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बुखार की महामारी से फैली दहशत
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:38 AM IST
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मोरना। क्षेत्र में महामारी का रूप ले चुके जानलेवा बुखार ने कई जिंदगियों को मौत की नींद सुला दिया है। जिसके चलते चारों ओर दहशत का माहौल है। चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में मरीजों का इलाज निजी चारपाइयों पर किया जा रहा है। मुफ्त चिकित्सा प्रदान करने वाला स्वास्थ्य विभाग भी महामारी को लेकर मूकदर्शक बना हुआ है।
मोरना, भोपा क्षेत्र के गांवों में बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ठंड बढ़ जाने के बावजूद बुखार के मरीजों में कोई कमी नहीं आ रही है। झोलाछाप डॉक्टरों से लेकर नर्सिंगहोम मरीजों से भरे हुए हैं। मरीजों के लिए बेड और कमरों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। जिसके चलते मरीज स्वयं की चारपाई लाकर नर्सिंगहोम के आसपास के मकानों, बरामदों में अपना इलाज कराने को मजबूर है। ग्राम प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष चंद्रवीर राठी ने बताया कि उन्होंने बुखार की समस्या को लेकर कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी को अवगत कराया है, किंतु स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं का स्प्रे नहीं हो रहा है तथा बुखार का कोई टीका आदि नागरिकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोरना के प्रभारी चिकित्सक डा. संजीव कुमार ने बताया कि मलेरिया की जांच और दवा का वितरण सरकारी अस्पताल में किया जाता है। गंभीर रूप से बीमार को अस्पताल में भर्ती कर उसका इलाज किया जाता है। स्टाफ की कमी के कारण अस्पतालों पर दबाव है।
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मोरना, भोपा क्षेत्र के गांवों में बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ठंड बढ़ जाने के बावजूद बुखार के मरीजों में कोई कमी नहीं आ रही है। झोलाछाप डॉक्टरों से लेकर नर्सिंगहोम मरीजों से भरे हुए हैं। मरीजों के लिए बेड और कमरों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। जिसके चलते मरीज स्वयं की चारपाई लाकर नर्सिंगहोम के आसपास के मकानों, बरामदों में अपना इलाज कराने को मजबूर है। ग्राम प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष चंद्रवीर राठी ने बताया कि उन्होंने बुखार की समस्या को लेकर कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी को अवगत कराया है, किंतु स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
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क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं का स्प्रे नहीं हो रहा है तथा बुखार का कोई टीका आदि नागरिकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोरना के प्रभारी चिकित्सक डा. संजीव कुमार ने बताया कि मलेरिया की जांच और दवा का वितरण सरकारी अस्पताल में किया जाता है। गंभीर रूप से बीमार को अस्पताल में भर्ती कर उसका इलाज किया जाता है। स्टाफ की कमी के कारण अस्पतालों पर दबाव है।
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