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जैविक गन्ने से बने जैविक गुड़ को प्रोत्साहित करेंगे: डीएम

Thu, 27 Jun 2019 12:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 12:53 AM IST
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जैविक गन्ने से बने जैविक गुड़ को प्रोत्साहित करेंगे: डीएम
जैविक गन्ने से बने जैविक गुड़ को प्रोत्साहित करेंगे: डीएम
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मुजफ्फरनगर। डीएम अजय शंकर पांडेय ने कहा कि जैविक गन्ने से बने गुड़ को नई दिशा दी जाएगी। जैविक गुड़ बनाने के लिए कोल्हू संचालक प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जैविक गन्ने का उत्पाद कर जैविक गुड़ बनाने वाले किसानों, गुड़ उत्पादकों को एक समूह में जोड़ा जाए।
जिला पंचायत सभागार में कोल्हू संचालकों, गुड़ उत्पादकों एवं किसानों की बैठक में डीएम ने कहा कि जैविक गुड़ के दाम सामान्य गुड़ से अधिक हो इसके प्रयास किए जाएंगे। शासन को भी इस बारे में अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुड़ केमिकल फ्री होना चाहिए। ग्रीन गुड़ को भी बढ़ावा दिया जाए। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि आठ क्विंटल गन्ने से एक क्विंटल गुड़ बनता है। उपस्थित कोल्हू संचालकों द्वारा कोल्हू पर ईधन के रूप में गैस प्रयोग किए जाने की बात रखी गई। ऑटोमेशन प्लांट लगाने की भी बात की गई। कोल्हू संचालक रविंद्र प्रधान द्वारा अवगत कराया गया कि सामान्य गुड़ बनाने में कम से कम 3600 रूपये प्रति क्विंटल की लागत आती है, जबकि बाजार में सामान्य गुड़ का भाव 2400 से 2600 तक जाता है। उन्होंने कहा कि कम से कम गुड़ का मूल्य 4500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। गुड़ के रेट फिक्स किए जाएं। कार्यालयों में गुड़ खाना लागू कराने की बात कही गई। डीएम ने सुझाव दिया कि परंपरागत कोल्हू में प्रयोग होने वाली भट्ठियों के साथ गुम्बदनुमा भट्टी का प्रयोग हो तो ईधन की खपत भी कम होगी और गुड़ की उत्पादकता बढ़ने के साथ लागत में कमी आएगी।
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कोल्हू संचालकों ने कहा कि ऐसी तकनीक विकसित की जाए कि गुड़ के रस को स्टोर या प्रिजर्व करके रखा जा सके, ताकि बाद में भी उसका प्रयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनपद में एक टेस्टिंग लैब खोली जाए, जिसमें गन्ने के रस व गुड़ की टेस्टिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि बाजार में बिना केमिकल का गुड़ आना चाहिए। गुड़ उत्पादकों ने बताया कि दिल्ली एनसीआर में 10 हजार किग्रा प्रति दिन गुड़ की खपत है। नरेंद्र सिंह ने कहा कि कोल्हू संचालकों को सस्ती दर बिजली मुहैया कराई जाए, ताकि उनकी लागत कम हो और गुड़ के उत्पादन मे उन्हें कोई नुकसान न हो। संगीता तोमर ने कहा कि एनसीआर व मेट्रो सिटी में गुड़ की मार्केटिंग हो वहां पर भी कोल्हू लगाए जाए और सरकार इसमें सहयोग करे। जैविक गुड़ सामान्य गुड से कई गुना दाम में बिक रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मार्केटिंग भी अच्छी है। जैविक गुड़ बनाने वाले मुकेश गुप्ता ने कहा कि जैविक गुड़ बनाने वालों को मंडी समिति में स्थान दिया जाए। उनके अलग से स्टॉल आदि लगवाए, ताकि जैविक गुड़ उत्पादक अपनी पहचान बना सके। इस अवसर पर एडीएम प्रशासन अमित सिंह, जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य, जिला गन्नाधिकारी आरडी द्विवेदी, मंडी सचिव सहित अन्य अधिकारीगण एव गुड़ उत्पादक, कोल्हू संचालक सहित किसान उपस्थित रहे।
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