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बागवानी को बेहतर बनाने के उपाय बताए
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:33 PM IST
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बागवानी को बेहतर बनाने के उपाय बताए
मुजफ्फरनगर।
बागवानी को बेहतर बनाने और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने अनेक जानकारियां दी। विशेषज्ञों ने कहा कि फसलों का बौर निकलने से लेकर फल बनने तक की अवस्था बेहद संवेदनशील होती है। इस समय फसलों में नुकसान देने वाले कीट, रोग पैदा होते हैं। आम की फसल में मिज एवं भुनगा कीट, खर्रा रोग अधिक हानि पहुंचाते हैं।
हिंद एग्री हॉर्टिकल्चर सोसायटी के तत्वावधान में तितावी के गांव सैदपुर में एक दिवसीय उद्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र आर्या ने कहा कि इस बार पश्चिम यूपी में आम के पेड़ों पर बौर बहुत अच्छा है और रिकार्ड तोड़ उत्पादन की संभावनाएं हैं। इसी बीच मिज और भुनगा कीट पनपता है, जो बौर को निगल जाता है। मिज कीट मुलायम पत्तों में अंडे देता है, जिसकी सूंडी फलों, पत्तियों को खा लेती है। वरिष्ठ फल रोग विशेषज्ञ डॉ आरपी वर्मा ने कहा कि भुनगा कीट कोमल पत्तियों का रस चूसकर हानि पहुंचाता है। बादलयुक्त मौसम में खर्रा रोग बढ़ता है। इससे प्रभावित होकर फसल पकने से पहले टूटकर गिर जाती है। आम और लीची की फसल को बचाने के लिए बौर की दो-तीन इंच लंबाई की अवस्था पर फेनिटोथियान, मोनोकोओफास का प्रयास करें। चौधरी छोटूराम कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ आरके सिंह ने कहा कि लीची के पौधों में मैगो मिली बग से क्षति होती है। इसके बचाव के लिए थोमोक्सिन 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जाए। इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ बीरेंद्र सिंह बैस ने बताया कि देश के संपूर्ण विकास और कृषक को मजबूत करना होगा। तकनीकीयुक्त खेती से ही किसान खुशहाल होगा। इस दौरान गोष्ठी में 178 किसानों ने विशेषज्ञों से राय प्राप्त की। गोष्ठी का संचालन सोनिका राठी, अलका सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर शिवराज लाटियान, विनोद चाहल, किशन पाल, नदीम, अरुण त्यागी, अब्दुल रहीम, राजकुमार, विनोद जोगी, सूरज सिंह, चौधरी प्रताप सिंह, शाहनवाज, अफसर अली, कुलदीप राना, विनय सिंह आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर।
बागवानी को बेहतर बनाने और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने अनेक जानकारियां दी। विशेषज्ञों ने कहा कि फसलों का बौर निकलने से लेकर फल बनने तक की अवस्था बेहद संवेदनशील होती है। इस समय फसलों में नुकसान देने वाले कीट, रोग पैदा होते हैं। आम की फसल में मिज एवं भुनगा कीट, खर्रा रोग अधिक हानि पहुंचाते हैं।
हिंद एग्री हॉर्टिकल्चर सोसायटी के तत्वावधान में तितावी के गांव सैदपुर में एक दिवसीय उद्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र आर्या ने कहा कि इस बार पश्चिम यूपी में आम के पेड़ों पर बौर बहुत अच्छा है और रिकार्ड तोड़ उत्पादन की संभावनाएं हैं। इसी बीच मिज और भुनगा कीट पनपता है, जो बौर को निगल जाता है। मिज कीट मुलायम पत्तों में अंडे देता है, जिसकी सूंडी फलों, पत्तियों को खा लेती है। वरिष्ठ फल रोग विशेषज्ञ डॉ आरपी वर्मा ने कहा कि भुनगा कीट कोमल पत्तियों का रस चूसकर हानि पहुंचाता है। बादलयुक्त मौसम में खर्रा रोग बढ़ता है। इससे प्रभावित होकर फसल पकने से पहले टूटकर गिर जाती है। आम और लीची की फसल को बचाने के लिए बौर की दो-तीन इंच लंबाई की अवस्था पर फेनिटोथियान, मोनोकोओफास का प्रयास करें। चौधरी छोटूराम कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ आरके सिंह ने कहा कि लीची के पौधों में मैगो मिली बग से क्षति होती है। इसके बचाव के लिए थोमोक्सिन 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जाए। इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ बीरेंद्र सिंह बैस ने बताया कि देश के संपूर्ण विकास और कृषक को मजबूत करना होगा। तकनीकीयुक्त खेती से ही किसान खुशहाल होगा। इस दौरान गोष्ठी में 178 किसानों ने विशेषज्ञों से राय प्राप्त की। गोष्ठी का संचालन सोनिका राठी, अलका सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर शिवराज लाटियान, विनोद चाहल, किशन पाल, नदीम, अरुण त्यागी, अब्दुल रहीम, राजकुमार, विनोद जोगी, सूरज सिंह, चौधरी प्रताप सिंह, शाहनवाज, अफसर अली, कुलदीप राना, विनय सिंह आदि मौजूद रहे।
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