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औषधि से केंद्र हुए खाली, कैसे मिलेगी सस्ती दवा
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:02 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री जन औषधि योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए जिले में खोले औषधि केंद्र दवा से खाली हैं। डिस्ट्रीब्यूटर और नोडल अफसर की हीलाहवाली ने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का बंटाधार कर दिया है। लाइसेंस बनवाने के बाद धारक दुकानों पर खाली बैठे हैं। हालांकि इस योजना के अभी तक छह ही लाइसेंस जारी हुए हैं, लेकिन दवाईयां न मिलने के कारण स्थिति बेपटरी है।
एलोपैथी को मात देेने और लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोले जाने की योजना तैयार की थी। जिसमें केंद्र खोलने वाले स्टोर संचालक को 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जानी थी। ऐसे में जनपद से योजना में दर्जनभर लोगों ने आवेदन किए। लाइसेंस के दौरान कइयों के पास फार्मेसिस्ट नहीं होने के चलते स्टोर नहीं खुल सके हैं। ड्रग विभाग से जिले में केवल छह औषधि केंद्र के लाइसेंस जारी हुए हैं, जो खतौली, बेहड़ा सादात, भोपा, गांधी कालोनी के साथ घासमंडी में बने हैं। जबकि कैराना, शामली के साथ अन्य कई स्थानों पर केंद्र खोले जाने के आवेदन लंबित हैं। दवाईयां नहीं मिलने के चलते लोगों को महंगी दवा खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल है कि लोगों का सस्ती दवा कैसे मिल पाएगी।
दवा के लिए भेजे पत्र, किए ई-मेल
मुजफ्फरनगर। जन औषधि केंद्रों पर दवाईयां उपलब्ध नहीं होने के कारण लगातार योजना के जिला प्रमुख ज्योति राठी, राजीव कुमार की ओर से डिस्ट्रीब्यूटर और नोडल अफसर गौतम कपूर को पत्र भेजने के साथ ईमेल किए गए हैं। दवाईयों के नाम पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। जबकि लखनऊ के डिस्ट्रीब्यूटर ट्यूलिक मेडिसिन के साथ योजना के सीईओ बिलाप चटर्जी को भी सूचना दी गई। लाइसेंस धारकों को छह से अधिक समय हो गया। दवाईयां उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
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600 प्रकार के प्रोडक्ट रखने होंगे
मुजफ्फरनगर। जन औषधि केंद्रों पर एलोपैथ के मुकाबले सभी दवाईयां उपलब्ध रहेंगी। इन पर 600 प्रकार के दवाईयों के प्रोडक्ट रखने हैं। जिनमें सर्जिकल, डायबिटिक, बीपी, कैंसर, हड्डी के साथ अनेक प्रकार के विटामिन, सामान्य बीमारियों को इस्तेमाल होने वाली दवाईयां शामिल हैं। जनपद में एकाध बार दवा पहुंची है, वो भी 50 से 100 प्रोडक्ट की, जिन्हें वितरित करने में दिक्कत आई है।
बोले अधिकारी...
ड्रग विभाग से छह लाइसेंस औषधि केंद्रों के लिए जारी हुए हैं। हालांकि इन लोगों को दवाईयां नहीं मिल सकी है, ऐसी जानकारी मिली है। विभाग में कई और लाइसेंस लंबित है। जिन्हें जांच के बाद लाइसेंस दिए जाएंगे। - जगबीर सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर मुजफ्फरनगर।
औषधि केंद्रों पर दवाईयां नहीं पहुंच पा रही है। इसके लिए डिस्टीब्यूटर, नोडल अधिकारी को कई बार लिखा जा चुका है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। जिसके चलते लोगों को सस्ती दवाईयां नहीं मिल पा रही है। - ज्योति राठी, जिला प्रमुख, जन औषधि योजना मुजफ्फरनगर।
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केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री जन औषधि योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए जिले में खोले औषधि केंद्र दवा से खाली हैं। डिस्ट्रीब्यूटर और नोडल अफसर की हीलाहवाली ने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का बंटाधार कर दिया है। लाइसेंस बनवाने के बाद धारक दुकानों पर खाली बैठे हैं। हालांकि इस योजना के अभी तक छह ही लाइसेंस जारी हुए हैं, लेकिन दवाईयां न मिलने के कारण स्थिति बेपटरी है।
एलोपैथी को मात देेने और लोगों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोले जाने की योजना तैयार की थी। जिसमें केंद्र खोलने वाले स्टोर संचालक को 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जानी थी। ऐसे में जनपद से योजना में दर्जनभर लोगों ने आवेदन किए। लाइसेंस के दौरान कइयों के पास फार्मेसिस्ट नहीं होने के चलते स्टोर नहीं खुल सके हैं। ड्रग विभाग से जिले में केवल छह औषधि केंद्र के लाइसेंस जारी हुए हैं, जो खतौली, बेहड़ा सादात, भोपा, गांधी कालोनी के साथ घासमंडी में बने हैं। जबकि कैराना, शामली के साथ अन्य कई स्थानों पर केंद्र खोले जाने के आवेदन लंबित हैं। दवाईयां नहीं मिलने के चलते लोगों को महंगी दवा खरीदने को विवश होना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल है कि लोगों का सस्ती दवा कैसे मिल पाएगी।
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दवा के लिए भेजे पत्र, किए ई-मेल
मुजफ्फरनगर। जन औषधि केंद्रों पर दवाईयां उपलब्ध नहीं होने के कारण लगातार योजना के जिला प्रमुख ज्योति राठी, राजीव कुमार की ओर से डिस्ट्रीब्यूटर और नोडल अफसर गौतम कपूर को पत्र भेजने के साथ ईमेल किए गए हैं। दवाईयों के नाम पर अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। जबकि लखनऊ के डिस्ट्रीब्यूटर ट्यूलिक मेडिसिन के साथ योजना के सीईओ बिलाप चटर्जी को भी सूचना दी गई। लाइसेंस धारकों को छह से अधिक समय हो गया। दवाईयां उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
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600 प्रकार के प्रोडक्ट रखने होंगे
मुजफ्फरनगर। जन औषधि केंद्रों पर एलोपैथ के मुकाबले सभी दवाईयां उपलब्ध रहेंगी। इन पर 600 प्रकार के दवाईयों के प्रोडक्ट रखने हैं। जिनमें सर्जिकल, डायबिटिक, बीपी, कैंसर, हड्डी के साथ अनेक प्रकार के विटामिन, सामान्य बीमारियों को इस्तेमाल होने वाली दवाईयां शामिल हैं। जनपद में एकाध बार दवा पहुंची है, वो भी 50 से 100 प्रोडक्ट की, जिन्हें वितरित करने में दिक्कत आई है।
बोले अधिकारी...
ड्रग विभाग से छह लाइसेंस औषधि केंद्रों के लिए जारी हुए हैं। हालांकि इन लोगों को दवाईयां नहीं मिल सकी है, ऐसी जानकारी मिली है। विभाग में कई और लाइसेंस लंबित है। जिन्हें जांच के बाद लाइसेंस दिए जाएंगे। - जगबीर सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर मुजफ्फरनगर।
औषधि केंद्रों पर दवाईयां नहीं पहुंच पा रही है। इसके लिए डिस्टीब्यूटर, नोडल अधिकारी को कई बार लिखा जा चुका है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। जिसके चलते लोगों को सस्ती दवाईयां नहीं मिल पा रही है। - ज्योति राठी, जिला प्रमुख, जन औषधि योजना मुजफ्फरनगर।