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कीमती वक्त की कद्र करें छात्र, पढ़ाई पर ध्यान दें: फरीदुद्दीन
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देवबंद (सहारनपुर)। मदरसा जामिया हुसैनिया में वार्षिक समारोह धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में उलमा ने 40 छात्रों की दस्तारबंदी करते हुए छात्रों से मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ तालीम हासिल करने का आह्वान किया।
मोहल्ला अबुलमाली (शाहवीलायत) में स्थित मदरसे में आयोजित हुए कार्यक्रम में दारुल उलूम के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना फरीदुद्दीन कासमी ने कहा कि छात्रों को अपने कीमती वक्त की कद्र करनी चाहिए और अपना समय पढ़ाई में गुजारना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को चाहिए कि वह बुराईयों से दूर रहकर मेहनत, लगन और पूरी ईमानदारी के साथ अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए दीन-ए-इल्म हासिल करें। मौलाना शमशाद रहमानी ने कहा कि मदरसा छात्र कौम की अमानत है। इसलिए छात्रों की जिम्मेदारी बनती है कि वह तालीम हासिल कर पूरी दुनिया में कुरआन व हदीस की तालीम को आम करें। मदरसा के संस्थापक मौलाना अहमद नसर बनारसी ने छत्रों को बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलने और उस्तादों की इज्जत करने की नसीहत दी। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती जुनैद कासमी ने कहा कि छात्र जिस उद्देश्य के लिए यहां आए हैं उसी पर ध्यान केंद्रित करें और फिजूल कामों से बचें। कार्यक्रम में उलमा ने हफ्तुम, हिफ्ज और इफ्ता कक्षा के 40 छात्रों की दस्तारबंदी की। अंत में अध्यक्षता कर रहे मौलाना अहमद नसर ने छात्रों ने उज्ज्वल भविष्य और मुल्क में अमनो अमान के लिए दुआ कराई। संचालन कारी अब्दुल हक ने किया। इस मौके पर मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी, मौलाना अजीमुल्लाह, मुफ्ती जरीफुर्रहमान, मुफ्ती जाहिद, मुफ्ती सलमान, कारी असरार, कारी ऐजाजुलहक, मौलाना मोहम्मद अहमद आदि मौजूद रहे।
जामिया कुदसियात में छात्राओं को पढ़ाया बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ (फोटो संख्या 2, 2ए)
देवबंद। मदरसा जामिया कुदसियात अल इस्लामिया लिल बनात में खत्म बुखारी शरीफ का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया गया।
मोहल्ला गुज्जरवाड़ा में स्थित मदरसे में हुए कार्यक्रम में दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि दीनी तालीम हासिल करने वाली छात्राओं की जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज सुधार का काम करें और सुन्नत-ए-नबवी के मुताबिक अपनी आने वाली नस्लों की तरबियत करें। उन्होंने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया अमन के पैगाम के अड्डे हैं। जहां से गया पैगाम पूरी दुनिया में पहुंचता है। इस मौके पर संस्था के मोहतमिम कारी आमिर उस्मानी, दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना नसीम कासमी, कारी रहीमुद्दीन, डा. नौशाद, हाफिज शमशुद्दीन, जहाज देवबंदी, दानिश उस्मानी आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला अबुलमाली (शाहवीलायत) में स्थित मदरसे में आयोजित हुए कार्यक्रम में दारुल उलूम के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना फरीदुद्दीन कासमी ने कहा कि छात्रों को अपने कीमती वक्त की कद्र करनी चाहिए और अपना समय पढ़ाई में गुजारना चाहिए। इसके साथ ही छात्रों को चाहिए कि वह बुराईयों से दूर रहकर मेहनत, लगन और पूरी ईमानदारी के साथ अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए दीन-ए-इल्म हासिल करें। मौलाना शमशाद रहमानी ने कहा कि मदरसा छात्र कौम की अमानत है। इसलिए छात्रों की जिम्मेदारी बनती है कि वह तालीम हासिल कर पूरी दुनिया में कुरआन व हदीस की तालीम को आम करें। मदरसा के संस्थापक मौलाना अहमद नसर बनारसी ने छत्रों को बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलने और उस्तादों की इज्जत करने की नसीहत दी। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती जुनैद कासमी ने कहा कि छात्र जिस उद्देश्य के लिए यहां आए हैं उसी पर ध्यान केंद्रित करें और फिजूल कामों से बचें। कार्यक्रम में उलमा ने हफ्तुम, हिफ्ज और इफ्ता कक्षा के 40 छात्रों की दस्तारबंदी की। अंत में अध्यक्षता कर रहे मौलाना अहमद नसर ने छात्रों ने उज्ज्वल भविष्य और मुल्क में अमनो अमान के लिए दुआ कराई। संचालन कारी अब्दुल हक ने किया। इस मौके पर मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी, मौलाना अजीमुल्लाह, मुफ्ती जरीफुर्रहमान, मुफ्ती जाहिद, मुफ्ती सलमान, कारी असरार, कारी ऐजाजुलहक, मौलाना मोहम्मद अहमद आदि मौजूद रहे।
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जामिया कुदसियात में छात्राओं को पढ़ाया बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ (फोटो संख्या 2, 2ए)
देवबंद। मदरसा जामिया कुदसियात अल इस्लामिया लिल बनात में खत्म बुखारी शरीफ का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया गया।
मोहल्ला गुज्जरवाड़ा में स्थित मदरसे में हुए कार्यक्रम में दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि दीनी तालीम हासिल करने वाली छात्राओं की जिम्मेदारी बनती है कि वह समाज सुधार का काम करें और सुन्नत-ए-नबवी के मुताबिक अपनी आने वाली नस्लों की तरबियत करें। उन्होंने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया अमन के पैगाम के अड्डे हैं। जहां से गया पैगाम पूरी दुनिया में पहुंचता है। इस मौके पर संस्था के मोहतमिम कारी आमिर उस्मानी, दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना नसीम कासमी, कारी रहीमुद्दीन, डा. नौशाद, हाफिज शमशुद्दीन, जहाज देवबंदी, दानिश उस्मानी आदि मौजूद रहे।
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