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कम नहीं हो रहा है सर्दी का सितम
Updated Tue, 09 Jan 2018 01:17 AM IST
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कड़ाके की सर्दी में जनजीवन ठहरा
मुजफ्फरनगर। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के कारण जिले में सर्दी का सितम जारी है। शीतलहर के कारण जनजीवन ठहर गया है। ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में बच्चे और बुजुर्ग की सबसे ज्यादा भर्ती हो रहे है। सुबह और शाम के समय तो शहर की सड़कें भी सुनसान होने लगी है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
सोमवार को दिन में निकले सूरज की तपिश से भी लोगों को कोई राहत नहीं मिली। ठंडी हवाओं ने आम जनमानस को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ठंड बुजुर्गों के लिए कहर बनकर टूट रही है। बड़ी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं। ठंड से बचने के लिए कुछ बुजुर्ग तो दिन में भी बिस्तर नहीं छोड़ पा रहे हैं। हालात इस तरह के बन गए है कि सुबह दस बजे तक और शाम को सात बजे के बाद सड़कें सुनसान हो रही हैं। लोग मजबूरी में ही घर से बाहर निकल रहे हैं। शहर के हालात पहाड़ों जैसे हो गए हैं। दिन में भी ठंड के कारण महिलाएं और बच्चे बाजार में कम ही दिखाई दे रहे हैं। बाजार भी ठंड के कारण कुछ ही समय खुल पा रहे हैं। सुबह देरी से खुलने के साथ शाम को जल्द बंद हो रहे हैं। जिले में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। ठंड में सबसे ज्यादा असर दुपहिया वाहनों पर पडा है। ठंड में लोग दुपहिया वाहनों का प्रयोग कम कर रहे हैं, जिस तरह ठंड बढ रही शहर में मुख्य चौराहों पर अलाव की व्यवस्था भी बढ़ गई है। लोग काफी संख्या में रात्रि में अलाव का सहारा ले रहे हैं। इसी के साथ सड़क पर सोने वाले लोगों को शेल्टर होम में आसरा दिया गया है।
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मुजफ्फरनगर। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के कारण जिले में सर्दी का सितम जारी है। शीतलहर के कारण जनजीवन ठहर गया है। ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में बच्चे और बुजुर्ग की सबसे ज्यादा भर्ती हो रहे है। सुबह और शाम के समय तो शहर की सड़कें भी सुनसान होने लगी है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
सोमवार को दिन में निकले सूरज की तपिश से भी लोगों को कोई राहत नहीं मिली। ठंडी हवाओं ने आम जनमानस को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ठंड बुजुर्गों के लिए कहर बनकर टूट रही है। बड़ी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं। ठंड से बचने के लिए कुछ बुजुर्ग तो दिन में भी बिस्तर नहीं छोड़ पा रहे हैं। हालात इस तरह के बन गए है कि सुबह दस बजे तक और शाम को सात बजे के बाद सड़कें सुनसान हो रही हैं। लोग मजबूरी में ही घर से बाहर निकल रहे हैं। शहर के हालात पहाड़ों जैसे हो गए हैं। दिन में भी ठंड के कारण महिलाएं और बच्चे बाजार में कम ही दिखाई दे रहे हैं। बाजार भी ठंड के कारण कुछ ही समय खुल पा रहे हैं। सुबह देरी से खुलने के साथ शाम को जल्द बंद हो रहे हैं। जिले में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। ठंड में सबसे ज्यादा असर दुपहिया वाहनों पर पडा है। ठंड में लोग दुपहिया वाहनों का प्रयोग कम कर रहे हैं, जिस तरह ठंड बढ रही शहर में मुख्य चौराहों पर अलाव की व्यवस्था भी बढ़ गई है। लोग काफी संख्या में रात्रि में अलाव का सहारा ले रहे हैं। इसी के साथ सड़क पर सोने वाले लोगों को शेल्टर होम में आसरा दिया गया है।
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