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दारुल उलूम वक्फ में शिक्षण सत्र आरंभ
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देवबंद (सहारनपुर)। दीनी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ में बुधवार को नवीन शिक्षण सत्र का शुभारंभ हो गया। संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने छात्रों को हदीस की सबसे बड़ी किताब बुखारी शरीफ का प्रथम पाठ पढ़ाया तथा उन्हें मेहनत, लगन और पूरी ईमानदारी के साथ शिक्षा हासिल करने को नसीहत की।
मौलाना सुफियान कासमी ने हजरत इमाम बुखारी और बुखारी शरीफ की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि पहली हदीस में ही इमाम बुखारी ने इस ओर इशारा दे दिया था कि आमाल का दारोमदार नीयत पर टिका हुआ है। इसलिए नीयत ठीक करके सिर्फ अल्लाह को राजी करने के लिए इल्म हासिल किया जाना चाहिए। संस्था के सदर मुदर्रिस व मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के मोहतमिम मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने छात्रों को उलमा की कुर्बानियों के बारे में बताते हुए आह्वान किया कि छात्र उनके नक्शे कदम पर चलकर खुद को उनके जैसा बनाएं। उन्होंने कहा कि छात्रों को चाहिए कि वह जिस उद्देश्य के लिए दूर दूर से यहां आए हैं उसी पर ध्यान लगाएं और फिजूल कामों से बचें। इस मौके पर मौलाना डा. शकेब कासमी मौलाना सिकंदर, मौलाना इस्लाम, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर आदि मौजूद रहे।
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मौलाना सुफियान कासमी ने हजरत इमाम बुखारी और बुखारी शरीफ की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि पहली हदीस में ही इमाम बुखारी ने इस ओर इशारा दे दिया था कि आमाल का दारोमदार नीयत पर टिका हुआ है। इसलिए नीयत ठीक करके सिर्फ अल्लाह को राजी करने के लिए इल्म हासिल किया जाना चाहिए। संस्था के सदर मुदर्रिस व मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के मोहतमिम मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने छात्रों को उलमा की कुर्बानियों के बारे में बताते हुए आह्वान किया कि छात्र उनके नक्शे कदम पर चलकर खुद को उनके जैसा बनाएं। उन्होंने कहा कि छात्रों को चाहिए कि वह जिस उद्देश्य के लिए दूर दूर से यहां आए हैं उसी पर ध्यान लगाएं और फिजूल कामों से बचें। इस मौके पर मौलाना डा. शकेब कासमी मौलाना सिकंदर, मौलाना इस्लाम, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर आदि मौजूद रहे।
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