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सदाचार से ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण: गुरुदत आर्य
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:37 AM IST
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वैदिक विद्वान डॉ धीरज आर्य का अभिनंदन किया
तितावी (मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज साल्हाखेड़ी में वेदों के प्रचारक डॉ धीरज कुमार आर्य की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मानित किया। आचार्य ने कहा कि जीवन में आचरण ही परम धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था, विश्वास नहीं आचरण है। सत्य के लिए संघर्ष में जीत मिलती है।
गांव साल्हाखेड़ी में आयोजित आर्य समाज की क्षेत्रीय सभा में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महाभारत काल तक राष्ट्र में वेदानुकूल शिक्षा, संस्कार, संस्कृति का पालन होता था। आचरण ही परम धर्म है। आचरण की पवित्रता व्यक्ति में सद्गुणों की ऊर्जा बढ़ाती है। सत्य और सदाचार के मार्ग में ही मानव आनंद, शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति कर सकता है। वैदिक विद्वान डॉ धीरज कुमार आर्य ने कहा कि राष्ट्रधर्म सबसे बड़ा धर्म है। मातृभूमि की संस्कृति की रक्षा हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य समझें। वैदिक धर्म सबसे प्राचीन है, वेद ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत्र है। अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग से बचें, सत्य को जानें। वानप्रस्थी आर्य मुनि ने कहा कि यज्ञ संस्कृति का मुख्य आधार है। परिवार में यज्ञ होंगे, संतान संस्कारित बनेगी। सभा में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक विद्वान डॉ धीरज आर्य को अंगवस्त्र और सम्मानित राशि भेंट कर उनका अभिनंदन किया। संसार सिंह आर्य, राजवीर सिंह आर्य, डॉ महेंद्र सिंह, किरण मुनि, डॉ नरेश आर्य ने भी विचार रखे। इस मौके पर सौरज सिंह आर्य, जितेंद्र सिंह आर्य, सहेंद्रपाल सिंह आर्य, पुष्पेंद्र आर्य, डॉ अश्वनी आर्य आदि मौजूद रहे। वैदिक धर्मप्रचार संगठन सिसौली और वैदिक आश्रम अलीपुर कलां के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। संचालन सत्यमुनि ने किया।
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तितावी (मुजफ्फरनगर)। आर्य समाज साल्हाखेड़ी में वेदों के प्रचारक डॉ धीरज कुमार आर्य की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मानित किया। आचार्य ने कहा कि जीवन में आचरण ही परम धर्म है। धर्म की कसौटी आस्था, विश्वास नहीं आचरण है। सत्य के लिए संघर्ष में जीत मिलती है।
गांव साल्हाखेड़ी में आयोजित आर्य समाज की क्षेत्रीय सभा में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महाभारत काल तक राष्ट्र में वेदानुकूल शिक्षा, संस्कार, संस्कृति का पालन होता था। आचरण ही परम धर्म है। आचरण की पवित्रता व्यक्ति में सद्गुणों की ऊर्जा बढ़ाती है। सत्य और सदाचार के मार्ग में ही मानव आनंद, शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति कर सकता है। वैदिक विद्वान डॉ धीरज कुमार आर्य ने कहा कि राष्ट्रधर्म सबसे बड़ा धर्म है। मातृभूमि की संस्कृति की रक्षा हेतु प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य समझें। वैदिक धर्म सबसे प्राचीन है, वेद ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत्र है। अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग से बचें, सत्य को जानें। वानप्रस्थी आर्य मुनि ने कहा कि यज्ञ संस्कृति का मुख्य आधार है। परिवार में यज्ञ होंगे, संतान संस्कारित बनेगी। सभा में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक विद्वान डॉ धीरज आर्य को अंगवस्त्र और सम्मानित राशि भेंट कर उनका अभिनंदन किया। संसार सिंह आर्य, राजवीर सिंह आर्य, डॉ महेंद्र सिंह, किरण मुनि, डॉ नरेश आर्य ने भी विचार रखे। इस मौके पर सौरज सिंह आर्य, जितेंद्र सिंह आर्य, सहेंद्रपाल सिंह आर्य, पुष्पेंद्र आर्य, डॉ अश्वनी आर्य आदि मौजूद रहे। वैदिक धर्मप्रचार संगठन सिसौली और वैदिक आश्रम अलीपुर कलां के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। संचालन सत्यमुनि ने किया।
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