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निरंतर प्रयत्न से मिलती है कामयाबी : रागिनी
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निरंतर प्रयत्न से मिलती है कामयाबी : रागिनी
मुजफ्फरनगर। उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा एचजेएस के घोषित रिजल्ट में एडीजे पद के लिए चयनित जिले की रागिनी सिसौदिया मानती हैं कि निरंतर प्रयत्न से ही कामयाबी मिलती है। गुरु का सही मार्गदर्शन राह आसान बनाता है। पीसीएस (जे) की परीक्षा तीन बार उत्तीर्ण की, मगर साक्षात्कार में विफलता मिली। बुलंद हौसले से निरंतर प्रयत्नशील रहने की बदौलत उन्होंने यूपी हायर जुडिशयल सर्विस की कठिन परीक्षा में सफलता का गौरव पा लिया है। जनपद न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस कर चुकी रागिनी से अमर उजाला ने बातचीत की। प्रस्तुत है मुख्य अंश:
आप, ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी और यूपी बोर्ड से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। कैसे न्यायिक सेवा को चुना। गांव की बेटियों को कोई संदेश ?
नसीरपुर गांव में परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। एकाग्रता और लगन से 12वीं तक की पढ़ाई ग्रामीण शिक्षण संस्थाओं से की। वकील पिता कंवरपाल सिंह को देख बचपन में ही कोर्ट में अधिवक्ता के कार्य ने प्रेरित किया। यूपी बोर्ड में विद्यार्थी को परिश्रम की आदत पड़ जाती है। गांव की बेटियां शिक्षा में निरंतर प्रयत्नशील रहे, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। पीसीएस जे में लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद इंटरव्यू में नाकामी से निराशा नहीं हुई।
कैसे कि एचजेएस की मुश्किल परीक्षा की तैयारी।
पीसीएस जे की गहनता से तैयारी की, मगर तीन प्रयास में साक्षात्कार में चूक गई। मेरी वही तैयारी एचजेएस की परीक्षा में सफलता का आधार बनी। दिसंबर, 2018 में एग्जाम हुआ था, 18, 19 मार्च को इंटरव्यू लिए गए।
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शादी के 9 साल बाद आप एडीजे पद पर चयनित हुई हैं। दो बच्चों की परवरिश के साथ लक्ष्य पाने में दिक्कतें आईं ?
- विवाह से पहले ही मेरठ कालेज, मेरठ से एलएलएम कर लिया था और पीसीएस जे की तैयारी भी। एचजेएस की परीक्षा का समय मिला तो दोहराती रही। कानून के नए संशोधन और कोर्ट के अहम फैसले देखती रही। परिवार का हर कदम पर सहयोग मिला।
न्यायिक सेवा को कैरियर बनाने को युवाओं की तादाद बढ़ी है। छात्राएं भी एलएलबी कोर्स के प्रति गंभीर हैं। अपनी तैयारी से जुड़ी कोई बात जो बताना चाहेंगी ?
- मेरे गुरु ऋषिपाल परिहार को कामयाबी का श्रेय है, जिनकी प्रेरणा से कुछ पाने की ललक कायम रही। उन्होंने प्रत्येक टॉपिक का अध्ययन गहराई से कराया। भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संविदा अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम पर मुख्य फोकस किया । न्यायिक सेवा में गांव और छोटे शहरों के युवाओं के आने से न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ना है।
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मुजफ्फरनगर। उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा एचजेएस के घोषित रिजल्ट में एडीजे पद के लिए चयनित जिले की रागिनी सिसौदिया मानती हैं कि निरंतर प्रयत्न से ही कामयाबी मिलती है। गुरु का सही मार्गदर्शन राह आसान बनाता है। पीसीएस (जे) की परीक्षा तीन बार उत्तीर्ण की, मगर साक्षात्कार में विफलता मिली। बुलंद हौसले से निरंतर प्रयत्नशील रहने की बदौलत उन्होंने यूपी हायर जुडिशयल सर्विस की कठिन परीक्षा में सफलता का गौरव पा लिया है। जनपद न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस कर चुकी रागिनी से अमर उजाला ने बातचीत की। प्रस्तुत है मुख्य अंश:
आप, ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी और यूपी बोर्ड से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। कैसे न्यायिक सेवा को चुना। गांव की बेटियों को कोई संदेश ?
नसीरपुर गांव में परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। एकाग्रता और लगन से 12वीं तक की पढ़ाई ग्रामीण शिक्षण संस्थाओं से की। वकील पिता कंवरपाल सिंह को देख बचपन में ही कोर्ट में अधिवक्ता के कार्य ने प्रेरित किया। यूपी बोर्ड में विद्यार्थी को परिश्रम की आदत पड़ जाती है। गांव की बेटियां शिक्षा में निरंतर प्रयत्नशील रहे, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। पीसीएस जे में लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद इंटरव्यू में नाकामी से निराशा नहीं हुई।
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कैसे कि एचजेएस की मुश्किल परीक्षा की तैयारी।
पीसीएस जे की गहनता से तैयारी की, मगर तीन प्रयास में साक्षात्कार में चूक गई। मेरी वही तैयारी एचजेएस की परीक्षा में सफलता का आधार बनी। दिसंबर, 2018 में एग्जाम हुआ था, 18, 19 मार्च को इंटरव्यू लिए गए।
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शादी के 9 साल बाद आप एडीजे पद पर चयनित हुई हैं। दो बच्चों की परवरिश के साथ लक्ष्य पाने में दिक्कतें आईं ?
- विवाह से पहले ही मेरठ कालेज, मेरठ से एलएलएम कर लिया था और पीसीएस जे की तैयारी भी। एचजेएस की परीक्षा का समय मिला तो दोहराती रही। कानून के नए संशोधन और कोर्ट के अहम फैसले देखती रही। परिवार का हर कदम पर सहयोग मिला।
न्यायिक सेवा को कैरियर बनाने को युवाओं की तादाद बढ़ी है। छात्राएं भी एलएलबी कोर्स के प्रति गंभीर हैं। अपनी तैयारी से जुड़ी कोई बात जो बताना चाहेंगी ?
- मेरे गुरु ऋषिपाल परिहार को कामयाबी का श्रेय है, जिनकी प्रेरणा से कुछ पाने की ललक कायम रही। उन्होंने प्रत्येक टॉपिक का अध्ययन गहराई से कराया। भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संविदा अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम पर मुख्य फोकस किया । न्यायिक सेवा में गांव और छोटे शहरों के युवाओं के आने से न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ना है।