैं। बदले परिदृश्य में भाजपा के हक में वैश्य मतों को पार्टी प्रत्याशी सुधाराज शर्मा के पक्ष में साधे रखना कपिलदेव के लिए चुनौती है। कांग्रेस के टिकट पर पंकज अग्रवाल पिछली बार चेयरमैन बने थे। अबकी बार उन्होंने अपनी चाची अंजू अग्रवाल को चुनाव में उतारा है। कांग्रेस का पूरा दारोमदार वैश्य मतों के रुख पर है। सपा के टिकट पर शहर सीट से चुनाव लड़ चुके सूबे के पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे गौरव स्वरूप पर इस वक्त जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी है। संगठन से सलाह-मशविरे के बाद सपा ने पूर्व विधायक मिथलेश पाल को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पक्ष में वैश्य मतों को लाने के लिए गौरव स्वरूप पर निगाहें लगी हैं। यह देखने की बात होगी कि 26 नवंबर को मतदान के लिए भाजपा, सपा और कांग्रेस वैश्य मतों में कितनी सेंधमारी कर पाएंगी।
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