{"_id":"59bd79e14f1c1b38688b4e6f","slug":"181505589729-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसली ऋण माफी पर असमंजस में किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसली ऋण माफी पर असमंजस में किसान
Updated Sun, 17 Sep 2017 12:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फसली ऋण माफी पर असमंजस में किसान
मुजफ्फरनगर। फसली ऋण माफी योजना से जहां कुछ किसानों को लाभ हुआ है, वहीं बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो सूची में आने के बाद भी बाहर हो गए हैं। किसानों की जो सूची तैयार की गई थी, आखिर में उसके 20 प्रतिशत किसान की योजना की पात्रता तक पहुंच पाए हैं। किसान नेता सरकार की योजना में लोचा बता रहे हैं। सहकारी बैंकों के उन बुजुर्ग किसानों को तो लाभ मिल ही नहीं पाएगा, जिनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है।
प्रदेश सरकार की फसली ऋण माफी योजना के लिए जिला प्रशासन ने सभी बैंकों से जो डाटा तैयार किया था, उसके अनुसार एक लाख 26 हजार 401 किसान ऋण माफी की परिधि में आए थे। इन किसानों की जांच हुई तो पता चला कि 50 प्रतिशत किसान इनमें पैसा जमा कर दोबारा ले चुके हैं। ऐसे किसानों को योजना का लाभ नही मिलेगा। जिन किसानों ने दो बैंकों से पैसा लिया है, उन्हें लाभ नहीं मिलेगा। जिनके खाते आधार से लिंक नहीं है उन्हें लाभ नहीं मिलेगा। प्रशासन ने जो अपनी जांच के बाद जो सूची तैयार की उसमें लगभग 35 हजार किसान सामने आए। इन किसानों का भी सभी प्रकार का वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। वेरिफिकेशन के बाद पहली सूची में 11147 किसानों को शामिल किया गया। इनमें से पांच हजार किसानों को जीआईसी के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में ऋण मोचन प्रमाण पत्र जिले के प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने दिए। बाकी को तहसील स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि दूसरी सूची तैयार हो रही है, जल्द ही यह सूची शासन को भेज दी जाएगी। शासन से किसानों के खातों में पैसा सीधे जारी कर दिया जाएगा।
फसली ऋण माफी योजना में जो पहली सूची जारी हुई है, उसमें सैकड़ों लोग ऐसे है, जिनका 100 रुपए से कम ही माफ हुआ है। सहकारी बैंक के दस हजार किसान पात्रता की श्रेणी में है, लेकिन समितियों में बुजुर्ग किसानों के खाते होने और उनका अधिक उम्र होने के कारण आधार कार्ड नहीं बन पाने से उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार को साफ नीति अपनानी चाहिए। सभी किसानों का एक लाख माफ करे। किसानों को काटने के फार्मुले निकाले जा रहे हैं। किसी को डबल खाते के नाम पर किसी को आधार लिंक न होने के नाम पर बाहर किया जा रहा है। पूर्व सांसद एवं किसान नेता हरेंद्र मलिक कहते हैं कि उनमें पास ऐसे बहुत से लोग आए है, जिनके एक सौ रुपये से कम माफ हुए। सरकार जो लाभ दे रही है, वह सबको मिलना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। फसली ऋण माफी योजना से जहां कुछ किसानों को लाभ हुआ है, वहीं बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो सूची में आने के बाद भी बाहर हो गए हैं। किसानों की जो सूची तैयार की गई थी, आखिर में उसके 20 प्रतिशत किसान की योजना की पात्रता तक पहुंच पाए हैं। किसान नेता सरकार की योजना में लोचा बता रहे हैं। सहकारी बैंकों के उन बुजुर्ग किसानों को तो लाभ मिल ही नहीं पाएगा, जिनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है।
प्रदेश सरकार की फसली ऋण माफी योजना के लिए जिला प्रशासन ने सभी बैंकों से जो डाटा तैयार किया था, उसके अनुसार एक लाख 26 हजार 401 किसान ऋण माफी की परिधि में आए थे। इन किसानों की जांच हुई तो पता चला कि 50 प्रतिशत किसान इनमें पैसा जमा कर दोबारा ले चुके हैं। ऐसे किसानों को योजना का लाभ नही मिलेगा। जिन किसानों ने दो बैंकों से पैसा लिया है, उन्हें लाभ नहीं मिलेगा। जिनके खाते आधार से लिंक नहीं है उन्हें लाभ नहीं मिलेगा। प्रशासन ने जो अपनी जांच के बाद जो सूची तैयार की उसमें लगभग 35 हजार किसान सामने आए। इन किसानों का भी सभी प्रकार का वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। वेरिफिकेशन के बाद पहली सूची में 11147 किसानों को शामिल किया गया। इनमें से पांच हजार किसानों को जीआईसी के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में ऋण मोचन प्रमाण पत्र जिले के प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने दिए। बाकी को तहसील स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि दूसरी सूची तैयार हो रही है, जल्द ही यह सूची शासन को भेज दी जाएगी। शासन से किसानों के खातों में पैसा सीधे जारी कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
फसली ऋण माफी योजना में जो पहली सूची जारी हुई है, उसमें सैकड़ों लोग ऐसे है, जिनका 100 रुपए से कम ही माफ हुआ है। सहकारी बैंक के दस हजार किसान पात्रता की श्रेणी में है, लेकिन समितियों में बुजुर्ग किसानों के खाते होने और उनका अधिक उम्र होने के कारण आधार कार्ड नहीं बन पाने से उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार को साफ नीति अपनानी चाहिए। सभी किसानों का एक लाख माफ करे। किसानों को काटने के फार्मुले निकाले जा रहे हैं। किसी को डबल खाते के नाम पर किसी को आधार लिंक न होने के नाम पर बाहर किया जा रहा है। पूर्व सांसद एवं किसान नेता हरेंद्र मलिक कहते हैं कि उनमें पास ऐसे बहुत से लोग आए है, जिनके एक सौ रुपये से कम माफ हुए। सरकार जो लाभ दे रही है, वह सबको मिलना चाहिए।
विज्ञापन