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संग में बात होती है, संग में भजन नहीं होता-विजय कौशल
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:48 AM IST
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भगवान हर स्थिति में मिलते हैं : विजय कौशल
खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि भगवान से मिलने के लिए किसी शुद्धता की आवश्यकता नहीं है। किसी पवित्रता की आवश्यकता नहीं है। भगवान हर स्थिति में मिलते हैं। संग में बात होती है, संग में भजन नहीं होता है।
केके जैन एजूकेशन सभास्थल में श्रीराम कथा समिति की ओर से आयोजित धार्मिक समारोह में महाराज जी ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि धर्म को पगड़ी की तरह मत पहनिए, धर्म को चमड़ी की तरह पहनिए और ये बातें विशेषत: याद रखिए-मैं कौन हूं, इस दुनिया में क्यों आया हूं और अंत में मुझे जाना कहां है। इच्छाएं पूरी नहीं हो सकती। आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं। इसलिए आवश्यकताओं को बहाओ, इच्छाओं को सीमित रखें। जो आवश्यकताएं हैं केवल पूरा करते चलो सुखी रहोगे। भगवान श्रीराम कभी किसी के यहां बिना बुलाए नहीं जाते थे और भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त नंदनगरी में धमाल मचाया। महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करते हुए बताया कि नंदनगरी में सभी कृष्ण की शरारतों से परेशान थे। एक बार सबने परेशान होकर घर में माखन की मटकी के साथ घंटी में लगा दिया और कृष्ण भगवान जैसे माखन खाने के लिए आए तो घंटी देख वह समझ गए कि कुछ दाल में काला है।
उन्होंने घंटी से कहा ऐ घंटी जब तक मैं पूरा पेटभर भोग न लगाऊं, तब तक तुम बजना नहीं। घंटी ने कहा ठीक है और एक बच्चे की कमर पर चढ़कर कृष्ण ने मटकी तक पहुंचकर जैसे ही भोग लगाया, तुरंत घंटी बच गई। घंटी बजते ही पता चल गया कि कन्हैया आ गए और कन्हैया रंगेहाथों पकड़े गए। कन्हैया ने पूछा ऐ घंटी जब हमने तुम्हें बजने के लिए मना किया था, फिर क्यों बजी तो घंटी ने उत्तर दिया। ऐ प्रभु अगर मैं नहीं बजती तो आज शास्त्र झूठे हो जाते, क्योंकि मैंने शास्त्रों में पढ़ा है कि जब गोपाल जी का भोग लगाया जाता है तो घंटी बजाकर ही लगता है। गोपाल जी का बिना घंटी बजे भोग लगता ही नहीं। मंच संचालन अतुल अग्रवाल ने किया। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत अग्रवाल, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, नरेंद्र सिंह गहलोत, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली बंसल, अतुल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनित ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि उपस्थित रहे।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। श्रीराम कथा में कथा व्यास विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि भगवान से मिलने के लिए किसी शुद्धता की आवश्यकता नहीं है। किसी पवित्रता की आवश्यकता नहीं है। भगवान हर स्थिति में मिलते हैं। संग में बात होती है, संग में भजन नहीं होता है।
केके जैन एजूकेशन सभास्थल में श्रीराम कथा समिति की ओर से आयोजित धार्मिक समारोह में महाराज जी ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि धर्म को पगड़ी की तरह मत पहनिए, धर्म को चमड़ी की तरह पहनिए और ये बातें विशेषत: याद रखिए-मैं कौन हूं, इस दुनिया में क्यों आया हूं और अंत में मुझे जाना कहां है। इच्छाएं पूरी नहीं हो सकती। आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं। इसलिए आवश्यकताओं को बहाओ, इच्छाओं को सीमित रखें। जो आवश्यकताएं हैं केवल पूरा करते चलो सुखी रहोगे। भगवान श्रीराम कभी किसी के यहां बिना बुलाए नहीं जाते थे और भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त नंदनगरी में धमाल मचाया। महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करते हुए बताया कि नंदनगरी में सभी कृष्ण की शरारतों से परेशान थे। एक बार सबने परेशान होकर घर में माखन की मटकी के साथ घंटी में लगा दिया और कृष्ण भगवान जैसे माखन खाने के लिए आए तो घंटी देख वह समझ गए कि कुछ दाल में काला है।
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उन्होंने घंटी से कहा ऐ घंटी जब तक मैं पूरा पेटभर भोग न लगाऊं, तब तक तुम बजना नहीं। घंटी ने कहा ठीक है और एक बच्चे की कमर पर चढ़कर कृष्ण ने मटकी तक पहुंचकर जैसे ही भोग लगाया, तुरंत घंटी बच गई। घंटी बजते ही पता चल गया कि कन्हैया आ गए और कन्हैया रंगेहाथों पकड़े गए। कन्हैया ने पूछा ऐ घंटी जब हमने तुम्हें बजने के लिए मना किया था, फिर क्यों बजी तो घंटी ने उत्तर दिया। ऐ प्रभु अगर मैं नहीं बजती तो आज शास्त्र झूठे हो जाते, क्योंकि मैंने शास्त्रों में पढ़ा है कि जब गोपाल जी का भोग लगाया जाता है तो घंटी बजाकर ही लगता है। गोपाल जी का बिना घंटी बजे भोग लगता ही नहीं। मंच संचालन अतुल अग्रवाल ने किया। कथा में मुख्य रूप से समिति अध्यक्ष दीपक बंसल, सचिव ज्योति मोहन गोयल, कोषाध्यक्ष मदन छाबड़ा, सुधीर गोयल, प्रधानाचार्य संजीव शर्मा, प्रशांत अग्रवाल, मीनाक्षी बंसल, कमल लोचन, विशाल लोचन, धर्मेंद्र शर्मा, नरेंद्र सिंह गहलोत, सचिव शर्मा, सुधीर शर्मा, श्रीचंद शर्मा, डोली बंसल, अतुल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अमित बंसल, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, विनित ठाकुर, अक्षयजीत सहरावत, आलोक गोयल, अनिल धारीवाल, नरेश नागपाल आदि उपस्थित रहे।
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