{"_id":"5d0931918ebc3e0594555da5","slug":"156088358713-devband-news80","type":"story","status":"publish","title_hn":"फतवा: किसी जगह को आम किराए से कम पर लेना नाजायज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फतवा: किसी जगह को आम किराए से कम पर लेना नाजायज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम से जारी फतवे में मुफ्तियों ने मोटी रकम (हैवी डिपोजिट) जमा कराकर किसी जगह को बिना किराए के लेने या उस जगह को आम किराए से कम पर लेने को नाजायज करार दिया है। उनका कहना है कि जो रकम मकान मालिक के पास जमा कराई है वो उधार के हुक्म में है और उधार के बदले किसी भी तरह का नफा हासिल करने की इस्लाम हरगिज इजाजत नहीं देता है।
इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के मुफ्तियों से कासिम नसीम नामक व्यक्ति ने सवाल किया कि एक घर पांच लाख रुपये की रकम जमा करने पर मिल रहा है। जिसका कोई किराया नहीं होगा। किराया लिया भी जाता है तो वह कुछ सौ रुपये होंगे तथा कुछ रुपये बिल्डिंग की मेंटीनेंस (देखरेख) के नाम पर लिए जाएंगे, जबकि घर का असल किराया लगभग 15 लाख रुपये है। मसले की सूरत में क्या घर को किराए पर लिया जा सकता है। सवाल के जवाब में संस्था के मुफ्तियों की खंडपीठ ने कहा कि भारी भरकम रकम जमा कराकर किसी भी जगह को बिना किराए के लेना या उस जगह का आम किराए से कम किराया अदा करना नाजायज है। उन्होंने तर्क दिया कि किराएदार डिपोजिट के नाम पर जो रकम मकान मालिक को देता है शरीयत के अनुसार वह कर्ज के हुक्म में है और मकान मालिक उस डिपोजिट की बुनियाद पर ही उसे मुफ्त में या फिर कम किराए पर रहने दे रहा है। शरीयत में आया है कि कर्ज सिर्फ मदद व अहसान का मामला है। कर्ज पर किसी भी तरह का नफा हासिल करना जायज नहीं है। मुफ्तियों ने कासिम नसीम को इस तरह के मामलों से बचने और पूरे किराए पर किराएदारी का मामला करने की नसीहत दी है। सोशल मीडिया पर उक्त फतवा तेजी से वायरल हो रहा है।
विज्ञापन
इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के मुफ्तियों से कासिम नसीम नामक व्यक्ति ने सवाल किया कि एक घर पांच लाख रुपये की रकम जमा करने पर मिल रहा है। जिसका कोई किराया नहीं होगा। किराया लिया भी जाता है तो वह कुछ सौ रुपये होंगे तथा कुछ रुपये बिल्डिंग की मेंटीनेंस (देखरेख) के नाम पर लिए जाएंगे, जबकि घर का असल किराया लगभग 15 लाख रुपये है। मसले की सूरत में क्या घर को किराए पर लिया जा सकता है। सवाल के जवाब में संस्था के मुफ्तियों की खंडपीठ ने कहा कि भारी भरकम रकम जमा कराकर किसी भी जगह को बिना किराए के लेना या उस जगह का आम किराए से कम किराया अदा करना नाजायज है। उन्होंने तर्क दिया कि किराएदार डिपोजिट के नाम पर जो रकम मकान मालिक को देता है शरीयत के अनुसार वह कर्ज के हुक्म में है और मकान मालिक उस डिपोजिट की बुनियाद पर ही उसे मुफ्त में या फिर कम किराए पर रहने दे रहा है। शरीयत में आया है कि कर्ज सिर्फ मदद व अहसान का मामला है। कर्ज पर किसी भी तरह का नफा हासिल करना जायज नहीं है। मुफ्तियों ने कासिम नसीम को इस तरह के मामलों से बचने और पूरे किराए पर किराएदारी का मामला करने की नसीहत दी है। सोशल मीडिया पर उक्त फतवा तेजी से वायरल हो रहा है।
विज्ञापन