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सत्संग से होता है प्रभु से मिलन: सौम्या भारती
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मुजफ्फरनगर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संचालक आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सौम्या भारती ने प्रवचन कर संगत को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने प्रभु श्रीराम की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। गुरुकुल में उनकी शिक्षा का प्रसंग सुनाते हुए अयोध्या में पुन: लौटने की कथा सुनाई।
नई मंडी के पटेलनगर रामलीला भवन में श्रीराम कथा सुनाते हुए साध्वी सौम्या भारती ने कहा कि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास पहुंचकर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को मांगते हैं और श्रीराम अपने कार्य की पृष्ठ भूमि तैयार करते हुए मार्ग में ताड़का का वध करते हैं। आगे बढ़ते हुए गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्घार करते हैं एवं यज्ञ की रक्षा के बाद जनकपुरी में प्रवेश करते हैं। साध्वी ने बताया कि श्रीराम का जानकी से प्रथम मिलन पुष्प वाटिका में होता है। वास्तव में यह पुष्प वाटिका संत समाज का प्रतीक है। जब हमारे जीवन में सत्संग का आगमन होता है तब हमारा मिलन प्रभु एवं भक्ति से होता है। सत्संग मात्रा बातें या चर्चा का विषय नहीं वरन् संपूर्ण व्यवहारिकता है। गुरु मानव में ब्रह्मज्ञान से शांति की स्थापना कर समाज और फिर देश तथा विश्व को भी शांत कर सकता है। तभी समाज में एक भव्य क्रांति आ सकती है। कथा में भजनों के श्रवण से उपस्थित श्रृद्धालुओं ने खूब आनंद लिया। कथा का समापन प्रभु की आरती से किया गया। कथा में मुख्य अतिथि पूर्व सीएमओ डा. वीके जौहरी, डा. अंजू गर्ग, डा. एमएल गर्ग, प्रधानाचार्या शैली रंजन, रजनी गोयल, अनमोल गोयल आदि मौजूद रहे।
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नई मंडी के पटेलनगर रामलीला भवन में श्रीराम कथा सुनाते हुए साध्वी सौम्या भारती ने कहा कि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास पहुंचकर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को मांगते हैं और श्रीराम अपने कार्य की पृष्ठ भूमि तैयार करते हुए मार्ग में ताड़का का वध करते हैं। आगे बढ़ते हुए गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्घार करते हैं एवं यज्ञ की रक्षा के बाद जनकपुरी में प्रवेश करते हैं। साध्वी ने बताया कि श्रीराम का जानकी से प्रथम मिलन पुष्प वाटिका में होता है। वास्तव में यह पुष्प वाटिका संत समाज का प्रतीक है। जब हमारे जीवन में सत्संग का आगमन होता है तब हमारा मिलन प्रभु एवं भक्ति से होता है। सत्संग मात्रा बातें या चर्चा का विषय नहीं वरन् संपूर्ण व्यवहारिकता है। गुरु मानव में ब्रह्मज्ञान से शांति की स्थापना कर समाज और फिर देश तथा विश्व को भी शांत कर सकता है। तभी समाज में एक भव्य क्रांति आ सकती है। कथा में भजनों के श्रवण से उपस्थित श्रृद्धालुओं ने खूब आनंद लिया। कथा का समापन प्रभु की आरती से किया गया। कथा में मुख्य अतिथि पूर्व सीएमओ डा. वीके जौहरी, डा. अंजू गर्ग, डा. एमएल गर्ग, प्रधानाचार्या शैली रंजन, रजनी गोयल, अनमोल गोयल आदि मौजूद रहे।
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